Stories in Hindi

दादाजी की सीख: पर्यावरण संरक्षण पर हास्य हिंदी बाल कहानी

दादाजी की सीख: पर्यावरण संरक्षण पर बाल कहानी

“सुबह से इस बन्दर ने हड़कंप मचा रखा है” मम्मी ने खड़की से बाहर की ओर झाँकते हुए कहा। मम्मी की बात सुनते ही टीनू ने पास रखी किताब उठाई और पढ़ने का नाटक करने लगा। मम्मी ने टीनू को देखा और कहा – “तुम सिर के बल क्यों नहीं खड़े हो जाते”? “क्यों मम्मी”? टीनू ने मासूमियत से पूछा। …

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टांय-टांय फिस्स: लेखक गोबिंद शर्मा की साहसिक प्रेरणादायक बाल कहानी

टांय-टांय फिस्स: लेखक गोबिंद शर्मा की साहसिक प्रेरणादायक बाल कहानी

टांय-टांय फिस्स: एक थी मछली। छोटी-सी, प्यारी सी। कुछ बच्चों ने उसे देखा। एक बच्चे ने पूछा, “तुम कौन हो?” मछली ने कहा, “मैं फिश हूं।” सब बच्चे हंस पड़े। एक बोला, “फिश तो सभी मछली होती हैं। तुम्हारा नाम क्या है?” “मेरा नाम टांय-टांय है।” “हैं? तो तुम्हारा पूरा नाम हुआ टांय-टांय फिस्स।” जब एक बच्चे ने कहा तो सब …

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अप्रैल फूल के अवसर पर शिक्षाप्रद बाल-कहानी

अप्रैल फूल के अवसर पर शिक्षाप्रद बाल-कहानी

अप्रैल फूल बाल-कहानी: चारों तरफ फ़ुसफ़ुसाहट हो रही थी। सभी बच्चे एक दूसरे को देखकर ऊपर से तो मुस्कुरा रहे थे पर मन ही मन एक दूसरे को अप्रैल फूल बनाने के लिए सोच रहे थे। ऐसा लग रहा था कि कक्षा में बहुत सारी मधुमक्खियाँ भिनभिना रही थी। तभी एक हाथ में रजिस्टर पकड़े हुए जोशी मैडम कक्षा में …

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जिम्मेदारी किसकी: छात्रों और बच्चों के लिए स्वच्छता पर शिक्षाप्रद बाल-कहानी

जिम्मेदारी किसकी: छात्रों और बच्चों के लिए स्वच्छता पर शिक्षाप्रद बाल-कहानी

जिम्मेदारी किसकी: बबलू बेहद लाडला था। अब वह पांच वर्ष का हो गया था। स्कूल से उसे डर लगता था। मम्मी उसे कभी चॉकलेट, कभी टॉफियां देकर मानती लेकिन बबलू स्कूल जाने से पहले ही चॉकलेट और टॉफियां चट कर जाता। स्कूल में प्रवेश करते ही उसे पता चल जाता कि मम्मी अब उसे छोड़कर घर चली जाएंगी। दूसरी कक्षा …

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दुश्मन बने दोस्त: डींगें हांकने में माहिर कुत्ते, बिल्ली और बन्दर की बाल कहानी

दुश्मन बने दोस्त: डींगें हांकने में माहिर कुत्ते, बिल्ली और बन्दर की बाल कहानी

दुश्मन बने दोस्त: एक किसान ने अपने खेतों की रखवाली के लिए मोती नामक कुत्ता पाल रखा था जो कभी- कभी किसान के साथ घूमने-फिरने गांव में भी चला जाया करता था। एक दिन उसकी नजर एक छोटी बिल्ली पर पड़ी। उसने लपककर उसे पकड़ लिया तो बिल्ली बोली, “मोती भैया मुझे छोड़ दो…।” मोती ने पूछा, “तुझे मेरा नाम …

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पुनर्जन्म: महिला दिवस के उपलक्ष में एक कहानी

महिला दिवस के उपलक्ष में एक कहानी: पुनर्जन्म

अचानक ऐसा लगता हैं जैसे सब खत्म हो गया और दूसरे ही पल फिर सब कुछ पहले जैसा हो गया। क्या समुद्र के किनारे आराम से बैठकर मिट्टी के बड़े-बड़े महल बनाते बच्चों ने सोचा होगा कि केवल एक लहर, सिर्फ एक लहर ही काफ़ी हैं, अथक परिश्रम से बनाये गए उनके आलीशान महल को अपने साथ ले जाने के …

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एकता में बल: एक दूजे के लिए बने सुई-धागे की प्रेरणादायक बाल-कहानी

एकता में बल: एक दूजे के लिए बने सुई-धागे की प्रेरणादायक बाल-कहानी

एकता में बल: किशानू दर्जी बहुत अच्छी सिलाई करता था। उसकी सुई और उसका धागा जब दोनों मिलते तो सिलाई होती। कई बार घागा छोटा रह जाता तो किशानू उसे फैंक देता या किसी दूसरे धागे के साथ जोड़ देता। यह देख कर सुई को बड़ी हंसी आती। एकता में बल: गोविंद शर्मा की प्रेरणादायक बाल-कहानी वह धागे को चिढ़ाती, …

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वह दोस्त ही रहा: गोविंद शर्मा की सच्ची दोस्ती पर प्रेरणादायक हिंदी कहानी

वह दोस्त ही रहा: गोविंद शर्मा

वह दोस्त ही रहा: राजू और बिरजू दोनों दोस्त थे। दोनों 8वीं के छात्र, पर बिरजू एकदम पहलवानों जैसा। वह किसी से लड़ता-झगड़ता नहीं था, पर स्कूल के जो बच्चे उसे जानते थे, वे उससे डरते थे क्योंकि बिरजू को कोई छेड़ बैठता तो उसे वह सबक जरूर सिखाता। इसके विपरीत राजू कुछ कमजोर, पर शरारती पूरा। वह किसी न …

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राष्ट्रगान से प्रेम: कुत्ते बंदर का राष्ट्रगान जन गण मन से प्रेम पर हिंदी कहानी

राष्ट्रगान से प्रेम: कुत्ते बंदर की सच्ची दोस्ती की प्रेरक कहानी

राष्ट्रगान से प्रेम: बंदर और कुत्ता दोनों बहुत अच्छे दोस्त थे। दोनों दिन भर घूमते रहते थे, कभी इस गली, कभी उस गली। कभी बाजार, कभी स्कूल के आगे घूमते रहते थे। वे घूम कर-घूम कर जिंदगी का भरपूर आनंद लेते थे। उनको बच्चों से बहुत प्यार था। बच्चे जब सज-धज कर यूनिफार्म पहन कर स्कूल जाते, तो वे उन्हें …

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डोर का महत्व: मकर संक्रांति त्योहार से संबंधित प्रेरणादायक हिंदी कहानी

डोर का महत्व: शिष्य गुरु शास्त्रार्थ पर प्रेरणादायक हिंदी कहानी

बहुत समय पहले की बात है। महाराष्ट्र में किसी जगह एक गुरु का आश्रम था दूर-दूर से विद्यार्थी उनके पास अध्ययन करने के लिए आते थे। इसके पीछे कारण यह था कि गुरुजी नियमित शिक्षा के साथ व्यावहारिक शिक्षा पर भी बहुत जोर देते थे। उनके पढ़ाने का तरीका भी अनोखा था। डोर का महत्व: मकर संक्रांति त्योहार से संबंधित …

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