भारत के युवा और योग: India's Youth and Yoga

भारत के युवा और योग: India’s Youth and Yoga

आजकल युवकों की आयु 15–24 या 29 वर्ष के बीच मानी जाती है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार 15–24 वर्ष के लोग युवा हैं, जबकि भारत में राष्ट्रीय युवा नीति के संदर्भ में 15–29 वर्ष की आयु वर्ग का उपयोग किया जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार 18 से 44 वर्ष की आयु युवाओं के लिए मानी गई है। युवाओं की परिभाषा में वे लोग भी आते हैं, जिन्हें Gen-Z कहा जाता है और ऐसे लोगों का जन्म 1997 से 2012 के बीच हुआ है। इन्हें Digital Natives या Zoomers भी कहा जाता है क्योंकि ये स्मार्टफोन और इंटरनेट के दौर में पले-बढ़े हैं। यह पीढ़ी तकनीकी से ओत-प्रोत, सामाजिक रूप से जागरूक और स्वतंत्र सोच वाली होती है। संक्षेप में, युवावस्था बचपन की निर्भरता से वयस्कता की स्वतंत्रता तक का एक परिवर्तनकारी दौर है।

भारत के युवा और योग: India’s Youth and Yoga

समाज में युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि वे देश की रीढ़ और भविष्य के संवाहक होते हैं। युवा न केवल सामाजिक बुराइयों के विरुद्ध लड़ते हैं, बल्कि देश की एकता, विकास और तकनीकी प्रगति में भी प्रमुख योगदान देते हैं। युवा रूढ़िवादी परंपराओं और सामाजिक बुराइयों, जैसे दहेज, अशिक्षा, असमानता के विरुद्ध आवाज उठाते हैं और आधुनिक प्रगतिशील सोच को बढ़ावा देते हैं। युवा शक्ति अपने परिश्रम और रचनात्मकता के बल पर तकनीकी नवाचार, उद्यमिता और शिक्षा के क्षेत्र में देश को नई ऊँचाइयों पर ले जाती है। आज के युवा ही कल के नागरिक हैं, जो देश की बागडोर संभालेंगे और सामाजिक जीवन मूल्यों के प्रतीक बनेंगे। युवाओं को सही दिशा और अवसर देकर ही किसी राष्ट्र को विकसित किया जा सकता है। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत दुनिया की सबसे युवा आबादी वाला देश है। देश की लगभग 65% जनसंख्या की आयु 35 वर्ष से कम है। युवाओं को प्रत्येक देश की सबसे महत्वपूर्ण संपत्ति माना जाता है क्योंकि उनकी बुद्धिमत्ता और कड़ी मेहनत ही देश को सफलता और समृद्धि की राह पर ले जाती है। वे हमारे देश का भविष्य हैं। हमारे देश की उन्नति युवाओं पर ही टिकी है। युवाओं की सही सोच हमारे देश में गलत सोच के विरुद्ध अच्छा हथियार है। युवा अपने उत्साह, ऊर्जा और जोश के माध्यम से सकारात्मक बदलाव लाने की क्षमता रखते हैं। राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि वे नए विचारों के माध्यम से सामाजिक बुराइयों को चुनौती दे सकते हैं और समानता के लिए काम कर सकते हैं।

शिक्षा के बोझ, प्रतिस्पर्धी माहौल और करियर की अनिश्चितता के कारण युवाओं में तनाव, अवसाद और आत्महत्या की प्रवृत्ति बढ़ रही है। नशीले तंबाकू, शराब और नशीली दवाओं का उपयोग बढ़ रहा है, जो उनके स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचा रहा है।

युवाओं को तनाव, अवसाद तथा सोशल मीडिया के बढ़ते कुप्रभाव से बचाने में योगाभ्यास की महत्वपूर्ण भूमिका है। योगाभ्यास उनमें स्फूर्ति, फुर्ती तथा लचीलापन तो लाएगा ही, साथ ही उनके मानसिक स्वास्थ्य के लिए हर तरह की टॉनिक का काम करेगा। प्रतिदिन योगाभ्यास तथा ध्यान के अभ्यास से उनमें एकाग्रता, भावनात्मक स्थिरता, बेहतर जीवन-शैली तथा आकर्षक व्यक्तित्व का समावेश होगा। इस संदर्भ में, भारतीय योग संस्थान के निःशुल्क योग साधना केंद्र महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। ये केंद्र भारत के अधिकतम शहरों में खुले पार्कों आदि में नियमित रूप से चलाए जा रहे हैं। इन केंद्रों के माध्यम से युवक बड़ी संख्या में लाभान्वित हो रहे हैं।

अतः देश के युवकों को तनाव, अवसाद, निराशा तथा बुरी आदतों से बचाकर उन्हें सही दिशा में ले जाने के लिए योगाभ्यास रामबाण का काम करेगा।

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