पृथ्वी मुद्रा: Prithvi Mudra (Earth Gesture): Steps, Benefits & Precautions

पृथ्वी मुद्रा: Prithvi Mudra (Earth Gesture): Steps, Benefits & Precautions

पृथ्वी मुद्रा (Earth Gesture): अनामिका उंगली तथा अंगूठे के सिरे को परस्पर मिलाने से पृथ्वी मुद्रा बनती है। अनामिका रजोगुणी उंगली है। इसी कारण आज्ञा चक्र पर अनामिका तथा अंगूठे के द्वारा शुभ संकल्प के साथ विधिवत् तिलक करके कोई भी योग्य व्यक्ति दूसरे व्यक्ति में शक्ति प्रदान कर सकता है। उसकी प्राणशक्ति बढ़ा सकता है। कारण, अनामिका में तेज का विशेष प्रवाह होता है।

पृथ्वी मुद्रा: Earth Gesture

जिस प्रकार पृथ्वी माँ हमारा पोषण करती है, उसी तरह पृथ्वी मुद्रा शरीर का पोषण करती है। अतः पृथ्वी मुद्रा प्राकृतिक टॉनिक है। इसे सुखासन या वज्रासन में लगाना अच्छा रहता है। आवश्यकता से अधिक न करें, अन्यथा भार बढ़ जाएगा।

लाभ:

  1. दुर्बल एवं दुबले व्यक्तियों को मनचाहा वजन बढ़ाने में सहायक।
  2. प्रखर ऊर्जा का संचार होने से विचारों की संकीर्णता मिटती है।
  3. नित्य अभ्यास से शरीर स्वस्थ, मन प्रसन्न, स्फूर्तिवान व आनंद से भरपूर रहता है। सहनशीलता आती है।
  4. पृथ्वी तत्व एवं विटामिनों की कमी दूर होती है। हड्डियाँ मजबूत बनती हैं।
  5. तामसिक गुणों का नाश होता है तथा राजसिक गुण विकसित होते हैं।
  6. सर्दी, जुकाम, ट्यूमर, प्रोस्टेट, बौनापन, खून की कमी, पाचन आदि रोग ठीक होते हैं।
  7. मूलाधार चक्र सक्रिय होता है।
  8. प्रतिदिन 48 मिनट लगाने से बच्चों का कद बढ़ता है।
  9. खून की कमी दूर होती है। अस्थिक्षय दूर होता है। आवश्यकता से अधिक करने पर भार बढ़ जाएगा। 24 से 48 मिनट तक करें।

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