Hindi Detective Story हिंदी जासूसी कहानी - बेअरिंग की चोरी

बेअरिंग की चोरी: हिंदी जासूसी कहानी

बेअरिंग की चोरी: हिंदी जासूसी कहानी – पेज 4

“क्या आप मुझे स्टोर के भीतर खिड़की वाले काउंटर पर बैठने वाले टेलीक्लर्क से मिलवा सकते हैं?” राकेश ने एस.लाल से पूछा।

“अभी 5 मिनट बाद मिलवाता हूं, वह डिस्पैच विभाग तक गया है।”

“ठीक है, तब तक मैं स्टोर विभाग के दरवाजे और खिड़की को चेक कर लेता हूं,” राकेश ने कहा।

राकेश ने स्टोर का दरवाजा देखा। वह लोहे का मजबूत दरवाजा था। उसमें बाहर की और से एक मोटा सा कुंडा लगा था। जिस खिड़की से बियरिंग सप्लाई किए जाते थे, उस खिड़की के नीचे एक काउंटर बना था। खिड़की में 2 दरवाजे थे जो लोहे की ग्रिल से बने थे। ग्रिल के दरवाजों पर फूल वाला डिजाइन बना था। खिड़की के दरवाजों पर काले रंग का पेंट लगा हुआ था।

राकेश बारीकी से मुआयना कर रहा था कि तभी खिड़की के काउंटर पर बैठने वाला क्लर्क डिस्पैच विभाग से लौट आया। राकेश ने उसे ऊपर से लेकर नीचे तक देखा। पैंट, शर्ट और जूते मोजे पहने वह आकर्षक सा दुबला पतला गौर वर्ण का युवक था। उसकी उम्र लगभग 35 वर्ष की होगी। एस.लाल ने उससे राकेश का परिचय करवाया।

राकेश ने उससे पूछताछ शुरू की, “आप का नाम?”

“गोपी कृष्ण।”

“आप इस कंपनी में कब से काम कर रहे हैं?”

“कंपनी में काम करते हुए तो 11 वर्ष हो गए हैं किंतु इस खिड़की पर 3 वर्ष से कार्यरत हूं।

“स्टोर के दरवाजे और खिड़की पर ताला कब लगता है?”

“शाम को 6 बजे, हमारी छुट्टी के बाद लगता है। ताले पर कागज की हस्ताक्षरयुक्त्त सील भी लगाई जाती है।”

“कौन करता है यह सब काम?”

“मैं ताला लगा कर स्वयं के दस्तखत वाली सील लगाता हूं। उसके पश्चात सुरक्षा अधिकारी राजेंद्र नाथ को चाबी सौंप देता हूं।”

“जरा सोच कर बताइए कि आप रोज स्वयं ताला लगाते हैं या कभी किसी  दूसरे से भी ताला लगवाते हैं।”

सील तो मैं स्वयं चिपकाता हूं लेकिन ताला कभी कभी हमारे विभाग का चपरासी दयाराम भी लगा देता है।”

“कभी कभी लगाता है या कुछ दिनों से यह लगातार ताला लगा रहा है?” राकेश ने जानबूझ कर जाल फेंका।

“क्या मतलब है आप का?” गोपी कृष्ण चौकां, फिर बोला, “दया राम बहुत ईमानदार व्यक्ति है। वह इस कंपनी में पिछले 30 वर्षों से काम कर रहा है।”

“आप सही हो सकते हैं लेकिन मेरी बात का जवाब दें। क्या वह पिछले कुछ महीनों से ताला लगाने का कार्य नहीं कर रहा है?”

“जी हां, आप की यह बात ठीक है।”

“धन्यवाद गोपी कृष्ण जी, अब मुझे आप से कुछ नहीं पूछना है।”

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