आधा तीतर आधा बटेर: मुहावरे पर आधारित एक शिक्षाप्रद हिंदी कहानी

आधा तीतर आधा बटेर: मुहावरे पर आधारित एक शिक्षाप्रद हिंदी कहानी

सोमवार का दिन था। विद्यालय में प्रार्थना सभा चल रही थी। प्रधानाचार्य सहित समस्त स्टाफ भी प्रार्थना स्थल पर खड़े थे। प्रार्थना समाप्ति के बाद शारीरिक शिक्षक मीनाक्षी मैडम ने उन बच्चों को संबोधित करते हुए कहा, “जो विद्यार्थी स्कूल यूनिफॉर्म में नहीं आएं हैं, वे अपने स्थान पर खड़े हो जाओ।”

इतना सुनते ही एक के बाद एक बच्चे खड़े होते चले गए। तभी प्रधानाचार्य की दृष्टि एक बच्चे पर पड़ी। उसे देखते ही उन्होंने मीनाक्षी मैडम से कहा, “मैडम इस आधे तीतर आधे बटेर को मेरे पास भेजो।”

आधा तीतर आधा बटेर: मुहावरे पर आधारित कहानी

प्रधानाचार्य की बात सुनते ही सब बच्चे और स्टाफ श्याम की तरफ देखने लगे। दरअसल, प्रधानाचार्य ने श्याम की ओर इशारा करके ही कहा था। मीनाक्षी मैडम ने श्याम को गौर से देखा तो उनके चेहरे पर मुस्कान आ गई।

उसे देखकर कुछ बच्चे भी हंस रहे थे तो कुछ सोच में पड़े हुए थे कि इसे प्रधानाचार्य ने आधा तीतर आधा बटेर क्यों कहा?”

श्याम चुपचाप प्रधानाचार्य जी के सामने खड़ा था। उन्होंने उससे कहा, “मेरे कार्यालय के बाहर एक बड़ा-सा आईना लगा है, उसके सामने जाकर खड़े हो जाओ और स्वयं को ध्यान से देखना।”

श्याम चुपचाप प्रधानाचार्य जी के सामने खड़ा था। उन्होंने उससे कहा, “मेरे कार्यालय के बाहर एक बड़ा-सा आईना लगा है, उसके सामने जाकर खड़े हो जाओ और स्वयं को ध्यान से देखना।”

श्याम आईने के पास जाकर देखा। उसके नीचे लिखा था, ‘आई एम स्मार्ट’।

प्रधानाचार्य जी भी पीछे-पीछे आ गए।

“क्या नाम है तुम्हारा?” उन्होंने पूछा।

“जी श्याम।” उसने उत्तर दिया।

प्रधानाचार्य जी ने कहा, “तुमने ऊपर लंबा सा कुर्ता पहन रखा है और नीचे खाकी पेंट की जगह ये क्या पहन रखा है?”

श्याम ने डरते हुए कहा, “जी जीन्स।”

“अरे भले आदमी कभी जीन्स के साथ कुर्ता या कुर्ते के साथ जीन्स पहनी जाती है। तुझे कुर्ता ही पहनना था तो धोती पहनता या पायजामा। यह पोशाक आधी तो भारतीय और आधी पश्चिमी लग रही है।” प्रधानाचार्य जी ने समझाते हुए कहा।

“मुझे क्षमा कर दीजिए सर … भविष्य में पूरी यूनिफॉर्म में ही आऊंगा।” श्याम ने कान पकड़ते हुए कहा।

“ठीक है बेटा आगे से आधा तीतर, आधा बटेर बनकर मत आना।” प्रधानाचार्य जी ने मुस्कुराते हुए कहा।

श्याम जब अपनी कक्षा में पहुंचा तो सब बच्चे हंसने लगे।

“तुम सब क्यों हंसें?” कक्षा में उपस्थित अध्यापक ने बच्चों से पूछा।

एक बच्चे ने पूछा, “सर आज प्रार्थना सभा में प्रधानाचार्य जी ने श्याम को आधा तीतर आधा बटेर क्यों कहा?”

“सर ने एक मुहावरे का प्रयोग करते हुए ऐसा कहा था।” कक्षा अध्यापक बोले। फिर श्याम की तरफ मुड़कर उन्होंने पूछा, “श्याम तुम जानते हो कि प्रधानाचार्य जी ने तुम्हें ऐसा क्यों कहा?”

“नहीं सर … मैं कुछ समझ नहीं पाया।” श्याम ने धीरे से जवाब दिया।

“चलो तुम सब को समझाता हूं इस मुहावरे का अर्थ।”

“देखो बच्चो ‘आधा तीतर आधा बटेर‘ एक प्रसिद्ध हिन्दी का मुहावरा है जिसका अर्थ है बेमेल, बेढंगा या बेतुका। यह तब प्रयोग में लाया जाता है जब दो अलग-अलग प्रकार का अजीब मेल हो और दिखने में भद्दा लगे। जैसे श्याम ने ऊपर से कुर्ता पहन रखा है और नीचे जीन्स। कुर्ता और जीन्स का मेल कभी देखा आपने। और देखा भी हो तो वह आधा तीतर आधा बटेर ही कहलाएगा।” कक्षा अध्यापक ने समझाया।

“सर आपकी बात तो समझ में आ गई लेकिन तीतर और बटेर तो दो पक्षी होते हैं तो उनका यहां नाम क्यों आया?” एक बच्चे ने पूछा।

“तीतर और बटेर दिखने में एक जैसे जमीनी पक्षी होते हैं लेकिन उनमें बड़ा अंतर होता है। दोनों के आकार, व्यवहार और दिनचर्या में काफी भिन्नता होती है, लेकिन कुछ लोग उनमें अंतर नहीं कर पाते हैं।”

कुछ बच्चों ने तीतर और बटेर कभी देखे नहीं थे। अध्यापक ने उन्हें समझाने का तरीका निकाला। वह बच्चों को प्रोजैक्टर रूम में ले गए और वहां पर्दे पर विस्तार से तीतर और बटेर नामक पक्षियों की जानकारी दी। “अब तुम सब ने मुहावरे के साथ-साथ तीतर और बटेर भी देख लिए ना …? ” कक्षा अध्यापक ने पूछा।

“हां सर .. ।” सब एक स्वर में बोल पड़े। इसके बाद सभी ने अपने कक्षा अध्यापक जी के सम्मान में तालियां बजाई।

“अरे भई ये तालियां तो श्याम के लिए बनती हैं जिसने मुहावरे को उपयोग में लाने का अवसर दिया।” कक्षा अध्यापक ने हंसते हुए कहा।

~ ‘आधा तीतर आधा बटेर‘ Hindi story by ‘गोविन्द भारद्वाज‘, अजमेर

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