Eid Festival Hindi Poem ईद का त्यौहार

ईद का त्यौहार Eid Festival Hindi Poem

ईद का त्यौहार Eid Festival Hindi Poem: ईद-उल-फितर अथवा रोजा ईद एक बड़ा महत्वपूर्ण त्यौहार है। सारे विश्व के सभी मुसलमान इसे बड़े उत्साह से मनाते हैं।

ईद का त्यौहार: प्रो सी.बी. श्रीवास्तव की हिंदी कविता

ईद के चाँद की खोज में हर बरस,
दिखती दुनियाँ बराबर ये बेजार है

बाँटने को मगर सब पे अपनी खुशी,
कम ही दिखता कहीं कोई तैयार है

ईद दौलत नहीं, कोई दिखावा नहीं,
ईद जज्बा है दिल का, खुशी की घड़ी

रस्म कोरी नहीं, जो कि केवल निभे,
ईद का दिल से गहरा सरोकार है !! १!!

अपने को औरों को और कुदरत को भी,
समझने को खुदा के ये फरमान है

है मुबारक घड़ी, करने एहसास ये  –
रिश्ता है हरेक का, हरेक इंसान से

है गुँथीं साथ सबकी यहाँ जिंदगी,
सबका मिल जुल के रहना है लाजिम यहाँ

सबके ही मेल से दुनियाँ रंगीन है,
प्यार से खूबसूरत ये संसार है !!२!!

मोहब्बत, आदमीयत,
मेल मिल्लत ही तो सिखाते हैं सभी मजहब संसार में

हो अमीरी, गरीबी या कि मुफलिसी,
कोई झुलसे न नफरत के अंगार में

सिर्फ घर-गाँव-शहरों ही तक में नहीं,
देश दुनियां में खुशियों की खुश्बू बसे

है खुदा से दुआ उसे सदबुद्धि दें,
जो जहां भी कहीं कोई गुनहगार है !!३!!

ईद सबको खुशी से गले से लगा,
सिखाती बाँटना आपसी प्यार है

है मसर्रत की पुरनूर ऐसी घड़ी,
जिसको दिल से मनाने की दरकार है

दी खुदा ने मोहब्बत की नेमत मगर,
आदमी भूल नफरत रहा बाँटता

राह ईमान की चलने का वायदा,
खुद से करने का ईद एक तेवहार है !!४!!

जो भी कुछ है यहां सब खुदा का दिया,
वह है सबका किसी एक का है नहीं

बस जरूरत है ले सब खुशी से जियें,
सभी हिल मिल जहाँ पर भी हों जो कहीं

खुदा सबका है सब पर मेहरबांन है,
जो भी खुदगर्ज है वह ही बेईमान है

भाईचारा बढ़े औ मोहब्बत पले,
ईद का यही पैगाम, इसरार है !!५!!

~ ‘ईद का त्यौहार’ poem by प्रो सी.बी. श्रीवास्तव

कब और क्यों मनाया जाता है?

रमजान के महीने में जिस दिन दूज का चाद दिखाई दे जाता है, उसके अगले दिन ईद का त्यौहार मनाया जाता है। यह बड़ा महत्त्वपूर्ण त्यौहार है। मुसलमान 30 दिन रोजे (उपवास) रखते है। इन दिनों वे सारे दिन पानी की एक बूंद तक मुँह में नहीं जाने देते।

सूर्यास्त होने के बाद नमाज पढ़कर ही वे रोजा खोलते हैं। पूरे महीने वे ईश्वर की याद करके नेम-धर्म से जीवन जीते है। इन रोजो की समाप्ति ईद से होती है। ईद का चाँद देखना बडा पुनीत माना जाता है। शाम से ही सैकडों आखे आसमान मे चाँद देखने का प्रयास करती हैं। ज्यों ही चाँद दिखाई देता है, वे खुशी से नाच उठते हैं। यह रोजो की समाप्ति का प्रतीक माना जाता है। अगले दिन ईद का त्यौहार मनाने की घोषणा कर दी जाती है।

कैसे मनाया जाता है?

यह मुसलमानों का सबसे बड़ा त्यौहार है। वे इस त्यौहार की बड़ी बेसब्री से प्रतीक्षा करते हैं। त्यौहार के कई दिन पहले से ही खूब धूमधाम से तैयारियाँ की जाती हैं। सभी मुसलमान बालक-वृद्ध, पुरुष-स्त्रियों, अमीर-गरीब नए-नए रंग-बिरंगे कपड़े पहनते हैं।

इस त्यौहार पर नई टोपी और नए जूतों का विशेष महत्त्व होता है। ईद के दिन सभी मुसलमान सुबह उठकर खूब मल-मल कर स्नान करते है और नए वस्त्र पहनते हैं। वे खूब सुगन्धित इत्र लगाते हैं। बच्चे नई-नई पोशाक पाकर हर्ष से उछलते-कूदते है। सभी मुसलमान इस पवित्र दिन पर खैरात बाटना बड़े पुण्य का काम समझते हैं।

ईदगाह में प्रार्थना:

नहा-धोकर सभी पुरुष और बच्चे नमाज पढ़ने के लिए ईदगाह जाते हैं। सब एकत्र होकर सम्मिलित रूप से अल्लाह का नाम लेते है। नमाज पढ़कर वे सब बड़े प्रेम से एक-दूसरे को गले मिलते हैं और ‘ईद मुबारक’ कहते हैं। इस अवसर पर छोटे-बड़े और ऊँच-नीच में कोई भेद नहीं होता।

सभी अपने आपसी मतभेद और वैर-भाव भुलाकर सगे भाइयो की तरह प्यार से गले मिलते हैं। इसके बाद कुछ लोग अपने मित्रो और पुरखो की कब्र पर फूल चढाने कब्रगाह जाते हैं। वहाँ वे उनको आत्मा की शाति के लिए अल्लाह से प्रार्थना करते हैं।

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