Poems In Hindi

बच्चों की हिन्दी कविताएं — 4to40 का हिन्दी कविताओ का संग्रह | Hindi Poems for Kids — A collection of Hindi poems for children. पढ़िए कुछ मजेदार, चुलबुली, नन्ही और बड़ी हिंदी कविताएँ. इस संग्रह में आप को बच्चो और बड़ो के लिए ढेर सारी कविताएँ मिलेंगी.

जय मां काली – इन्दीवर

खदगम चक्र गदेशु चाप परिघान शूल बुशुन्दिम शिरः शंख संदा धतिम करे स्त्रिनायानाम सरवांग भूशाप्तन जय मां काली, जय मां काली जान चाहे लेनी पड़े, जान चाहे देनी पड़े बलि हम चढ़ाएगे जय काली, जय काली, नाश दुष्ट का करने वाली… जय मां काली जान चाहे लेनी पड़े, जान चाहे देनी पड़े बलि हम चढ़ाएगे जय काली, जय काली, नाश …

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मैं जीवन में कुछ न कर सका – हरिवंश राय बच्चन

मैं जीवन में कुछ न कर सका… जग में अँधियारा छाया था, मैं ज्‍वाला लेकर आया था मैंने जलकर दी आयु बिता, पर जगती का तम हर न सका। मैं जीवन में कुछ न कर सका… अपनी ही आग बुझा लेता, तो जी को धैर्य बँधा देता, मधु का सागर लहराता था, लघु प्‍याला भी मैं भर न सका। मैं …

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जय जय शिव शंकर – आनंद बक्षी

जय जय शिव शंकर काँटा लगे न कंकर जो प्याला तेरे नाम का पिया ओ गिर जाऊँगी, मैं मर जाऊँगी जो तूने मुझे थाम न लिया सो रब दी जय जय शिव शंकर… एक के दो दो के चार हमको तो दिखते हैं ऐसा ही होता है जब दो दिल मिलते हैं सर पे ज़मीं पाँव के नीचे है आसमान, …

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जिस्म संदल – राजमूर्ति सिंह ‘सौरभ’

जिस्म संदल, कारनामे हैं मगर अंगार से, आपकी सूरत अलग है आपके किरदार से। आप के सारे मुखौटे अब पुराने हो गये, औए कुछ चेहरे नए ले आइये बाजार से। ख़ाक हो जाएगी बस्ती, क्या महल क्या झोपडी, दूर रखिये आग को, बारूद के अम्बार से। अपना चेहरा साफ़ करिये, आईने मत तोडिये, हल ना होंगे मसले, यूँ नफरतों-तकरार से। …

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इक पल – राजीव कृष्ण सक्सेना

इक पल है नैनों से नैनों के मिलने का, बाकी का समय सभी रूठने मनाने का। इक पल में झटके से हृदय टूक-टूक हुआ, बाकी का समय नीर नैन से बहाने का। इक पल की गरिमा ने बुध्द किया गौतम को, बाकी का समय तपी ज़िंदगी बिताने का। पासों से पस्त हुए इक पल में धर्मराज, बाकी का समय कुरुक्षेत्र …

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जागो जागो शंकरा – महाशिवरात्रि भजन

जागो जागो शंकरा जागो जागो साईश्वरा जागो जागो जागो शंकरा हलाहल धार हे परमेशा हे त्रिपुरारी जय पर्थिशा गंगा धरा शंकरा शिवा गौरी वारा शंकरा हरा गंगा धरा शंकरा सथ्य साईश्वरा शंकरा

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इतनी शक्ति हमें देना दाता – अभिलाष

इतनी शक्ति हमें देना दाता मन् का वीश्वास कमजोर हो ना हम चलें नेक रस्ते पे हमसे भूलकर भी कोई भूल हो ना… हर तरफ ज़ुल्म है बेबसी है सहमा सहमा सा हर आदमी है पाप का बोझ बढ़ता ही जाये जाने कैसे ये धरती थमी है बोझ ममता का तू ये उठा ले तेरी रचना का ये अंत हो …

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हिंदी दोहे गणतंत्र के – डॉ. शरद नारायण खरे

भारत के गणतंत्र का, सारे जग में मान। छह दशकों से खिल रही, उसकी अद्भुत शान॥ सब धर्मों को मान दे, रचा गया इतिहास। इसीलिए हर नागरिक, के अधरों पर हास॥ प्रजातंत्र का तंत्र यह, लिये सफलता-रंग। जात-वर्ग औ क्षेत्र का, भेद नहीं है संग॥ पांच वर्ष में हो रहा, संविधान का यज्ञ। शांतिपूर्ण ढंग देखकर, चौंके सभी सुविज्ञ॥ भारत …

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हिन्दुस्तान के लिए – मनोहर लाल ‘रत्नम’

कहीं हिन्दू सिख मुसलमान के लिए, कहीं छोटी और कहीं कृपाण के लिए। दंगो से तो देखा मेरा देश जल रहा- भैया कुछ तो सोचो हिन्दुस्तान के लिए॥ चिराग घर के के ही जल रह यहाँ, मदारी अपनी ढपलियां बजा रहे यहाँ। द्वेष वाली भावना के विष को घोलके- देश कि अखंडता वो खा रहे यहाँ॥ भाषा-भाषी झगडे जुबान के …

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