Poems In Hindi

बच्चों की हिन्दी कविताएं — 4to40 का हिन्दी कविताओ का संग्रह | Hindi Poems for Kids — A collection of Hindi poems for children. पढ़िए कुछ मजेदार, चुलबुली, नन्ही और बड़ी हिंदी कविताएँ. इस संग्रह में आप को बच्चो और बड़ो के लिए ढेर सारी कविताएँ मिलेंगी.

डस्टबिन: एक नारी की पीड़ा पर हिंदी कविता

डस्टबिन: एक नारी की पीड़ा पर हिंदी कविता

वैसे तो प्राचीन काल से ही दुनिया भर में महिलाओ को पुरुषों की अपेक्षा निम्न स्थान दिया जाता रहा है, परन्तु शिक्षा और ओद्योगिक विकास के साथ साथ विकसित देशो में महिलाओ के प्रति सोच में परिवर्तन आया और नारी समाज को पुरुष के बराबर मान सम्मान और न्याय प्राप्त होने लगा। उन्हें पूरी स्वतंत्रता, स्वच्छंदता, सुरक्षा एवं बराबरी के …

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बहारें आएँगी, होंठों पे फूल खिलेंगे: गोपाल सिंह नेपाली

Gopal Singh Nepali Spring Season Hindi Film Song बहारें आएँगी, होंठों पे फूल खिलेंगे

गोपाल सिंह नेपाली (1911 – 1963) हिन्दी एवं नेपाली के प्रसिद्ध कवि थे। उन्होने बम्बइया हिन्दी फिल्मों के लिये गाने भी लिखे। वे एक पत्रकार भी थे जिन्होने “रतलाम टाइम्स”, चित्रपट, सुधा, एवं योगी नामक चार पत्रिकाओं का सम्पादन भी किया। सन् १९६२ के चीनी आक्रमन के समय उन्होने कई देशभक्तिपूर्ण गीत एवं कविताएं लिखीं जिनमें ‘सावन’, ‘कल्पना’, ‘नीलिमा’, ‘नवीन …

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जलियाँवाला बाग में बसंत: सुभद्रा कुमारी चौहान कविता

जलियाँवाला बाग में बसंत - सुभद्रा कुमारी चौहान

Jallianwala Bagh (जलियाँवाला बाग) is a public garden in Amritsar, and houses a memorial of national importance, established in 1951 by the Government of India, to commemorate the massacre of peaceful celebrators including unarmed women and children by British occupying forces, on the occasion of the Punjabi New Year (Baisakhi) on 13 April 1919 in the Jallianwala Bagh Massacre. Colonial …

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ईद के त्यौहार पर हिंदी कविता

Hindi Poem on Islam Festival of Eid ईद

ईद के त्यौहार पर हिंदी कविता आसमां में गुफ्तगू है चल रही, चाँद की आये खबर तो ईद हुई अम्मी बनातीं थीं सिंवईयाँ दूध में, स्वाद वह याद आया लो ईद हुई नमाज हो मन से अदा, जकात भी दिल से बँटे, मजहब महज किताब नहीं पूरे हुये रमजान के रोजों के दिन, सौगात जो खुदा की, वो ईद हुई …

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उदास सांझ: कठोर कठिन थके हुए जीवन पर कविता

उदास सांझ: कठोर कठिन थके हुए जीवन पर कविता

As the sun sets and darkness prepares to engulf the world, a strange depression some times sets in our thoughts. In this lovely poem Maitreyee Ji has drawn a shabda chitra of this sense of restlessness. उदास सांझ: मैत्रेयी अनुरूपा दिनभर तपा धूप में थक कर‚ हो निढाल ये बूढ़ा सूरज‚ बैठ अधमरे घोड़ों पर – जो डगमग गिर गिर …

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देश मेरे: राजीव कृष्ण सक्सेना

देश मेरे - राजीव कृष्ण सक्सेना

It was many many years ago when I was faced with the question of staying back in USA or return to India. Career and material considerations would have us stay back but deep rooted tug on heart would urge us to pack up and leave. As any pravasi Indian would testify, this is quite a heart wrenching decision to take. …

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मन को वश में करो, फिर चाहे जो करो: रमानाथ अवस्थी

मन को वश में करो, फिर चाहे जो करो: रमानाथ अवस्थी

रमानाथ अवस्थी का जन्म फतेहपुर, उत्तरप्रदेश में हुआ। इन्होंने आकाशवाणी में प्रोडयूसर के रूप में वर्षों काम किया। ‘सुमन- सौरभ, ‘आग और पराग, ‘राख और शहनाई तथा ‘बंद न करना द्वार इनकी मुख्य काव्य-कृतियां हैं। ये लोकप्रिय और मधुर गीतकार हैं। इन्हें उत्तरप्रदेश सरकार ने पुरस्कृत किया है। मन की चंचलता सर्व विदित है। अध्यात्म सागर पर भी कई बार …

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ऋतुओं की ऋतू बसंत: सुमित्रानंदन पंत

ऋतुओं की ऋतू बसंत: सुमित्रानंदन पंत

वसंत पञ्चमी या श्रीपंचमी एक हिन्दू त्यौहार है। इस दिन विद्या की देवी सरस्वती की पूजा की जाती है। यह पूजा पूर्वी भारत, पश्चिमोत्तर बांग्लादेश, नेपाल और कई राष्ट्रों में बड़े उल्लास से मनायी जाती है। इस दिन पीले वस्त्र धारण करते हैं। शास्त्रों में बसंत पंचमी को ऋषि पंचमी से उल्लेखित किया गया है, तो पुराणों-शास्त्रों तथा अनेक काव्यग्रंथों …

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वादी ए कश्मीर का क्या ये हाल हो गया

वादी ए कश्मीर का क्या ये हाल हो गया

Jammu and Kashmir was a region formerly administered by India as a state from 1954 to 2019, constituting the southern and southeastern portion of the larger Kashmir region, which has been the subject of a dispute between India, Pakistan and China since the mid-20th century. The underlying region of this state were parts of the former princely state of Jammu …

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क्यों मो पे रंग की मारी पिचकारी: बहादुर शाह जफर

क्यों मो पे रंग की मारी पिचकारी: बहादुर शाह जफर

वैसे तो होली पूरे भारत में मनाई जाती है पर अलग-अलग सांस्कृतिक अंचलों की होली की अपनी खासियत है। हां, एक बात जो सभी जगहों की होली में सामान्य है, वह है महिलाओं और पुरुषों के बीच रंग खेलने के बहाने अनूठे विनोदपूर्ण और शरारत से भरे प्रसंग। ये प्रसंग शुरू से होली की पहचान से जुड़े रहे हैं। और …

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