Poems In Hindi

बच्चों की हिन्दी कविताएं — 4to40 का हिन्दी कविताओ का संग्रह | Hindi Poems for Kids — A collection of Hindi poems for children. पढ़िए कुछ मजेदार, चुलबुली, नन्ही और बड़ी हिंदी कविताएँ. इस संग्रह में आप को बच्चो और बड़ो के लिए ढेर सारी कविताएँ मिलेंगी.

बतूता का जूता – सर्वेश्वर दयाल सक्सेना

बतूता का जूता - सर्वेश्वर दयाल सक्सेना

इब्न बतूता, पहन के जूता निकल पड़े तूफान में। थोड़ी हवा नाक में घुस गई, थोड़ी घुस गई कान में। कभी नाक को, कभी कान को, मलते इब्न बतूता। इसी बीच में निकल पड़ा, उनके पैरों का जूता। उड़ते-उड़ते जूता उनका, जा पहुँचा जापान में। इब्न बतूता खड़े रह गए, मोची की दूकान में। ∼ सर्वेश्वर दयाल सक्सेना

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चित्र – नरेश अग्रवाल

चित्र से उठते हैं तरह-तरह के रंग लाल-पीले-नीले-हरे आकर खो जाते हैं हमारी आंखों में फिर भी चित्रों से खत्म नहीं होता कभी भी कोई रंग। रंग अलग-अलग तरह के कभी अपने हल्के स्पर्श से तो कभी गाढ़े स्पर्श से चिपके रहते हैं, चित्र में स्थित प्रकृति और जनजीवन से। सभी चाहते हैं गाढ़े रंग अपने लिए लेकिन चित्रकार चाहता …

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चित्रकार – नरेश अग्रवाल

]मैं तेज़ प्रकाश की आभा से लौटकर छाया में पड़े कंकड़ पर जाता हूँ वह भी अंधकार में जीवित है उसकी कठोरता साकार हुई है इस रचना में कोमल पत्ते मकई के जैसे इतने नाजुक कि वे गिर जाएँगे फिर भी उन्हें कोई संभाले हुए है कहाँ से धूप आती है और कहाँ होती है छाया उस चित्रकार को सब-कुछ …

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गड़बड़ घोटाला – सफ़दर हाश्मी

यह कैसा है घोटाला, कि चाबी में है ताला। कमरे के अंदर घर है, और गाय में है गौशाला॥ दांतों के अंदर मुहं है, और सब्जी में है थाली। रुई के अंदर तकिया, और चाय के अंदर प्याली॥ टोपी के ऊपर सर है, और कार के ऊपर रस्ता। ऐनक पर लगी हैं आँखें, कापी किताब में बस्ता॥ सर के बल …

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हाशिया – मनोज कुमार ‘मैथिल’

मैं एक हाशिया हूँ मुझे छोड़ा गया है शायद कभी ना भरने के लिए मेरे बाद बहुत कुछ लिखा जायेगा मुझसे पहले कुछ नहीं मैं उनके लिए अस्तित्वहीन हूँ जिनका अस्तित्व मुझसे है मैं एक हाशिया हूँ मुझे छोड़ा गया है सुन्दर दिखने के लिए मुझे छोड़ लिखे जाते हैं बड़े-बड़े विचार मुझपर विचार करने की फुर्सत कहाँ ? मैं …

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दर्द माँ-बाप का – शिल्पी गोयल

वे बच्चे जो करते हैं माँ-बाप का तिरस्कार, अक्ल आती है उन्हें जब पड़ती है बुरे वक़्त की मार। क्या करे दुनिया ही ऐसी है, बेटे तो बेटे बेटियां भी ऐसी हैं। माँ-बाप का खून करते हैं बच्चे, जब बारी आती है अपनी तो रो पड़ते हैं बेचारे बच्चे। माँ-बाप के सहारे जीते थे कभी बच्चे, अब बच्चों के सहारे …

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बस्ता – महजबीं

हे भगवान मेरा यह बस्ता, करता है मेरा हाल खस्ता। कवा दो इसका भार कम, निकल ना जाए मेरा दम। कब चलेगा ऐसे काम, जीना हुआ मेरा हराम। जो छीने मेरा आराम हे भगवान निकालो कोई रास्ता, तुझे हमारे बचपन का वास्ता। ∼ महजबीं

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डाल पर बन्दर

बैठा था एक डाल पर बन्दर भीग रहा पानी के अंदर। थर-थर थर-थर काँप रहा था, ऑछी-ऑछी रहा था। चिड़िया बोली बन्दर मामा, कहा नहीं क्यों तुमने माना ? ऑछी-ऑछी छींक रहे हो सुन मामा को गुस्सा आया, चिड़िया का घर तोड़ गिराया। चूँ-चूँ चूँ-चूँ चिड़िया रोई, बैठ डाल पर वो भी सोई।

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डाकिया आया

देखो एक डाकिया आया, थैला एक हाथ में लाया। पहने है वह खाकी कपड़े, कई चिट्ठियां हाथ में पकड़े। चिट्ठी में संदेशा आया, शादी में है हमें बुलाया। शादी में सब जाएंगे, खूब मिठाई खाएंगे।

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