Stories in Hindi

हर अच्छा इंसान हर किसी को अच्छा नहीं लगता: Why Good People Are Not Universally Liked

हर अच्छा इंसान हर किसी को अच्छा नहीं लगता: Why Good People Are Not Universally Liked

एक छोटे से कस्बे में एक सरकारी शिक्षक थे। वह हर साल अपनी तनख्वाह का एक हिस्सा उन बच्चों की पढ़ाई पर खर्च कर देते थे, जिनके माता-पिता फीस भरने में असमर्थ थे। उन्होंने कभी किसी से इसका जिक्र नहीं किया। हर अच्छा इंसान हर किसी को अच्छा नहीं लगता उनका मानना था कि भलाई का सबसे बड़ा पुरस्कार किसी …

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सोच-समझकर करो ‘खर्च’: Spend wisely – Hindi Story on Habits For Financial Wellbeing

सोच-समझकर करो 'खर्च': Spend wisely - Hindi Story on Habits For Financial Wellbeing

सुभाष और त्रिभुवन दोनों 12वीं कक्षा के छात्र थे। दोनों एक ही गांव के रहने वाले थे। दोनों ने मैडीकल ग्रुप ले रखा था। सुभाष के मम्मी-पापा एक सरकारी विभाग में नौकरी करते थे और त्रिभुवन के पापा का व्यापार था, जिससे उनकी काफी अच्छी आमदनी हो जाती थी। सोच-समझकर करो ‘खर्च’: Spend wisely सुभाष के मम्मी-पापा के घर में …

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किताबों के पैर: क्या किताबें सच्ची में चलती हैं – रोचक बाल-कहानी

किताबों के पैर: क्या किताबें सच्ची में चलती हैं - रोचक बाल-कहानी

किताबों के पैर: दादा-दादी, पापा-मम्मी, भाई-बहन और सबके प्यारे बब्बू जी, सभी घर में ही थे। सभी अपने-अपने कामों में लगे थे। कोई पुस्तक पढ़ रहा था, कोई खेल रहा था। अचानक दादा जी ने देखा बब्बू जी का एक भाई किताब को पैर लगा रहा था। हां, बब्बू जी के बारे में बताना तो रह ही गया। घर का …

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आम का पेड़: पर्यावरण संरक्षण पर आधारित हिंदी बाल-कहानी

आम का पेड़: पर्यावरण संरक्षण पर आधारित हिंदी बाल-कहानी

रोहन और राधा को गर्मी की छुट्टियों का इंतजार रहता था क्योंकि दोनों हर बार छुट्टियों में अपने नाना-नानी के गांव ‘सुन्दरपुर‘ जाते थे। गांव जाने का समय होता तो वे गाने लगते, “नाना के घर जाएंगे, दूध-मलाई खाएंगे, मोटे हो कर आएंगे।” सुंदरपुर में जो कुछ रोहन और राधा को मिलता था, वह कभी उनको अपने शहर जयपुर में …

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थुलथुल चुहिया: सब के दाता राम – हमें ईश्वर पर विश्वास रखना चाहिए

थुलथुल चुहिया: सब के दाता राम - हमें ईश्वर पर विश्वास रखना चाहिए

थुलथुल चुहिया को बस एक ही चिंता सताती रहती कि उसको कल खाना मिलेगा या नहीं। उसे भोजन के लिए इधर-उधर भागना बिल्कुल पसंद नहीं था। उसकी इच्छा तो बस इतनी-सी थी कि उसे घर बैठे ही पेट भर खाना मिल जाए। एक दिन उसने यह समस्या अपनी सहेली चुनमुन चुहिया को बताई। चुनमुन ने कहा, “बस इतनी-सी बात! चलो …

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नन्हा सितारा: राघव का सपना कैसे साकार हुआ – An Inspirational Hindi Story

NANHA SITARA

शहर में जगह-जगह पोस्टर लगे हुए थे। उनमें एक ऐसे नन्हे बच्चे की फोटो छपी थी, जो सिंगिंग के क्षेत्र में उभरता हुआ सितारा था। उसके हाथ में गोल्डन माइक था। उसकी उम्र केवल 10 वर्ष थी। दरअसल, यह पोस्टर उभरते हुए लिटिल सिंगर कुमार रवि का था जिसने अभी ‘ऑल इंडिया बैस्ट सिंगर‘ का कॉम्पिटीशन जीता था। राघव जब …

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क्रोध का परिणाम: शिक्षाप्रद हिंदी कहानी की कैसे क्रोध बुद्धि और विवेक को नष्ट कर देता है

क्रोध का परिणाम: शिक्षाप्रद हिंदी कहानी की कैसे क्रोध बुद्धि और विवेक को नष्ट कर देता है

कुणाल एक मध्यमवर्गीय परिवार का इकलौता बेटा था। माता-पिता उसे बहुत प्यार करते थे। वे चाहते थे कि उनके बेटे को किसी भी चीज की कमी न रहे। कुणाल कुछ मांगता, उससे पहले ही उसकी जरूरत की चीज घर में आ जाती। धीरे-धीरे यही लाड़-प्यार उसकी आदत  बिगाड़ने लगा। वह जिद्दी होता जा रहा था। बचपन में उसकी छोटी-छोटी इच्छाएं …

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आधा तीतर आधा बटेर: मुहावरे पर आधारित एक शिक्षाप्रद हिंदी कहानी

आधा तीतर आधा बटेर: मुहावरे पर आधारित एक शिक्षाप्रद हिंदी कहानी

सोमवार का दिन था। विद्यालय में प्रार्थना सभा चल रही थी। प्रधानाचार्य सहित समस्त स्टाफ भी प्रार्थना स्थल पर खड़े थे। प्रार्थना समाप्ति के बाद शारीरिक शिक्षक मीनाक्षी मैडम ने उन बच्चों को संबोधित करते हुए कहा, “जो विद्यार्थी स्कूल यूनिफॉर्म में नहीं आएं हैं, वे अपने स्थान पर खड़े हो जाओ।” इतना सुनते ही एक के बाद एक बच्चे …

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इनाम: तार्किक सोच वाली हिंदी बाल-कहानी – गोविंद शर्मा

इनाम: तार्किक सोच वाली हिंदी बाल-कहानी - गोविंद शर्मा

इनाम: सेठ गंगा प्रसाद कलाकारों की बड़ी कद्र करते थे। उन्होंने अनेक कलाकारों की कलाकृतियां खरीदीं और उन्हें पुरस्कृत भी किया। वहन केवल स्वयं कलाकृतियों का संग्रह करते थे, दूसरों को भी कला का सम्मान करने की प्रेरणा देते रहते थे। एक बार की बात है। एक कलाकार ने मिट्टी एवं रंगों की सहायता से मोतीचूर के लड्डू बनाए और …

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आत्मनिर्भर: अपने काम खुद करने की आदत और जीवन में आत्मनिर्भरता की प्रेरक बाल कहानी

आत्मनिर्भर: अपने काम खुद करने की आदत और जीवन में आत्मनिर्भरता की प्रेरक बाल कहानी

रावी नदी के किनारे एक बहुत बड़ा वट वृक्ष था। उस पर बहुत सारे पक्षी रहते थे। वट वृक्ष पर मीनू चिड़िया अपने दो बच्चों चुन्नू मुन्नू के साथ रहती थी। चुन्नू बड़ा तथा मुन्नू छोटा था। मुन्नू के छोटा होने के कारण उसकी अम्मा उसे ज्यादा लाड़-प्यार करती थी। इस वजह से मुन्नू की आदत बिगड़ चुकी थी। वह …

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