Poems In Hindi

बच्चों की हिन्दी कविताएं — 4to40 का हिन्दी कविताओ का संग्रह | Hindi Poems for Kids — A collection of Hindi poems for children. पढ़िए कुछ मजेदार, चुलबुली, नन्ही और बड़ी हिंदी कविताएँ. इस संग्रह में आप को बच्चो और बड़ो के लिए ढेर सारी कविताएँ मिलेंगी.

बस्ता – महजबीं

हे भगवान मेरा यह बस्ता, करता है मेरा हाल खस्ता। कवा दो इसका भार कम, निकल ना जाए मेरा दम। कब चलेगा ऐसे काम, जीना हुआ मेरा हराम। जो छीने मेरा आराम हे भगवान निकालो कोई रास्ता, तुझे हमारे बचपन का वास्ता। ∼ महजबीं

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डाल पर बन्दर

बैठा था एक डाल पर बन्दर भीग रहा पानी के अंदर। थर-थर थर-थर काँप रहा था, ऑछी-ऑछी रहा था। चिड़िया बोली बन्दर मामा, कहा नहीं क्यों तुमने माना ? ऑछी-ऑछी छींक रहे हो सुन मामा को गुस्सा आया, चिड़िया का घर तोड़ गिराया। चूँ-चूँ चूँ-चूँ चिड़िया रोई, बैठ डाल पर वो भी सोई।

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डाकिया आया

देखो एक डाकिया आया, थैला एक हाथ में लाया। पहने है वह खाकी कपड़े, कई चिट्ठियां हाथ में पकड़े। चिट्ठी में संदेशा आया, शादी में है हमें बुलाया। शादी में सब जाएंगे, खूब मिठाई खाएंगे।

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बादल – नेक राम अहिलवर

काले-काले उमड़कर बादल, लाए पानी भरकर बादल। बादलों ने जब डाला डेरा, छाया आकाश में घोर अंधेरा। दूर से आया चलकर बादल, लाया पानी भरकर बादल॥ बच्चा बूढा नहीं कोई उदास, बुझेगी तपती धरती की प्यास। नहीं भागेगा डर के बादल, लाया पानी भरकर बादल॥ धरा से लेकर पर्वत की चोटी, गिरी उन पर बूंदे मोटी-मोटी। बरसेगा आज जमकर बादल, …

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गीत फरोश – भवानी प्रसाद मिश्र

जी हाँ हुजूर, मैं गीत बेचता हूँ, मैं तरह-तरह के गीत बेचता हूँ, मैं किसिम-किसिम के गीत बेचता हूँ। जी, माल देखिए, दाम बताऊँगा, बेकाम नहीं हैं, काम बताऊँगा, कुछ गीत लिखे हैं मस्ती में मैंने, कुछ गीत लिखे हैं पस्ती में मैंने, यह गीत सख्त सर-दर्द भुलाएगा, यह गीत पिया को पास बुलाएगा। जी, पहले कुछ दिन शर्म लगी …

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दो भाई

चुन्नू मुन्नू थे दो भाई, रसगुल्ले पर हुई लड़ाई। चुन्नू बोला, मैं लूंगा, मुन्नू बोला, कभी न दूंगा। झगड़ा सुनकर मम्मी आई, प्यार से एक बात बताई। आधा ले तू चुन्नू बेटा, आधा ले तू मुन्नू बेटा। ऐसा झगड़ा कभी न करना, दोनों मिलकर प्रेम से रहना।

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गुड़िया – महजबीं

मेरी गुड़िया बहुत प्यारी नाम उसका राजकुमारी। पहले थी मैं कितनी अकेली अब यह है मेरी सहेली। करती है मुझसे बातें दिन भर भी हम साथ बिताते। काटते हैं अब दिन कितने अच्छे नहीं थे पहले उतने अच्छे। ∼ महजबीं

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दो चूहे

दो चूहे थे, मोटे-मोटे थे, छोटे-छोटे थे। नाच रहे थे, खेल रहे थे, कूद रहे थे। बिल्ली ने कहा, म्याऊँ (मैं आऊँ)। ना मौसी ना, हमें मार डालोगी। फिर खा जाओगी, हम तो नहीं आएँगे। हम तो भाग जाएँगे।

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