Tag Archives: Hindi Stories on Helplessness

Krishna and Narakasura: Hindu Mythology

Krishna and Narakasura: Naraka - asura son of mother Earth

Narakasura was a legendary figure, the progenitor of the Bhauma dynasty of Pragjyotisha. He is considered to be a son of Bhudevi, fathered by Vishnu in his Varaha incarnation. He is claimed as one who established Pragjyotisha. He was killed by Krishna and his son. Bhagadatta of Mahabharata fame, succeeded him. Bhoomi Devi (mother Earth) had a son named Naraka. …

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ईद मुबारक Eid Special Short Hindi Moral Story For Muslim Children

Eid Special Short Hindi Moral Story ईद मुबारक

ईद मुबारक पर कहानी – चारों ओर ईद की तैयारियाँ चल रही थीं। नगमा एक गरीब महिला थी, जो लोगों के घर काम करके पैसा कमाती थी। उसके साथ उसकी दस साल की बेटी सलमा भी अपनी माँ का काम समेटने में मदद करती थी। नगमा मोहम्मद साहब के घर काम करती थी। ईद के इस पावन पर्व पर मोहम्मद …

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ईदगाह: प्रेमचंद की लोकप्रिय कहानी

ईदगाह - Heart Touching Hindi Story by Munshi Premchand

ईदगाह: प्रेमचंद की लोकप्रिय कहानी – मुंशी प्रेमचंद (अंग्रेज़ी: Munshi Premchand, जन्म: 31 जुलाई, 1880 – मृत्यु: 8 अक्टूबर, 1936) भारत के उपन्यास सम्राट माने जाते हैं जिनके युग का विस्तार सन् 1880 से 1936 तक है। यह कालखण्ड भारत के इतिहास में बहुत महत्त्व का है। इस युग में भारत का स्वतंत्रता-संग्राम नई मंज़िलों से गुज़रा। प्रेमचंद का वास्तविक …

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बाला की दिवाली: गरीबों की सूनी दिवाली की दिल छू लेने वाली कहानी

बाला की दिवाली: गरीबों की सूनी दिवाली की कहानी

बाला की दिवाली:  “माँ… पटाखे लेने है मुझे” बाला ने दिवार के कोने में बैठे हुए कहा। “कहाँ से ले दूँ?” बाला की माँ, शांता का तुरंत जवाब आया। “पर दिवाली में तो सब बच्चे पटाखे फोड़ते है” बाला ने एक और कोशिश करते हुए कहा। “हाँ, पर उनके मम्मी पापा के पास पैसे होते है?” माँ ने रस्सी पर …

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शिबू ने लालटेन जलाई – सबने दिवाली मनाई: एक बहादुर चरवाहे की कहानी

शिबू ने लालटेन जलाई - सबने दिवाली मनाई: मंजरी शुक्ला

शिबू ने लालटेन जलाई – सबने दिवाली मनाई: बहुत समय पहले की बात है… एक गाँव था शिवपुर। उसी गाँव में एक चरवाहा रहता था, बहुत ही सीधा और भोला-भाला बिना किसी लालच और बिना किसी स्वार्थ के सबके दुःख सुख में एक पैर से खड़ा रहता था। गाँव वाले भी उसकी निश्चलता के कारण उसे बहुत प्यार करते थे। …

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मन्नत की दीवाली: अनाथालय के बच्चों के साथ दीवाली का त्योहार

Inspirational Hindi Story about Diwali Festival मन्नत की दीवाली

मन्नत की दीवाली: मैं आपसे कब से कह रही हूँ, पर आप मुझे इस दिवाली पर नई पेंसिल, नए पेन और नया बस्ता दिलवा ही नहीं रही है… मन्नत ने गुस्से से अपनी माँ से कहा। माँ भी दिवाली नज़दीक आने के कारण घर की साफ़ सफ़ाई कर रही थीI सुबह से लगातार काम करते हुए वो भी बुरी तरह …

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दिवाली के दिए: दिल छू लेने वाली कहानी विद्यार्थियों और बच्चों के लिए

Heart touching story about Diwali Festival दिवाली के दिए

दिवाली के दिए: पखवाड़े बाद दिवाली थी। सारा शहर दीवाली के स्वागत में रोशनी से झिलमिला रहा था। कहीं चीनी मिटटी के बर्तन बिक रहे थे तो कहीं मिठाई की दुकानो से आने वाली मन भावन सुगंध लालायित कर रही थी। दिवाली के दिए उसका दिल दुकान में घुसने का कर रहा था और मस्तिष्क तंग जेब के यथार्थ का बोध …

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अनोखा दशहरा: मंजरी शुक्ला की हास्यप्रद कहानी सोने के पत्तों की

अनोखा दशहरा: मंजरी शुक्ला

अनोखा दशहरा: बहुत समय पहले की बात हैं। उदयपुर राज्य में एक राजा राज्य करता था माधोसिंघ। उसके दिमाग में रह रह कर तरह तरह के फ़ितूर आते रहते थे। इस कारण कभी तो उसकी हरकतों पर लोग हँसते हँसते लोटपोट हो जाते तो कई बार उसे सबके साथ इसका खामियाज़ा भी भुगतना पड़ता पर वो अपनी पुरानी गलतियों से …

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ईमानदारी का सबक: ईमानदार गरीब ठेले वाले की प्रेरणादायक बाल-कहानी

ईमानदारी का सबक: गरीब ठेले वाली की ईमानदारी की प्रेरणादायक कहानी

ईमानदारी का सबक: गिरधारी चाचा हमारे विद्यालय की बगल में ही चाट-पकौड़ी का ठेला लगाते थे जिस पर वह गर्मा-गर्म पूरियां, छोले, गोलगप्पे और चाट बेचते जिनकी प्रसिद्धि बहुत दूर-दूर तक थी। वह सुबह उठकर ठेला लगाते थे। उनके ठेला लगाने भर की बस देर होती, ग्राहक उन्हें चीटियों की मानिद घेर लेते। हमारे स्कूल के नजदीक ही बस स्टैंड …

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बाबूजी: पितृ दिवस पर कहानी

पितृ दिवस पर कहानी: बाबूजी

पितृ दिवस पर कहानी: बाबूजी – जब ईश्वर जरुरत से ज्यादा झोली में गिर देता हैं तो वह भी मनुष्य के लिए अहंकार और पतन का कारण बन जाता हैं। ऐसा ही कुछ हुआ चाँदनी के साथ… सभ्य, सुशील और बेहद महत्वकांशी चाँदनी को जब महात्मा गाँधी के आदर्शों पर जीवन पर्यन्त चलने वाले ईमानदार और अकेले बाबूजी ने उसे …

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