NANHA SITARA

नन्हा सितारा: राघव का सपना कैसे साकार हुआ – An Inspirational Hindi Story

शहर में जगह-जगह पोस्टर लगे हुए थे। उनमें एक ऐसे नन्हे बच्चे की फोटो छपी थी, जो सिंगिंग के क्षेत्र में उभरता हुआ सितारा था। उसके हाथ में गोल्डन माइक था। उसकी उम्र केवल 10 वर्ष थी।

दरअसल, यह पोस्टर उभरते हुए लिटिल सिंगर कुमार रवि का था जिसने अभी ‘ऑल इंडिया बैस्ट सिंगर‘ का कॉम्पिटीशन जीता था। राघव जब स्कूल बस से घर आ रहा था तो उसने शहर के मुख्य मार्गों पर कुमार रवि के पोस्टर देखे तो बड़ा उत्साहित हुआ।

नन्हा सितारा: An Inspirational Hindi Story

वह मन ही मन सोचने लगा, “काश मेरे भी पोस्टर इसी तरह शहरों में लगें। मैं भी लाइव कार्यक्रम मंचों पर प्रस्तुत कर सकूं।”

राघव का सोचना भी गलत नहीं था। उसकी आवाज भी बड़ी सुरीली थी। पिछले महीने ही उसने अपने शहर में आयोजित ‘ऑल स्कूल्स ऑफ सिटी बेस्ट सिंगर‘ कॉम्पिटीशन जीता था। इस कार्यक्रम में शहर के सभी स्कूलों के गायन में रुचि रखने वाले बच्चों ने भाग लिया था।

राघव को भी देश के प्रसिद्ध सिंगर ने रंगारंग कार्यक्रम में अपने हाथों से ‘वाइस ऑफ सिटी‘ का अवार्ड दिया था।

स्कूल से घर पहुंचते ही राघव ने कहा, “पापा कल अपने शहर में लिटिल सिंगर कुमार रवि आ रहा है।”

“हां, मुझे पता है।” राघव के पिता इंस्पैक्टर किशन ने जवाब दिया।

“आप को भी मालूम है… शायद आपने पोस्टर लगे देखे होंगे?” राघव ने पूछा।

“पोस्टर तो लगे ही हैं, उसकी सुरक्षा का जिम्मा भी मेरे ही हाथ में है।” उसके पापा ने कहा।

“फिर तो पापा आप मुझे … ।” राघव बोलते-बोलते चुप हो गया।

उन्होंने मुस्कुराते हुए पूछा, “फिर तो पापा … का क्या मतलब?”

“पापा मैं कुमार रवि का बहुत बड़ा फैन हूं। उससे मिलना चाहता हूं, आप मुझे मिलवा दोगे?” राघव ने पूछा।

“मैं कोशिश पूरी करूंगा। तुम्हारी टिकट मैं बुक कर देता हूं।” पापा ने तुरंत सहमति जता दी।

राघव यह सुनकर बहुत खुश हुआ। वह कल एक ऐसे नन्हे सितारे से मिलने वाला था जिसे वही नहीं, पूरा देश जानता था।

दूसरे दिन शाम को कुमार रवि का सिटी पैलेस में कार्यक्रम था। राघव समय पर पहुंच कर अग्र पंक्ति में बैठ गया।

नन्हे सितारे कुमार रवि ने उस कार्यक्रम में अपनी गायकी से ऐसा समां बांधा कि सब उसके साथ झूमने लगे। वह गाते हुए स्टेज की सीढ़ियों से उतर कर दर्शकों के बीच में आ गया।

जैसे ही वह सीढ़ियों पर चढ़ने लगा राघव ने उससे हाथ मिलाने की कोशिश की लेकिन कुमार रवि ने हाथ तो नहीं मिलाया लेकिन स्माइल जरूर दी।

लगभग दो घंटे चले इस रंगारंग कार्यक्रम में कुमार रवि ने सबका मन जीत लिया।

भीड़ से बचाने के लिए उसे स्पैशल गैस्ट रूम में ले जाया गया। उसके साथ कुमार रवि के मम्मी-पापा भी थे। इंस्पैक्टर किशन ही पुलिस दल के इंचार्ज थे।

राघव अपने पापा से जाकर मिला।

“चलो तुम्हें कुमार रवि से मिलवाता हूं।” उसके पापा ने राघव से कहा।

गैस्ट रूम में कुमार रवि बैठा था।

“बेटा रवि, ये मेरा बेटा है राघव। आपका बड़ा फैन है। इसे भी गाने का बहुत शौक है।” इंस्पैक्टर किशन ने परिचय देते हुए कहा।

“वाह अंकल… आपने तो एक सिंगर को दूसरे सिंगर से मिलवा दिया। यह तो है भी मेरी उम्र का।” कुमार रवि ने राघव से हाथ मिलाते हुए कहा।

“कुमार भैया, आपसे मिलकर मेरा सपना पूरा हो गया। आपका कार्यक्रम मैं हमेशा टी.वी. पर देखता था। आपकी आवाज में सचमुच एक जादू है।

फाइनल में जब आपको विनर चुना गया तब मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। मैं भी आपकी राह पर चलना चाहता हूं।” राघव ने नम आंखों से कहा।

“राघव आज से तुम मेरे फैन नहीं दोस्त हो। मैं सिंगिंग के क्षेत्र में तुम्हारा सहयोग करूंगा।” नन्हे सितारे ने उसे गले लगाते हुए कहा।

कुमार रवि के मम्मी-पापा और इंस्पैक्टर किशन के चेहरों पर भी मुस्कान तैर गई।

~ गोविन्द भारद्वाज, अजमेर

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