आत्मविश्वास की जीत: आत्मविश्वास सफलता का आधार है - उत्साहवर्धक हिंदी कहानी

आत्मविश्वास की जीत: आत्मविश्वास सफलता का आधार है – उत्साहवर्धक हिंदी कहानी

आत्मविश्वास की जीत: विश्वजीत के विद्यालय में अक्सर किसी न किसी विषय को लेकर प्रतियोगिताएं होती रहती थीं और उनके विद्यालय के प्रधानाचार्य तथा अध्यापक बच्चों को उनमें भाग लेने के लिए प्रेरित करते रहते थे।

विश्वजीत के मम्मी-पापा सदैव यह कोशिश करते थे कि वह प्रत्येक प्रतियोगिता में भाग ले और उसमें कोई न कोई स्थान भी प्राप्त करे। वे उसे प्रत्येक प्रतियोगिता के लिए तैयारी भी करवाते थे।

आत्मविश्वास की जीत: प्रिंसिपल विजय कुमार

विश्वजीत प्रत्येक प्रतियोगिता में प्रथम या द्वितीय स्थान अवश्य लेकर आता था। उसके विद्यालय में जब भी कोई प्रतियोगिता होती, तो उसके अध्यापक-अध्यापिकाएं अपने आप ही उसका नाम लिख लेते थे, क्योंकि उन्हें पता था कि उसके मम्मी-पापा उसे प्रतियोगिता के लिए अच्छी तरह तैयार करवा देते हैं और उसका प्रतियोगिता में कोई न कोई स्थान अवश्य आता है।

विश्वजीत के मम्मी-पापा प्रतियोगिताओं की तैयारी करवाते समय उसकी कमियों और गलतियों को दूर करने के लिए उससे बार-बार अभ्यास करवाते थे। तब वह ऊब और थक जाने की बात कहने लग पड़ता था। तब उसके पापा कहते, “बच्चे, प्रतियोगिताएं जीतने के लिए गलतियां और कमियां दूर करनी ही पड़ती हैं।”

जब वह प्रतियोगिता जीतकर आता, तो उसे अपने पापा द्वारा कही गई बातें याद आतीं और उसकी थकान भी उतर जाती थी।

एक दिन उसका चयन अपने विद्यालय की ओर से एक बड़े शहर में हो रही अंतर-विद्यालय भाषण प्रतियोगिता के लिए किया गया। उसके अध्यापकों और मम्मी-पापा ने उस प्रतियोगिता के लिए उसे बहुत अच्छी तरह तैयार करवाया, परन्तु वह फिर भी बहुत घबराया हुआ था, क्योंकि वह कभी बड़े शहर में अंतर-विद्यालय भाषण प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए नहीं गया था।

जब वह उस प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए पहुंचा, तो उसने देखा कि वहां बहुत अच्छे-अच्छे विद्यालयों के प्रतिभाशाली बच्चे आए हुए थे।

नए विद्यालय का विशाल प्रांगण, ऊंची इमारतें और अनजान चेहरे देखकर विश्वजीत का दिल तेजी से धड़कने लगा। उसके हाथों में पकड़ी हुई भाषण की पर्ची हल्की-हल्की कांप रही थी। उसे लग रहा था जैसे उसकी आवाज ही साथ छोड़ देगी।

उसी समय उसे अपने पापा की बात याद आई – “आत्मविश्वास ही सबसे बड़ा सहारा होता है।” उसने गहरी सांस ली, आंखें बंद कर मन ही मन अभ्यास दोहराया और खुद से कहा, “मैं कर सकता हूं।”

धीरे-धीरे उसकी घबराहट कम होने लगी और उसके चेहरे पर आत्मविश्वास की हल्की मुस्कान लौट आई।

प्रतियोगिता शुरू हुई। सभी बच्चों ने बहुत प्रभावशाली ढंग से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। विश्वजीत का प्रदर्शन भी बहुत अच्छा था, परंतु मुकाबला बहुत कठिन था। हर बच्चा निर्णायकों के निर्णय की प्रतीक्षा कर रहा था।

मुख्य निर्णायक ने प्रतियोगिता का निर्णय सुनाते हुए कहा, “बच्चों, आप एक से एक बढ़कर प्रतिभाशाली हैं। आप सभी ने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया है। हमें निर्णय लेने में बहुत मुश्किल आई, परन्तु आप में से एक बच्चा विश्वजीत है, जिसके आत्मविश्वास ने हमारा मन जीत लिया। उसे इस प्रतियोगिता का प्रथम स्थान प्राप्त करने के साथ-साथ सर्वोत्तम प्रतियोगी घोषित किया जाता है।”

मुख्य निर्णायक का निर्णय सुनकर सभागार तालियों से गूंज उठा। विश्वजीत को अपने मम्मी-पापा के शब्द याद आ रहे थे और वह आत्मविश्वास के गौरव का पुरस्कार पाकर फूला नहीं समा रहा था।

~ ‘आत्मविश्वास की जीत‘ Hindi story by ‘प्रिंसिपल विजय कुमार

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