रामू की मां शांता बहुत गरीब थी। उसके पिता का देहांत चार साल पहले हो चुका था। तब से मां ही घर और बाहर, दोनों जिम्मेदारियां अकेले निभा रही थी। रोज सुबह वह अपने सिर पर खिलौनों की टोकरी रखकर शहर की गलियों में निकल पड़ती। वही उसकी आजीविका का एकमात्र साधन था। रामू अभी केवल 5 साल का था। …
Read More »समझदारी की ‘उड़ान’: सावधान रहें सतर्क रहें – अपनी सुरक्षा का खुद ख्याल रखें, किसी अन्य के भरोसे ना रहे
समझदारी की ‘उड़ान’: कुछ दिनों के बाद बसंत का त्योहार आने वाला था। सुनील ने कई दिन पहले ही अपने मन में इसे मनाने की योजना बना ली थी। उसने अपनी मम्मी को पहले ही बता दिया था कि इस बार वह जल्दी घर नहीं आएगा, बल्कि एक दिन पहले खूब सारे पतंग खरीदकर अपने दोस्तों के साथ उनके घर …
Read More »शाबाश गिन्नी: निरंतर प्रयास हमेशा फलदायी होते हैं – मेधावी छात्रा की प्रेरक कहानी
शाबाश गिन्नी: गिन्नी दसवीं कक्षा में पढ़ती थी और उसका भाई कुणाल आठवीं कक्षा का छात्र था। गिन्नी एक मेधावी छात्रा थी, जबकि कुणाल पढ़ाई में अपने आप को होशियार तो समझता था, लेकिन वह पढ़ाई में उतना अच्छा नहीं था, क्योंकि वह गिन्नी की तरह मेहनत नहीं करता था। गिन्नी हर विषय को बहुत समझकर पढ़ती थी। जो कुछ …
Read More »कच्छा गैंग: गोविन्द भारद्वाज – कच्छा गैंग के आतंक की रोचक कहानी
गली में कुछ लोग दिखाई दे रहे थे। उनके हाथों में लकड़ी जैसा कुछ था। रोहन खिड़की से यह सब देख रहा था। उसने चुपचाप बिजली जलाई, लेकिन बिजली नहीं आई। वह बुदबुदाया, “बिजली को भी अभी ही जाना था।” उसी समय बादल गरजने लगे और खराब ट्यूब लाइट की तरह आसमान में बिजली चमकने लगी। “हो न हो, ये लोग …
Read More »गिल्ली-डंडा: बच्चों ने खेलते खेलते पकड़वाया खतरनाक आतंकवादी
लाली एक बड़ी ही नटखट लड़की थी। उसे लाल कपड़े पहनना बहुत पसंद था, इसलिए सभी उसे लाली कहकर बुलाते थे। उसके आस-पड़ोस में मंजित, सोनक, छुटकी और जयदीप भी रहते थे। वे सभी साथ-साथ खेलते और हमेशा एक-दूसरे का साथ निभाते थे। गिल्ली-डंडा: गोविंद भारद्वाज एक दिन लाली हिंदी का पाठ पढ़ रही थी। पाठ का नाम था ‘हमारे पारंपरिक …
Read More »दो भाई: लालच व्यक्ति को मूर्ख बनाता है, संतोष को नष्ट करता है
किसी गांव में दो भाई रहते थे – मटकू और टमकू। मटकू गोल-मटोल था और मटक-मटक कर चलता था, इसीलिए उसका नाम मटकू था। टमकू पतला-दुबला था और उसकी आंखें बार-बार झपकती थीं, इसलिए उसका नाम टमकू था। उनके घर में नल नहीं था। पानी दूर से एक हैंडपंप से लाना पड़ता था। मां घर का सारा काम करके थक …
Read More »परोपकारी सोच: गणित के अध्यापक का अनाथ विद्यार्थी पर परोपकार की प्रेरक कहानी
परोपकारी सोच: श्याम जी दसवीं कक्षा में गणित पढ़ा रहे थे। उनका ध्यान खिड़की की ओर गया। उनको लगा कि कोई बाहर की तरफ खड़ा है। उन्होंने खिड़की से झांक कर देखा तो वहां कोई नजर नहीं आया। उन्होंने सोचा कि शायद कोई उनका ही भ्रम हो। अगले दिन जब उन्होंने पढ़ाना शुरू किया तो उनको लगा कि फिर कोई …
Read More »नया स्कूल: विद्यार्थी जीवन में अनुशासन के महत्व पर हिंदी बाल-कहानी
संदीप के पिता की नई नौकरी एक बड़े शहर में लगी थी। संदीप खुश था कि अब उसे बड़े शहर के अच्छे स्कूल में पढ़ने का अवसर मिलेगा। मम्मी-पापा नए घर में जाने के लिए सामान पैक करने में व्यस्त थे और संदीप अपने दोस्तों को मिलने बाहर आया था। उसने अपने दोस्तों को बताया कि वह अब बड़े शहर …
Read More »होनहार बच्चे: माता-पिता की सेवा करने से मिलता है देवताओं का आशीर्वाद
दार्जिलिंग के पास एक कस्बा था। उस कस्बे में बहादुर नाम का एक फल विक्रेता रहता था। उसके दो बच्चे थे। बेटा संगमा बड़ा था और बेटी देविका उससे छोटी थी। बहादुर रोज सुबह उठकर फल मंडी जाता और इसके बाद ठेले पर फल रखकर गली-मोहल्लों में बेचता। संगमा और देविका रोज अपने स्कूल पढ़ने जाते और छुट्टी होने पर …
Read More »कुदरत पर उपकार: National Bird Day Special Hindi Story
“नाना जी… नाना जी… हम दोनों भाई फुटबॉल खेलने बगीचे में जाएं?” गुल्लू ने अपने नाना जी से पूछा। “हां… नाना जी घर में खेलने में मजा नहीं आता…।” छोटू ने भी कहा। नाना जी ने मुस्कुराते हुए कहा, “ठीक है बेटा… जरा संभल कर खेलना। यह पहाड़ी इलाका है… जमीन भी उबड़-खाबड़ है… कहीं पानी के नाले भी हैं।” …
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