सपनों में डूब–से स्वर में जब तुम कुछ भी कहती हो मन जैसे ताज़े फूलों के झरनों में घुल सा जाता है जैसे गंधर्वों की नगरी में गीतों से चंदन का जादू–दरवाज़ा खुल जाता है बातों पर बातें, ज्यों जूही के फूलों पर जूही के फूलों की परतें जम जाती हैं मंत्रों में बंध जाती हैं ज्यों दोनों उम्रें दिन …
Read More »बात बात में – शिवमंगल सिंह ‘सुमन’
इस जीवन में बैठे ठाले ऐसे क्षण भी आ जाते हैं जब हम अपने से ही अपनी–बीती कहने लग जाते हैं। तन खोया–खोया–सा लगता‚ मन उर्वर–सा हो जाता है कुछ खोया–सा मिल जाता है‚ कुछ मिला हुआ खो जाता है। लगता‚ सुख दुख की स्मृतियों के कुछ बिखरे तार बुना डालूं यों ही सूने में अंतर के कुछ भाव–अभाव सुना …
Read More »बाल पत्रिकाएं – ओम प्रकाश बजाज
बाल पत्रिकाओं में भी रूचि दिखाओ, खाली समय में इनका लाभ उठाओ। अपनी पसंद की बाल पत्रिकाएं, बुकस्टाल से लो या सीधे मंगाओं। कविताएं, कहानियां, लेखों, चुटकलों से, ज्ञान बढ़ाओ, मनोरंजन पाओ। इनमें छुपी रचनाएं देख – समझ कर, तुम भी साहस करो और कलम उठाओ। अपने मित्रों से अदला – बदली करके, कम खर्च में अधिक पत्रिकाएं जुटाओ। ज्ञान …
Read More »बाँधो न नाव इस ठाँव, बन्धु – सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’
बाँधो न नाव इस ठाँव, बन्धु! पूछेगा सारा गाँव, बन्धु! यह घाट वही जिस पर हँसकर, वह कभी नहाती थी धँसकर, आँखें रह जाती थीं फँसकर, कँपते थे दोनों पाँव बन्धु! बाँधो न नाव इस ठाँव, बन्धु! पूछेगा सारा गाँव, बन्धु! वह हँसी बहुत कुछ कहती थी, फिर भी अपने में रहती थी, सबकी सुनती थी, सहती थी, देती थी …
Read More »बाज़ लोग – अनामिका
बाज़ लोग जिनका कोई नहीं होता‚ और जो कोई नहीं होते‚ कहीं के नहीं होते– झुण्ड बना कर बैठ जाते हैं कभी–कभी बुझते अलावों के चारो तरफ । फिर अपनी बेडौल‚ खुरदुरी‚ अश्वस्त हथेलियां पसार कर वे सिर्फ आग नहीं तापते‚ आग को देते हैं आशीष कि आग जिये‚ जहां भी बची है‚ वह जीती रहे और खूब जिये! बाज़ …
Read More »भौंचक – ओम प्रकाश बजाज
मुन्ना – मुन्नी भौंचक हो कर, ताकते ही रह जाते हैं। दादा जी अपने बचपन की, जब बातें उन्हें सुनाते हैं। घी दूध आनाज फल सब्जियां, कितने सस्ते मिलते थे। कितनी कम आय में तब, परिवार के खर्चें चलते थे। टि. वी. कंप्यूटर, मोबाइल का तो, नाम सुनने में नहीं आया था। बिग बाज़ार और मॉल नहीं थे, भीड़ भाड़ …
Read More »नारियल – ओम प्रकाश बजाज
पूजा में यह काम आता हैं, शगुन में भी दिया जाता है। कच्चे हरे नारियल का पानी, पी कर मन तृप्त हो जाता है। कच्चे नारियल की मीठी गिरी, बड़े शौंक से सब चबाते है। सूखे नारियल की गिरी से, अनेक व्यंजन बनाए जाते हैं। सूखे मेवों की श्रेणी में नारियल, का भी नाम आता है। नारियल का तेल तलने-पकाने, …
Read More »तारे – ओम प्रकाश बजाज
टिम – टिम टिमटिमाते तारे, जगमग-जगमग जगमगाते तारे। नीली सी चादर पर लेटे जैसे, मुस्कुराते खिलखिलाते तारे। तारों से है आकाश की शोभा, चाँद का साथ निभाते तारे। ध्रुव तारे का विशेष नाम हैं, अनेक नामों से जाते पुकारे तारे। चिंता में जिन्हे नींद न आती, रात काटते गिन-गिन तारे। सितारा तर्क भी कहलाते, हमेशा से साथ हमारे तारे। ~ …
Read More »बागन काहे को जाओ पिया – रसखान
बागन काहे को जाओ पिया घर बैठे ही बाग लगाए दिखाऊँ एड़ी अनार–सी मौर रही बहियाँ दोउ चम्पे–सी डार नवाऊँ। छातिन मैं रस के निबुआ अरु घूँघट खोल के दाख चखाऊँ ढाँगन के रस के चसके रति फूलनि की रसखानि लुटाऊँ। अंगनि अंग मिलाइँ दोऊ रसखान रहे लिपटे तरु छाहीं संगनि संग अनंग को रंग सुरंग सनी पिय दे गलबाँहीं। …
Read More »और काम सोचना – नीलम सिंह
धुआँ, धूप, पानी में ऋतु की मन मानी में सूख गये पौधे तो मन को मत कोसना और काम सोचना। अधरस्ते छूट गये जो प्यारे मित्र प्याले में तिरें जब कभी उनके चित्र दरवाजा उढ़का कर हाते को पार कर नाले में कागज़ की कुछ नावें छोड़ना कुछ हिसाब जोड़ना। माथे पर हाथ धरे बैठी हो शाम लौट रहा हो …
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