Yoga

Ujjayi Pranayam: Victorious Breath – Ocean Breath Technique & Benefits

Ujjayi Pranayam: Victorious Breath - Ocean Breath Technique & Benefits

Ujjayi Pranayam: Victorious Breath – Ocean Breath – Man has conquered so many things in this universe. He has acquired the most precious things to live a luxurious life. He has made advancements in the scientific field, but he knows very little about the potentialities hidden within him. He is unaware of the working of Pran and how it could …

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पृथ्वी मुद्रा: Prithvi Mudra (Earth Gesture): Steps, Benefits & Precautions

पृथ्वी मुद्रा: Prithvi Mudra (Earth Gesture): Steps, Benefits & Precautions

पृथ्वी मुद्रा (Earth Gesture): अनामिका उंगली तथा अंगूठे के सिरे को परस्पर मिलाने से पृथ्वी मुद्रा बनती है। अनामिका रजोगुणी उंगली है। इसी कारण आज्ञा चक्र पर अनामिका तथा अंगूठे के द्वारा शुभ संकल्प के साथ विधिवत् तिलक करके कोई भी योग्य व्यक्ति दूसरे व्यक्ति में शक्ति प्रदान कर सकता है। उसकी प्राणशक्ति बढ़ा सकता है। कारण, अनामिका में तेज …

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विपरीतकरणी आसन: Legs Up the Wall Pose

विपरीतकरणी आसन: Legs Up the Wall Pose

विपरीतकरणी आसन: कहा जाता है कि सोम मंडल से जो अमृत का स्राव होता है, वह नाभि में स्थित सूर्य मंडल द्वारा भस्म हो जाता है। ऐसा होने पर व्यक्ति को जल्दी बुढ़ापा आता है। इस प्रक्रिया को रोकने का अचूक इलाज विपरीतकरणी आसन है क्योंकि इस आसन में नाभि तक ऊपर-नीचे हो जाता है अर्थात् सूर्य मंडल ऊपर व चन्द्र …

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Surya Namaskar: सम्पूर्ण व्यायाम है ‘सूर्य नमस्कार’

Surya Namaskar: सम्पूर्ण व्यायाम है 'सूर्य नमस्कार'

सूर्य नमस्कार एक सम्पूर्ण व्यायाम है। अगर आपके पास ज्यादा वक्त नहीं है तो सुबह 10 बार सूर्य नमस्कार करने से भी आपके पूरे शरीर की एक्सरसाइज हो जाएगी। इससे शरीर को ऊर्जा मिलती है और मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है। यह इम्यून सिस्टम और हार्मोनल सिस्टम को बैलेंस करता है। इसमें कुल 12 आसन हैं। सूर्य नमस्कार नीचे …

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योगिक अथवा वैज्ञानिक मालिश: Yogic or Scientific Massage

योगिक अथवा वैज्ञानिक मालिश: Yogic or Scientific Massage

योगिक अथवा वैज्ञानिक मालिश: शरीर के सभी अंगों की क्रियाशीलता एवं स्वास्थ्य इन अंगों को प्रचुर मात्रा में शुद्ध रक्त (Oxygenated Blood) की आपूर्ति पर निर्भर है। सभी शारीरिक, मानसिक, ऐच्छिक एवं अनैच्छिक क्रियाओं के माध्यम से हमारा रक्त अशुद्ध होता रहता है तथा शरीर में इसका निरंतर शोधन भी होता रहता है। शरीर में मुख्यतः तीन प्रणालियों के माध्यम …

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नमस्कार मुद्रा: Namaskar Mudra – अंजलि मुद्रा (Anjali Mudra)

नमस्कार मुद्रा: Namaskar Mudra - Anjali Mudra

भारतीय संस्कृति में नमस्कार मुद्रा अत्यंत महत्त्वपूर्ण स्थान रखती है। हम नमस्कार मुद्रा का प्रयोग प्रार्थना, ध्यान, मंत्रोच्चारण या किसी अतिथि / परिचित के स्वागत-सम्मान हेतु करते हैं। नमस्कार मुद्रा: Namaskar Mudra – अंजलि मुद्रा (Anjali Mudra) विधि: किसी भी ध्यान के आसन (पद्मासन, सिद्धासन, सुखासन) में बैठें। दोनों हाथ नमस्कार मुद्रा में जोड़ लें। अंगूठे का मूल भाग छाती …

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सहज ध्यान साधना: Effortless Meditation Practice

सहज ध्यान साधना: Effortless Meditation Practice

सहज ध्यान साधना: शरीर को स्थिर करने के पश्चात इन्द्रियों का बाहरी वस्तुओं से संपर्क तोड़ना ध्यान है। मन को नाशवान वस्तुओं व सांसारिक विषयों से हटा देना ध्यान है। मन को अपने मूल स्वभाव में ठहरने की आदत डालना ध्यान है। बुद्धि की निरपेक्षता अर्थात् तटस्थ भाव देना ध्यान है। चित्त पर जमा संस्कारों को हटाना ध्यान है। मन …

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सब कुछ है… फिर भी शांति नहीं: एक युवा की कहानी और योग का उत्तर

सब कुछ है... फिर भी शांति नहीं: एक युवा की कहानी और योग का उत्तर

एक मुलाकात… जिसने सोच बदल दी कुछ समय पहले, मेरी मुलाकात एक युवा से हुई। वह ऊर्जावान था, पढ़ा-लिखा था और उसके भीतर आगे बढ़ने की तीव्र इच्छा भी थी। उसके पास अवसर थे, संसाधन थे और सपनों की कोई कमी नहीं थी। फिर भी, उसकी आँखों में एक अजीब-सी थकान थी—मानो वह भीतर से बोझिल हो। सब कुछ है… …

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भारत के युवा और योग: India’s Youth and Yoga

भारत के युवा और योग: India's Youth and Yoga

आजकल युवकों की आयु 15–24 या 29 वर्ष के बीच मानी जाती है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार 15–24 वर्ष के लोग युवा हैं, जबकि भारत में राष्ट्रीय युवा नीति के संदर्भ में 15–29 वर्ष की आयु वर्ग का उपयोग किया जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार 18 से 44 वर्ष की आयु युवाओं के लिए मानी गई है। …

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योग के बाधक व साधक तत्त्व: Factors Hindering & Facilitating Yoga

योग के बाधक व साधक तत्त्व: Factors Hindering & Facilitating Yoga

जिस प्रकार विभिन्न नदियाँ आपस में मिलकर अंत में समुद्र में मिल जाती हैं, ठीक उसी प्रकार, योग की विभिन्न विधियाँ, जैसे भक्ति योग, कर्म योग, ज्ञान योग, राज योग, मंत्र योग व हठ योग आदि का शारीरिक व मानसिक उद्देश्य भी मोक्ष को प्राप्त करना है। पर योग के साधक को साधना करते हुए विभिन्न बाधाओं का सामना करना …

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