Yoga

हृदय रोग कारक – उच्च कोलेस्ट्रॉल: Heart Disease Prime Factor – High Cholesterol

हृदय रोग कारक - उच्च कोलेस्ट्रॉल: Heart Disease Prime Factor - High Cholesterol

कोलेस्ट्रॉल के बिना शरीर के अनेकों आवश्यक कार्य पूरे नहीं हो सकते। लेकिन इसकी अधिक मात्रा कई जोखिम भरी चिकित्सीय समस्याओं को जन्म देती है। एक स्वस्थ व्यक्ति में कुल कोलेस्ट्रॉल 200 mg/dl से कम, खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) 100 mg/dl से कम तथा अच्छा कोलेस्ट्रॉल (HDL) पुरुषों में 50 mg/dl और महिलाओं में 40 mg/dl से अधिक होना चाहिए। रक्त …

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धमनी विकार: कारण व योगिक उपचार – Arterial Disorders

धमनी विकार: कारण व योगिक उपचार - Arterial Disorders

धमनियाँ (Arteries) वे रक्त वाहिकाएँ हैं, जो हृदय से ऑक्सीजन युक्त रक्त को शरीर के विभिन्न भागों तक पहुँचाती हैं। इन धमनियों में किसी प्रकार की रुकावट, संकुचन, कठोरता या लचीलापन कम हो जाने से रक्त ही धमनी विकार कहा जाता है। धमनियों का यह विकार शरीर के रक्त संचार तंत्र (Circulatory System) को प्रभावित करता है, जिसके परिणामस्वरूप हृदय, …

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हृदय रोग और योग: Yoga For Heart Health

हृदय रोग और योग: Yoga For Heart Health

हृदय एक पेशीय, खोखला, संकुचनशील, मुट्ठी के आकार का अंग है। यह छाती की हड्डी के पीछे और फेफड़ों के मध्य कुछ बायीं ओर स्थित रहता है। यह शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग है, जो जन्म से मृत्यु तक 24 घंटे, दिन-रात, जीवन भर कार्य करता है। यह शरीर से अशुद्ध रक्त को प्राप्त करके फेफड़ों में शुद्ध करने के …

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हस्त उत्तानासन योगासन: Hasta Uttanasana – पेट और कमर दर्द को दूर करे

हस्त उत्तानासन योगासन: Hasta Uttanasana - पेट और कमर दर्द को दूर करे

हस्त उत्तानासन योग के अभ्यास की मदद से पेट और कमर दर्द से संबंधित परेशानियों को दूर किया जा सकता है। योग से शरीर को अनगिनत फायदे मिलते हैं। इससे आपका शरीर स्वस्थ और मन में शांति का अनुभव होता है। योग करने से कई बीमारियां और समस्याएं भी दूर रहती है, जो आपकी दिनचर्या को प्रभावित कर सकती है …

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Agnisar Pranayama (अग्निसार प्राणायाम): अग्निसार क्रिया से पाचन तंत्र को बेहतर बनाएं

Agnisar Pranayama (अग्निसार प्राणायाम): अग्निसार क्रिया से पाचन तंत्र को बेहतर बनाएं

Agnisar Pranayama (अग्निसार प्राणायाम): Agnisar Kriya is a pranayama as well as a part of Shatkarma. In Shatkarma, this kriya is known as Vahnisar Dhauti. The word ‘Agni’ and ‘Vahni’ both mean ‘fire’. When fire weakens, it needs to be fanned to increase its power. Agnisar Kriya helps to increase the digestive fire and improves the appetite. Agnisar Pranayama (अग्निसार …

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गोमुखासन: Gomukhasana – Cow Pose गाय के मुख के समान आकृति

गोमुखासन: Gomukhasana - Cow Pose गाय के मुख के समान आकृति

गोमुखासन (Gomukhasana – Cow Pose): इस आसन में व्यक्ति की आकृति गाय के मुख के समान बन जाती है इसीलिए इसे गोमुखासन कहते हैं। गोमुखासन की विधि: Gomukhasana – Cow Pose पहले दंडासन अर्थात दोनों पैरों को सामने सीधे एड़ी-पंजों को मिलाकर बैठे। हाथ कमर से सटे हुए और हथेलियां भूमि टिकी हुई। नजरें सामने। अब बाएं पैर को मोड़कर एड़ी …

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प्रत्याहार: व्याख्या, अष्टांग योग, प्रत्याहार के प्रकार व साधना के सूत्र

Pratyahar

प्रत्याहार दो शब्दों से मिल कर बना है, प्रति + आहार। जैसे घात-प्रतिघात, ध्वनि-प्रतिध्वनि अर्थात्‌ विपरीत या उल्टा। ऐसे ही प्रत्याहार का अर्थ है विपरीत आहार। महर्षि पतंजलि ने योग दर्शन में योग के आठ अंग बतलाए हैं – यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि। इनमें प्रत्याहार पाँचवें स्थान पर है। पतंजलि दर्शन, योग की क्रमवार साधना …

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हृदय की धड़कन की अनियमिता: Atrial Fibrillation

हृदय की धड़कन की अनियमिता: Atrial Fibrillation

अलिंद विकंपन (Atrial Fibrillation) हृदय की गति का अकस्मात नियमित रूप से तेज हो जाने का रोग है। दिल की सामान्य धड़कन विश्राम की स्थिति में एक मिनट में 60 से 80 तक होती है। लेकिन अलिंद विकम्पन में यह धड़कन 100 से 200 तक पहुँच जाती है, जो बहुत अधिक होती है। हृदय में मचा यह हड़कंप पीड़ित व्यक्ति …

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अर्ध शलभासन Ardha Shalabhasana: Half Locust Pose

अर्ध शलभासन Ardha Shalabhasana: Half Locust Pose

अर्ध शलभासन Half Locust Pose: आए की पूर्ण स्थिति में शरीर की आकृति टिड्डे के समान बनती है। इसलिए इसे शलभासन कहा जाता है। जब हम इसकी पूर्व अवस्था का अभ्यास करते हैं अर्थात्‌ इस आसन को एक-एक टाँग से किया जाता है तो उसे अर्ध शलभासन कहते हैं। अर्ध शलभासन Ardha Shalabhasana: Half Locust Pose सावधानी: पेट में अल्सर …

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