आज सुबह-सुबह हरबीर जब अपने डैडी के साथ सैर करके घर को वापस लौट रहा था तो उसने देखा कि गली की नालियों में साफ पानी की बाढ़ आई हुई है। अभी वे अपने घर वाली गली की तरफ मुड़े ही थे कि उन्होंने देखा कि कुछ लोगों ने पानी के सरकारी सप्लाई वाले नल खुले छोड़े हुए हैं और …
Read More »बुद्धिमान मूर्तिकार: विपरीत परिस्थितियों में निराश हुए बिना धैर्य और बुद्धिमत्ता से काम लें
एक राज्य में बहुत ही सुंदर तथा आकर्षक मूर्तियां बनाने वाला एक मूर्तिकार रहता था। उसके द्वारा बनाई गई मूर्तियों की विशेषता यह थी कि उन्हें देखकर ऐसा लगता था कि मूर्ति अभी बोल उठेगी। उसके द्वारा बनाई गई मूर्तियों की चर्चा देश-विदेश में भी होती थी। उसकी बनाई मूर्तियों को खरीदने वाले लोग दूर-दूर से आते थे और मूर्तिकार …
Read More »मालिक कौन? उपयोग और मोह में अंतर – Hindi Moral Story For Children
एक गांव में गोपाल नामक किसान रहता था। उसके पास एक सुंदर गाय थी, जिससे उसे बहुत लगाव था। एक दिन वह गाय को चरागाह से घर वापस ला रहा था लेकिन गाय घर जाने को तैयार नहीं थी। गोपाल रस्सी खींचता, समझाता, कभी प्यार से पुचकारता और कभी डांटता, पर गाय एक कदम भी आगे नहीं बढ़ती। देखते-देखते काफी …
Read More »सोच का अंतर: दिल को छू लेने वाली इंसानियत की कहानी
मुझे जंडियालागुरु जाना था। जब बस स्टैंड पहुंचा तो पता चला कि बस कर्मचारियों की हड़ताल चल रही है। लगभग सवा घंटा इंतजार करने के बाद भी हड़ताल खत्म होने के कोई आसार नहीं दिखे। मजबूर होकर मैं बस स्टैंड से बाहर आ गया। बाहर एक टैक्सी चालक आवाज लगा रहा था, “जिसने अमृतसर जाना हो, आ जाइए।” मैं उसके …
Read More »हर अच्छा इंसान हर किसी को अच्छा नहीं लगता: Why Good People Are Not Universally Liked
एक छोटे से कस्बे में एक सरकारी शिक्षक थे। वह हर साल अपनी तनख्वाह का एक हिस्सा उन बच्चों की पढ़ाई पर खर्च कर देते थे, जिनके माता-पिता फीस भरने में असमर्थ थे। उन्होंने कभी किसी से इसका जिक्र नहीं किया। हर अच्छा इंसान हर किसी को अच्छा नहीं लगता उनका मानना था कि भलाई का सबसे बड़ा पुरस्कार किसी …
Read More »सोच-समझकर करो ‘खर्च’: Spend wisely – Hindi Story on Habits For Financial Wellbeing
सुभाष और त्रिभुवन दोनों 12वीं कक्षा के छात्र थे। दोनों एक ही गांव के रहने वाले थे। दोनों ने मैडीकल ग्रुप ले रखा था। सुभाष के मम्मी-पापा एक सरकारी विभाग में नौकरी करते थे और त्रिभुवन के पापा का व्यापार था, जिससे उनकी काफी अच्छी आमदनी हो जाती थी। सोच-समझकर करो ‘खर्च’: Spend wisely सुभाष के मम्मी-पापा के घर में …
Read More »किताबों के पैर: क्या किताबें सच्ची में चलती हैं – रोचक बाल-कहानी
किताबों के पैर: दादा-दादी, पापा-मम्मी, भाई-बहन और सबके प्यारे बब्बू जी, सभी घर में ही थे। सभी अपने-अपने कामों में लगे थे। कोई पुस्तक पढ़ रहा था, कोई खेल रहा था। अचानक दादा जी ने देखा बब्बू जी का एक भाई किताब को पैर लगा रहा था। हां, बब्बू जी के बारे में बताना तो रह ही गया। घर का …
Read More »आम का पेड़: पर्यावरण संरक्षण पर आधारित हिंदी बाल-कहानी
रोहन और राधा को गर्मी की छुट्टियों का इंतजार रहता था क्योंकि दोनों हर बार छुट्टियों में अपने नाना-नानी के गांव ‘सुन्दरपुर‘ जाते थे। गांव जाने का समय होता तो वे गाने लगते, “नाना के घर जाएंगे, दूध-मलाई खाएंगे, मोटे हो कर आएंगे।” सुंदरपुर में जो कुछ रोहन और राधा को मिलता था, वह कभी उनको अपने शहर जयपुर में …
Read More »थुलथुल चुहिया: सब के दाता राम – हमें ईश्वर पर विश्वास रखना चाहिए
थुलथुल चुहिया को बस एक ही चिंता सताती रहती कि उसको कल खाना मिलेगा या नहीं। उसे भोजन के लिए इधर-उधर भागना बिल्कुल पसंद नहीं था। उसकी इच्छा तो बस इतनी-सी थी कि उसे घर बैठे ही पेट भर खाना मिल जाए। एक दिन उसने यह समस्या अपनी सहेली चुनमुन चुहिया को बताई। चुनमुन ने कहा, “बस इतनी-सी बात! चलो …
Read More »नन्हा सितारा: राघव का सपना कैसे साकार हुआ – An Inspirational Hindi Story
शहर में जगह-जगह पोस्टर लगे हुए थे। उनमें एक ऐसे नन्हे बच्चे की फोटो छपी थी, जो सिंगिंग के क्षेत्र में उभरता हुआ सितारा था। उसके हाथ में गोल्डन माइक था। उसकी उम्र केवल 10 वर्ष थी। दरअसल, यह पोस्टर उभरते हुए लिटिल सिंगर कुमार रवि का था जिसने अभी ‘ऑल इंडिया बैस्ट सिंगर‘ का कॉम्पिटीशन जीता था। राघव जब …
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