Hasyasana: Laughter Pose [हास्यासन – हँसी योग] – Hasya means laughter and Asan means pose. Hasyasan is helpful to be free from anxieties, stress and tension. Laughter is a natural activity. Laughter exercise has it’s miraculous effect on all the systems of our body, like, the digestive system, the respiratory system, circulatory system, nervous system and glandular system etc. Hasyasana: …
Read More »घेरण्ड संहिता का सम्पूर्ण सार: Gheranda Samhita – One of three major texts of Hatha Yoga
Gheranda Samhita is one of the three major texts of Hatha Yoga . The other two texts are Hatha Yoga Pradipika and Shiva Samhita . It was composed in the latter half of the 17th century. Among the three texts of Hatha Yoga, it is the most extensive and complete. It provides practical education of Saptanga Yoga. Gheranda Samhita is …
Read More »षट्कर्म – कपालभाति क्रिया: Shatkarma – 6 Practices in Hatha Yoga
महर्षि घेरण्ड ने प्रथम अध्याय के षट्कर्म प्रकरण के 55वें सूत्र में कपालभाति की व्याख्या करते हुए कहा है: वातक्रमेण व्युत्क्रमेण शीत्क्रमेण विशेषतः। भालभाति त्रिधा कुर्यात्कफदोषं निवारयेत्॥ (घे.सं. 1/55) इस सूत्र में महर्षि घेरण्ड ने कपालभाति के तीन प्रकार कहे हैं: वातक्रम कपालभाति, व्युत्क्रम कपालभाति व शीत्क्रम कपालभाति। इन तीनों प्रकार की कपालभाति का अभ्यास करने से शरीर के कफ …
Read More »मन के रोग और योग: Role of Yoga & Mindfulness in Severe Mental Illnesses
तन से ज्यादा भारी हो जाता है मन, जब आ जाता है अवसाद की जकड़ में। कुंठने लगती है जीने की चाह, जब खुशियां नहीं आतीं पकड़ में।। मन हमारे शरीर का ऐसा अवयव है, जो न तो दिखता है, न महसूस होता है। जिसे हम छू भी नहीं सकते, लेकिन उसका हमारे शरीर पर पूरा नियंत्रण है। इसलिए इसका …
Read More »मन के आठ द्वार: विचारों के सोपान से अध्यात्म तक – Eight Gateways of the Mind
विचार ही नियति हैं: मनुष्य के जीवन का आधार उसके विचार हैं। महान दार्शनिकों ने कहा है कि “हम वही बनते हैं, जो हम दिन भर सोचते हैं।” हमारा मस्तिष्क एक रेडियो स्टेशन की तरह है, जो हर पल अलग-अलग फ्रीक्वेंसी (Frequency) पर विचार प्रसारित करता रहता है। आधुनिक मनोविज्ञान और प्राचीन आध्यात्मिकता, दोनों इस बात पर सहमत हैं कि …
Read More »Vipareet Karni Mudra (विपरीत करणी मुद्रा): Precautions, Technique & Benefits
Vipareet Karni Mudra (Inverted Gesture) – The word Vipareet Karni Mudra is derived from Sanskrit. Vipareet means Inverted, Karni means Action and Mudra means Gesture, seal or altitude. It is a full body gesture. Vipareet Karni is also practised as Asan. The purpose of this Mudra is to redirect the energy upwards. Vipareet Karni Mudra: विपरीत करणी मुद्रा Precautions: People suffering …
Read More »जानुशीर्षासन: तरीका और फायदे – Janu Sirsasana: Head-to-Knee Forward Bend
जानुशीर्षासन आसन की पूर्ण स्थिति में सिर सिर को जानु अर्थात घुटने के साथ लगाया जाता है। अतः इसे जानुशिरासन कहते हैं। इस आसन को अर्धपश्चिमोत्तानासन भी कहा जाता है। जानुशीर्षासन करने का तरीका और फायदे Janu Sirsasana (Head-to-Knee Forward Bend) steps and benefits in Hindi सावधानी: स्लिप डिस्क व कमर दर्द के रोगी तथा गर्भवती महिलाएं इस आसन का …
Read More »योग द्वारा स्मृति व बुद्धि विकास: Development of Memory & Intellect through Yoga
प्रत्येक मानव को जीवन में स्मरण-शक्ति की आवश्यकता है। स्मरण-शक्ति या स्मृति मानव-शास्त्र की फोटोग्राफ मशीन की तरह है, जो बुद्धि से विचारों को ग्रहण करती है, उनका रिकॉर्ड बनाती है और समय पड़ने पर उनको प्रस्तुत करती है। यदि हमारी स्मृति शक्ति अच्छी हो तो एक बार याद की गई बात कभी नष्ट नहीं होती। स्मृति के निम्न मुख्य …
Read More »योग का महत्व: The Importance of Yoga
षट्कर्मणा शोधनं च आसनेन भवेद्दृढ़म्। मुद्रया स्थिरता चैव प्रत्याहारेण धीरता॥ प्राणायामाल्लाघवं च ध्यानत्प्रत्यक्षमात्मनः। समाधिना च निर्लिप्तं मुक्तिरेवं न संशयः॥ अर्थात् षटकर्मों से शरीर का शोधन, आसनों से दृढ़ता, मुद्राओं से स्थिरता, प्रत्याहार से धैर्य, प्राणायाम से हल्कापन, ध्यान से आत्म-साक्षात्कार एवं समाधि से निर्लिप्तता का भाव उत्पन्न होता है, जिससे मुक्ति में कोई संशय नहीं रहता। योग संन्यासियों या मोक्ष …
Read More »आर्थराइटिस में मुद्राओं की भूमिका: Role of Yoga Mudras in Arthritis
समस्त सृष्टि पाँच तत्वों से मिलकर बनी है। हमारा शरीर भी इन्हीं पाँच तत्वों – पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश से मिलकर बना है। आकाश खाली स्थान (Space) को कहा जाता है। पृथ्वी सबसे स्थूल है तथा क्रमवार जल, अग्नि और वायु उससे सूक्ष्म होते हैं। आकाश सबसे सूक्ष्म माना जाता है। जब तक ये पाँचों तत्व शरीर में …
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