कोरोना: Chinese वायरस कोरोना पर हिंदी कवितायेँ

कोरोना: Chinese वायरस कोरोना पर हिंदी कवितायेँ

चीन के वुहान शहर से फैली कोरोना वायरस महामारी के बाद अमेरिका ने वायरस के वुहान की लैब में तैयार किए जाने के आरोप लगाए थे, लेकिन चीन ने उन्हें खारिज कर दिया था।

अब एक चीनी वायरोलॉजिस्ट (विषाणु विशेषज्ञ) ने दावा किया है कि कोरोना वायरस वुहान की एक लैब में ही तैयार किया गया था और उनके पास सबूत भी हैं।

कोरोना: Chinese वायरस कोरोना पर हिंदी कविता [1]

सोचा था कोरोना जा रहा है
सुना है वो अपग्रेड होकर आ रहा है

अभी तो छूने से फैलता है
अब क्या निहारने से फैलेगा?

नाक मुंह तो ढक लिया
अब क्या आंखों को छिपाना पड़ेगा?

घर में तो बंद किया अपने को
अब क्या रजाई मे रहना पड़ेगा?

खूब पिया काढ़ा
अब क्या काढ़े में डूबना पड़ेगा?

समस्या जा रही है
या भंयकर आ रही है

थाली पीटी
अब क्या सर पीटेगें
दिया जलाया
अब क्या घर जला देगें

खूब डर लिया 2020 में
अब क्या 2021 में और ज्यादा डरना पड़ेगा?

क्या दुनिया बदल गई
हमको भी बदलना पडेगा

क्या जीवन अब ऐसे ही चलेगा?

जो कहे सरकार
सुनना तो पडेगा
और जो ना कहे सरकार
वो भी करना पडेगा!

कुल मिलाकर
हमको भी खुद को अपग्रेड करना पडेगा!

कोरोना: हिंदी कविता [2]

जन्म तेरा चीन से हुआ
पालन-पोषण दुनिया से
एक इंशान से दूसरे इंशान में,
फैलकर तू के अपना घर बसाया;
दूसरों की जान लेकर,
तूने अपना पेट पचाया।

तू,तो बाहर खूब घूमा
हम सब को घर बैठाकर
तू,तो बहुत जोर-जोर से हँसा
हम सब को बहुत रुलाकर।

तूने,तो अपना नाम कोरोना बताया
पर, लोगों ने कहा यह वक़्त महामारी का आया
तूने,कहा मैं तुम्हारी जिंदगी बदल दूंगा
मुँह में मास्क,
और हाथ में सैनिटाइजर रख दूंगा।

तुम सब में आपस में बहुत भेद-भाव हैं,
ऊँच-नीच,जात-पात ऐ आपसी का सुझाव हैं;
लो, तो ऐसा वक़्त लाया हूँ
न रहेगी ऊँच-नीच और जात-पात
और न ही रहोगे तुम आपस में साथ-साथ।

कोरोना का सब जगह रोना है,
इसके पीछे खर्च हुआ सोना है
पैसे खर्च हुए लाख और करोड़
पर वैक्सीन न आई
साल पूरा हो को आया
बस ईश्वर की कृपा रंग लाई।

स्कूल पूरे साल बंद रहा
बच्चे घर में बोर हो गए
स्कूल चालू करो, यह सब जगह शोर मच गए
कोरोना ने कहा; बच्चों थोड़ा आराम कर लो
स्कूल चालू होंगे, परीक्षा का इंतजार कर लो।

बस बहुत हुआ यह अत्याचार
कब ख़त्म होगा यह कोरोना का वार
काढ़ा पी-पी के हमने अपनी प्यास बुझाई
मास्क लगा के हमने अपनी जान बचाई

कब आएगी वैक्सीन
यह सवाल हम पूछते हैं डॉक्टर से
आँखें तरस गई वैक्सीन देखने के लिए,
कान तरस गए यह सुनने के लिए
कि फाइनली वैक्सीन आ गई
इंतजार ख़त्म नहीं हो रहा

कोरोना रुकने का नाम नहीं ले रहा
हे ईश्वर आपसे यह प्राथना है
हमे चीन का यह बिन बुलाया मेहमान नहीं चाहिए
ईश्वर जहाँ से यह आया
इसे अपने घर वापिस बुलाए।

~ Prakriti Pandey

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