Stories For Kids

आम का पेड़: पर्यावरण संरक्षण पर आधारित हिंदी बाल-कहानी

आम का पेड़: पर्यावरण संरक्षण पर आधारित हिंदी बाल-कहानी

रोहन और राधा को गर्मी की छुट्टियों का इंतजार रहता था क्योंकि दोनों हर बार छुट्टियों में अपने नाना-नानी के गांव ‘सुन्दरपुर‘ जाते थे। गांव जाने का समय होता तो वे गाने लगते, “नाना के घर जाएंगे, दूध-मलाई खाएंगे, मोटे हो कर आएंगे।” सुंदरपुर में जो कुछ रोहन और राधा को मिलता था, वह कभी उनको अपने शहर जयपुर में …

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थुलथुल चुहिया: सब के दाता राम – हमें ईश्वर पर विश्वास रखना चाहिए

थुलथुल चुहिया: सब के दाता राम - हमें ईश्वर पर विश्वास रखना चाहिए

थुलथुल चुहिया को बस एक ही चिंता सताती रहती कि उसको कल खाना मिलेगा या नहीं। उसे भोजन के लिए इधर-उधर भागना बिल्कुल पसंद नहीं था। उसकी इच्छा तो बस इतनी-सी थी कि उसे घर बैठे ही पेट भर खाना मिल जाए। एक दिन उसने यह समस्या अपनी सहेली चुनमुन चुहिया को बताई। चुनमुन ने कहा, “बस इतनी-सी बात! चलो …

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नन्हा सितारा: राघव का सपना कैसे साकार हुआ – An Inspirational Hindi Story

NANHA SITARA

शहर में जगह-जगह पोस्टर लगे हुए थे। उनमें एक ऐसे नन्हे बच्चे की फोटो छपी थी, जो सिंगिंग के क्षेत्र में उभरता हुआ सितारा था। उसके हाथ में गोल्डन माइक था। उसकी उम्र केवल 10 वर्ष थी। दरअसल, यह पोस्टर उभरते हुए लिटिल सिंगर कुमार रवि का था जिसने अभी ‘ऑल इंडिया बैस्ट सिंगर‘ का कॉम्पिटीशन जीता था। राघव जब …

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क्रोध का परिणाम: शिक्षाप्रद हिंदी कहानी की कैसे क्रोध बुद्धि और विवेक को नष्ट कर देता है

क्रोध का परिणाम: शिक्षाप्रद हिंदी कहानी की कैसे क्रोध बुद्धि और विवेक को नष्ट कर देता है

कुणाल एक मध्यमवर्गीय परिवार का इकलौता बेटा था। माता-पिता उसे बहुत प्यार करते थे। वे चाहते थे कि उनके बेटे को किसी भी चीज की कमी न रहे। कुणाल कुछ मांगता, उससे पहले ही उसकी जरूरत की चीज घर में आ जाती। धीरे-धीरे यही लाड़-प्यार उसकी आदत  बिगाड़ने लगा। वह जिद्दी होता जा रहा था। बचपन में उसकी छोटी-छोटी इच्छाएं …

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Kabuliwala: Bengali short story written by Rabindranath Tagore

Kabuliwala - Rabindranath Tagore Classic English Short Story

Kabuliwala: My five years’ old daughter Mini cannot live without chattering. I really believe that in all her life she has not wasted a minute in silence. Her mother is often vexed at this, and would stop her prattle, but I would not. To see Mini quiet is unnatural, and I cannot bear it long. And so my own talk …

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आधा तीतर आधा बटेर: मुहावरे पर आधारित एक शिक्षाप्रद हिंदी कहानी

आधा तीतर आधा बटेर: मुहावरे पर आधारित एक शिक्षाप्रद हिंदी कहानी

सोमवार का दिन था। विद्यालय में प्रार्थना सभा चल रही थी। प्रधानाचार्य सहित समस्त स्टाफ भी प्रार्थना स्थल पर खड़े थे। प्रार्थना समाप्ति के बाद शारीरिक शिक्षक मीनाक्षी मैडम ने उन बच्चों को संबोधित करते हुए कहा, “जो विद्यार्थी स्कूल यूनिफॉर्म में नहीं आएं हैं, वे अपने स्थान पर खड़े हो जाओ।” इतना सुनते ही एक के बाद एक बच्चे …

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इनाम: तार्किक सोच वाली हिंदी बाल-कहानी – गोविंद शर्मा

इनाम: तार्किक सोच वाली हिंदी बाल-कहानी - गोविंद शर्मा

इनाम: सेठ गंगा प्रसाद कलाकारों की बड़ी कद्र करते थे। उन्होंने अनेक कलाकारों की कलाकृतियां खरीदीं और उन्हें पुरस्कृत भी किया। वहन केवल स्वयं कलाकृतियों का संग्रह करते थे, दूसरों को भी कला का सम्मान करने की प्रेरणा देते रहते थे। एक बार की बात है। एक कलाकार ने मिट्टी एवं रंगों की सहायता से मोतीचूर के लड्डू बनाए और …

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आत्मनिर्भर: अपने काम खुद करने की आदत और जीवन में आत्मनिर्भरता की प्रेरक बाल कहानी

आत्मनिर्भर: अपने काम खुद करने की आदत और जीवन में आत्मनिर्भरता की प्रेरक बाल कहानी

रावी नदी के किनारे एक बहुत बड़ा वट वृक्ष था। उस पर बहुत सारे पक्षी रहते थे। वट वृक्ष पर मीनू चिड़िया अपने दो बच्चों चुन्नू मुन्नू के साथ रहती थी। चुन्नू बड़ा तथा मुन्नू छोटा था। मुन्नू के छोटा होने के कारण उसकी अम्मा उसे ज्यादा लाड़-प्यार करती थी। इस वजह से मुन्नू की आदत बिगड़ चुकी थी। वह …

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मेहनत से बनी ‘पहचान’: नाम कैसे कमाया जाता है – हिंदी बाल-कहानी

मेहनत से बनी 'पहचान': नाम कैसे कमाया जाता है - हिंदी बाल-कहानी

गंभीर बचपन से ही मन ही मन सोचता था कि अपनी पहचान बनाने के लिए क्या करना पड़ता है? प्रसिद्धि कैसे हासिल की जाती है? बहुत सारे लोग कैसे जानने लगते हैं? नाम कैसे कमाया जाता है? समाचारपत्रों में नाम तथा फोटो कैसे छपते हैं? मेहनत से बनी ‘पहचान’ जैसे-जैसे वह बड़ा होता गया वैसे-वैसे उसकी यह जानने की उत्सुकता …

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खिलौनों वाला अध्यापक: बच्चों में पढ़ने-लिखने की रुचि जगाने का अनूठा तरीका

खिलौनों वाला अध्यापक: बच्चों में पढ़ने-लिखने की रुचि जगाने का अनूठा तरीका

खिलौनों वाला अध्यापक: कुंदनलाल खिलौने बेचने का व्यापार करता था। वह गांव-गांव घूम कर खिलौने बेचता था। उसके पास बेचने के लिए छोटी-बड़ी गेंदें, जादू के डिब्बे, टोपियां, बांसुरियां, गुब्बारे, जहाज, ट्रैक्टर तथा अन्य खिलौने होते थे। उसके एक बड़े से झोले में टॉफियां तथा थोड़ी-बहुत खाने की चीजें भी होती थीं लेकिन वे खाने-पीने की चीजें बेचने के लिए …

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