Poems In Hindi

बच्चों की हिन्दी कविताएं — 4to40 का हिन्दी कविताओ का संग्रह | Hindi Poems for Kids — A collection of Hindi poems for children. पढ़िए कुछ मजेदार, चुलबुली, नन्ही और बड़ी हिंदी कविताएँ. इस संग्रह में आप को बच्चो और बड़ो के लिए ढेर सारी कविताएँ मिलेंगी.

किताब – हिमानी जैन

जब कोई दोस्त हो हमारे खिलाफ, तो मदद करती हैं कुछ किताब, जब हो हमारे इम्तिहान पास, तो मदद मिलती है इनसे ख़ास। जब कोई हमसे हो नाराज, तो पढ़ती हूँ किताबों से बेहतरीन राज, तो फिर हर दोस्त बन जाता है, मेरा दोस्त खास। किताब ही है हमारी एक दोस्त, जो आती हमारे काम हर रोज़, सरस्वती माँ का …

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किसान (भारत–भारती से) – मैथिली शरण गुप्त

हेमन्त में बहुदा घनों से पूर्ण रहता व्योम है। पावस निशाओं में तथा हँसता शरद का सोम है॥ हो जाये अच्छी भी फसल, पर लाभ कृषकों को कहाँ। खाते, खवाई, बीज ऋण से हैं रंगे रक्खे जहाँ॥ आता महाजन के यहाँ वह अन्न सारा अंत में। अधपेट खाकर फिर उन्हें है काँपना हेमंत में॥ बरसा रहा है रवि अनल, भूतल …

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चोरी का गंगाजल – मनोहर लाल ‘रत्नम’

महाकुम्भ से गंगाजल मैं, चोरी करके लाया हूँ। नेताओं ने कर दिया गन्दा, संसद धोने आया हूँ॥ देश उदय का नारा देकर, जनता को बहकाते हैं, छप्पन वर्ष की आज़ादी को, भारत उदय बताते हैं। मंहगाई है कमर तोड़ती, बेरोजगारी का शासन, कमर तलक कर्जे का कीचड, यह प्रगति बतलाते हैं॥ थोथे आश्वासन नेता के, मैं बतलाने आया हूँ। महाकुम्भ …

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कवि कभी रोया नहीं करता – मनोहर लाल ‘रत्नम’

कवि कभी रोया नहीं करता, वह केवल गाया करता है। दर्द सभी सीने में रखकर, वह जीवन पाया करता है॥ जब जब भी आहें उठती हैं, तब तब गीत नया बनता है। जब जब छलका करते आंसू– कवि का मीत नया बनता है॥ आंसू संग आहों का बंधन, कवि केवल पाया करता है। कवि कभी रोया नहीं करता, वह केवल …

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खतरा है – मनोहर लाल ‘रत्नम’

देशवासियों सुनो देश को, आज भयंकर खतरा है। जितना बाहर से खतरा, उतना भीतर से खतरा है॥ सर पर खरा चीन से है, लंका से खतरा पैरों में, अपने भाई दिख रहे हैं, जो बैठे हत्यारों में। इधर पाक से खतरा है तो, इधर बंग से खतरा है, निर्भय होकर जो उठती सागर तरंग से खतरा है। माँ के आँचल …

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जिन्दा रावण बहुत पड़े हैं – मनोहर लाल ‘रत्नम’

अर्थ हमारे व्यर्थ हो रहे, कागज पुतले और खड़े हैं। कागज के रावण मत फूंकों, जिन्दा रावण बहुत पड़े हैं॥ कुम्भ-कर्ण तो मदहोशी हैं, मेघनाथ निर्दोषी है, अरे तमाशा देखने वालों, इनसे बढ़कर हम दोषी हैं। अनाचार में घिरती नारी, हां दहेज की भी लाचारी– बदलो सभी रिवाज पुराने, जो घर द्वार से आज अड़े हैं। कागज के रावण मत …

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देश किन्नरों को दे दो – मनोहर लाल ‘रत्नम’

देश नारों से घिरा, मैं हर सितम को सह रहा हूँ, आँख के आंसू मैं देखो अब खडा मैं बह रहा हूँ। और अत्त्याचार मुझसे देश मैं देखे न जाएं– आज शिव सा ही गरल मैं पान करके कह रहा हूँ॥ भावना बैठी कहाँ है आप भी मन को कुरेदो। आप के बस का ना हो तो, देश किन्नरों को …

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कील पुरानी है – मनोहर लाल ‘रत्नम’

नये साल का टँगा कलेण्डर कील पुरानी है। कीलों से ही रोज यहाँ होती मनमानी है॥ सूरज आता रोज यहाँ पर लिए उजालों को। अपने आँचल रात समेटे, सब घोटालों को। बचपन ही हत्या होती है, वहशी लोग हुए। और अस्थियाँ अर्पित होती गन्दे नालों को। इन कीलों पर पीड़ा ही बस आनी जानी है। नये साल का टँगा कलेण्डर …

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गंगाजल – मनोहर लाल ‘रत्नम’

गंगाजल अंजलि में भरकर, सूरज का मुख धुलवायें। घना कुहासा, गहन अँधेरा, नया सवेरा ले आयें।। देश मेरे में बरसों से ही, नदी आग की बहती है। खून की धरा से हो लथपथ, धरती ही दुख सहती है। शमशानों के बिना धरा पर, जलती है कितनी लाशें हर मानव के मन में दबी सी, कुछ तो पीड़ा रहती है। अब …

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क्योंकि सपना है अभी भी – धर्मवीर भारती

…क्योंकि सपना है अभी भी इसलिए तलवार टूटी अश्व घायल कोहरे डूबी दिशाएं कौन दुश्मन, कौन अपने लोग, सब कुछ धुंध धूमिल किन्तु कायम युद्ध का संकल्प है अपना अभी भी …क्योंकि सपना है अभी भी! तोड़ कर अपने चतुर्दिक का छलावा जब कि घर छोड़ा, गली छोड़ी, नगर छोड़ा कुछ नहीं था पास बस इसके अलावा विदा बेला, यही …

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