Home » Poems For Kids » Poems In Hindi » रिम झिम बरस रहा है पानी – राजीव कृष्ण सक्सेना
रिम झिम बरस रहा है पानी - राजीव कृष्ण सक्सेना

रिम झिम बरस रहा है पानी – राजीव कृष्ण सक्सेना

गड़ गड़ गड़ गड़ गरज गरज घन
चम चम चमक बिजुरिया के संग
ढम ढम ढम ढम पिटा ढिंढोरा
झूम उठा सारा जन जीवन

उमड़ घुमड़ कर मेघों नें अब
आंधी के संग करी चढ़ाई
तड़क तड़क तड़िता की सीढ़ी
उतर गगन से वर्षा आई

अरसे से बेहाल धरा पर
सूखे वृक्षों पर खेतों पर
झूम बदरिया छाई घिर घिर
ताप धरा का हरने को फिर

बुनी चुनरिया उसने धानी
रिम झिम बरस रहा है पानी

भटक रहे थे प्यासे प्यासे
पंछी इधर उधर बौराए
थक निढाल हो कर सुस्ताते
पथिक किनारे पर मुरझाए

झुलसाने वाली गर्मी से
त्राण सभी पाते हैं प्राणी
तुरहि बजाओ थाल सजाओ
आ पहुंची है वर्षा रानी

सोंधी सोंधी उठी सुगंधी
पवन हो गयी ठंडी ठंडी
उल्लासित तन मन करती है
नव ऋतु की मोहक सारंगी

मस्त पवन करती मनमानी
रिम झिम बरस रहा है पानी

बेमतलब मन की उधेड़बुन
बेमतलब ही मन उदास था
बेमतलब ही गुमसुम गुमसुम
भटक रहा कुछ आसपास था

झीनी झीनी सी बूंदें अब
चेहरे पर नवजीवन भरतीं
और अनमनी सी लट पर गिर
लटक लटक अठखेली करतीं

कैद उमंगें थीं जिनमें वह
अंतर के बंधन खुलते हैं
और मस्त इन बौछारों में
मैल सभी मन के धुलते हैं

होठों पर अब तान पुरानी
रिम झिम बरस रहा है पानी

इस पल में ऐसा लगता ज्यों
शांत व्यथाएं सभी जगत की
यह पल ऐसा जैसे की सब
भूल गए खटपट जीवन की

इस पल में सब सुधबुध खो कर
मस्त बदरिया को लखते हैं
इस पल में एकाग्र हूआ मन
शोक सभी जग के हटते हैं

कुंठाएं सब भूल समय यह
अवसादों को ढकने का है
यह अमूल्य क्षण शांत खड़े हो
बौछारों को तकने का है

छटा अलौकिक छटा सुहानी
रिम झिम बरस रहा है पानी

कितना है उत्पात जगत में
कितनी हिंसा मारा मारी
और गरीबी बेहाली में
पिसती रहती जनता सारी

आज मगर वर्षा की बूंदों
के गिरने की टप टप ही है
दूर दूर तक खाली सड़कें
राग कोइ वर्षा का गाएं

तारकोल के रंगमंच पर
लाज शर्म सब छोड़ मगन हो
मस्त मुदित मन छाम छाम नाचें
घनदल की प्यारी कान्याएं

तिनक तिनक धिन दिर दिर धानी
रम झिम बरस रहा है पानी

छत का पानी गलियों के
पतनालों से मिलने को उत्सुक
और पेड़ कुछ बहुत यत्न से
धोते हैं पत्तों को गुपचुप

बाहर के आले में भीगी
गौरैया तकती आशंकित
बागीचे में बेल चमेली की
चम्पा को छेड़े छिप छिप

नन्हें बच्चे दीदी से
कागज की नावें बनवाते हैं
भीग भीग कर उनको बाहर
पतनालों में तैराते हैं

किलकारी जानी पहचानी
रिम झिम बरस रहा है पानी

∼ राजीव कृष्ण सक्सेना

Check Also

When water appeared on the Earth?

When water appeared on the Earth?

The first folds in the crust of the Earth took place in complete darkness, when …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *