मिट्ठू: बेवजह चिंता जीवन में कायरता और विष भर देती है

मिट्ठू: बेवजह चिंता जीवन में कायरता और विष भर देती है

अपने बगल में दूसरे तोते का पिंजरा लटका हुआ देख मिट्ठू को बड़ा आश्चर्य हुआ।

“मुझे तो किसी ने बताया भी नहीं कि घर में दूसरा तोता आ रहा है” मिट्ठू ने सोचा।

तभी सामने से चीनू उछलता कूदता आया और मम्मी से बोला – “मम्मी, मेरा तोता कब आएगा?”

“पापा ने बोला है ना आ जाएगा, अब जाओ और मिट्ठू के साथ खेलो”।

चीनू ने तुरंत सब्जी की टोकरी से दो हरी मिर्ची उठाई और मिट्ठू के पास चला गया। पर हर बार की तरह ना तो मिट्ठू खुश होता हुआ चीनू की हथेली पर बैठा और ना ही उसने मिर्ची की तरफ देखा।

“मिट्ठू, मेरे प्यारे मिट्ठू, तुम दुखी हो क्या?” चीनू ने मिट्ठू के ऊपर बड़े ही प्यार से हाथ फेरते हुए कहा।

अब मिट्ठू बेचारा क्या कहता। वह तो सच में बहुत दुखी था। उसने धीरे से कहा – “तुम तो मुझे इतना प्यार करते हो फिर दूसरा तोता लाने की क्या जरुरत है?”

पर चीनू को तो सिर्फ़ टें-टें ही सुनाई पड़ी। उसने प्यार से मिट्ठू को उठा लिया और मम्मी से बोला – “आज मिट्ठू का मन हरी मिर्ची खाने का नहीं है, उसे दूध रोटी दे दो।”

पर क्या हरी मिर्ची और क्या दूध रोटी, मिट्ठू ने निगाह उठाकर किसी भी चीज़ को देखा तक नहीं। चीनू के साथ-साथ मम्मी भी बहुत देर तक मिट्ठू को खाना खिलाने की कोशिश करती रही पर फिर थक हार कर सोने चली गई। पहली बार मिट्ठू को चीनू के पापा के आने का इंतज़ार भी नहीं था। वह सोच रहा था कि जैसे ही पापा आएँगे तो अपने साथ दूसरा तोता भी ले आएँगे और फिर उसे कोई प्यार नहीं करेगा।

मिट्ठू के कान दरवाज़े पर ही लगे थे। जैसे ही कोई घर के पास आता मिट्ठू के दिल की धड़कने तेज हो जाती।

आधी रात बीत चुकी थी और उसे बुरी तरह से भूख लग रही थी। पर उसकी जिद और उसका गुस्सा उसे खाना खाने से रोक रहे थे।

तभी उसे बड़ी सी काली बिल्ली दिखी। अँधेरे में चमकती दो आँखें देख उसका दिल सहम गया। उसने अपनी गोल गोल आखें घुमाते हुए तुरंत अपने पिंजरें को चारों ओर से देखा। पर पिंजरा अच्छी तरह से बंद था। चीनू बिल्ली के डर से उसके पिंजरें का दरवाज़ा बंद करना कभी नहीं भूलता था।

पर मिट्ठू धीरे से थोड़ा सा पीछे हो गया क्योंकि बिल्ली बहुत शैतान थी। वह जोर से पंजा मार देती थी और बेचारा मिट्ठू दर्द से बिलबिला उठता था। तभी चीनू के पापा उसके लिए इतना मजबूत और बड़ा पिंजरा बनवा कर लाये थे।

मिट्ठू को याद आया कि बहुत तेज धूप में, इतना बड़ा पिंजरा हाथ में पकड़े, जब पापा घर के अंदर आये थे तो सब उन्हें देखकर घबरा ही गए थे। वह पसीने में लथपथ थे और बुरी तरह हांफ रहे थे।

दादी ने कितना डाँटा था पापा को, पर पापा बोले थे किये आख़िरी पिंजरा था उस दूकान पर, अगर ये बिक जाता तो महीने भर तक इतना बढ़िया पिंजरा नहीं आना था और मिट्ठू कि सुरक्षा के लिए उन्हें वह पिंजरा लाना ही पड़ा।

पापा का प्यार याद करते हुए मिट्ठू की आँखें भर आई। कितना प्यार करते है मुझे सब इस घर में… मिट्ठू ने सोचा। मिट्ठू को खुद पर शर्म आ गई। कितना स्वार्थी है वो… उन्हीं पापा के लिए वह सोच रहा है कि वह घर ना आये तो कितना अच्छा हो।

मिट्ठू ने सोचा – “वह नए तोते का भी स्वागत करेगा। अपने मन में ईर्ष्या का भाव बिलकुल नहीं लाएगा”।

वह भी तो घर भर में सबसे बहुत प्यार करता है। उसका प्यार भी तो कभी नहीं बंटा। मिट्ठू को यह सोचकर अब बहुत अच्छा महसूस हो रहा था। वह दरवाज़े की ओर देखते हुए पापा का इंतज़ार करने लगा। पता नहीं कब उसकी आँखें बंद हो गई और वह गहरी नींद में सो गया।

उसकी नींद चीनू की आवाज़ से खुली जो उसके पिंजरें का दरवाज़ा खोल रहा था।

मिट्ठू फुदकते हुए उसकी हथेली पर जा बैठा।

“पता है मिट्ठू, मुझे लगा कि रात को तेरी तबीयत ठीक नहीं थी इसलिए तुमने खाना नहीं खाया और फिर पता है मैं भी बिना खाये सो गया”।

मिट्ठू तुरंत चीनू के सिर पर बैठ गया ताकि चीनू खुश हो जाए।

“आज तो स्कूल की छुट्टी है ना, तुम भी नाश्ता कर लो और मिट्ठू को भी अपने साथ ही खिला दो” मम्मी ने कहा।

तभी दरवाज़े की घंटी बजी और बाहर से पापा की आवाज़ आई – “चीनू, देखो तुम्हारा तोता आ गया”।

चीनू ख़ुशी के मारे दौड़ता हुआ दरवाज़े के पास जा पहुंचा और चिल्लाया – “मम्मी, पापा आ गए, जल्दी से दरवाज़ा खोलो”।

मम्मी हँसते हुए बोली – “जब तुम्हारा हाथ दरवाज़े की कुण्डी तक नहीं पहुँचता है तो क्यों दौड़ते हुए सबसे पहले पहुँच जाते हो?”

“जल्दी खोलो, जल्दी खोलो” कहते हुए चीनू कूदने लगा।

मम्मी के दरवाज़ा खोलते ही चीनू पापा के पैरों से लिपट गया और बोला – “आप रात में क्यों नहीं आए? मैं बहुत गुस्सा हूँ आपसे”।

“गुस्सा बाद में होना, पहले अपने तोते को तो पिंजरें में रख दो” पापा प्यार से बोले।

मिट्ठू ने इधर-उधर आश्चर्य से देखा पर उसे दूसरा तोता कहीं भी नज़र नहीं आया।

तभी पापा ने एक सुर्ख हरे रंग का खूबसूरत सा तोता अपने बैग से निकाला और चीनू को पकड़ा दिया।

“जब घर में जीता जागता तोता मौजूद है तो फिर मिट्टी के तोते के लिए क्यों पूरे घर को अपने सिर पर उठा रखा था” दादी थोड़ा गुस्से से बोली।

“अरे दादी, धीरे बोलो, ये तोता तो मैंने उस काली बिल्ली को चकमा देने के लिए मंगवाया है। इस पिंजरें को हम आँगन में टांगा करेंगे और वो इसे मिट्ठू समझकर इसी पिंजरें पर हाथ पैर मारा करेगी”।

पापा बोले – “हमारा चीनू तो बड़ा समझदार है”।

चीनू ये सुनकर बहुत खुश हो गया और पापा के गले लग गया।

और मिट्ठू… मिट्ठू तो चीनू का प्यार देखकर रोये जा रहा था… बस रोये जा रहा था।

~ मंजरी शुक्ला (बाल किलकारी – जुलाई 2019)

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