Hindi Poem about Over Population जनसंख्या

जनसंख्या: Hindi Poem about Over Population

भारत की अनेक समस्याओं का कारण यहाँ की तेजी से बढती हुई Population है। स्थिति इतनी भयावह हो गई है कि इसे सख्या विस्फोट की संज्ञा दी जाती है। अर्थशारित्रयों का मत है कि भारत के लिए इस बढती हुई जनसंख्या की जरूरतो को पूरा करने के लिये पर्याप्त साधन नहीं हैं। आज हमारी जनसख्या लगभग एक अरब पाच करोड से भी ऊपर होने का अनुमान है।

यदि इसी गति से जनसख्या वृद्धि होती रही, तो आने वाले समय मे स्थित हर प्रकार से नियंत्रण से बाहर हो जाएगी। जनसंख्या में तेजी से वृद्धि के कारण हमारे विकास की गति बहुत धीमी पड़ गई है। गरीबी, भुखमरी और बेरोजगारी जैसी विकराल समस्याओं के मूल में जनसख्या की अधाधुँध वृद्धि है।

भारत में जनसंख्या की समस्या पर हिंदी कविता

जनसंख्या जो ये तेजी से बढ़ रही
बहुत से समस्याए पैदा कर रही
खाद्यान्न संकट खड़ा हो गया
उर्जा संकट बड़ा हो गया
भुखमरी चारो ओर बढ़ी
गरीबी की समस्या सामने खड़ी

जनसंख्या जो ये तेजी से बढ़ रही
बहुत से समस्याए पैदा कर रही
बेरोजगारी हताशा ला रही
आर्थिक संकट की चिंता खाए जा रही
महंगाई तेजी से बढ़ रही
आम लोगो का जीना मुश्किल कर रही

जनसंख्या जो ये तेजी से बढ़ रही
बहुत से समस्याए पैदा कर रही
भ्रष्टाचार तेजी से बढ़ रहा
जनता को न्याय नहीं मिल रहा
जंगल काटे जाते है
पेड़ न कोई लगाते है

जनसंख्या जो ये तेजी से बढ़ रही
बहुत से समस्याए पैदा कर रही
चारो ओर प्रदुषण बढ़ते जा रहा
नई नई बीमारिया फैला रहा
खतरे में है वन्यजीवों का जीवन
हो रहे रोज उनपर नए नए सितम

जनसंख्या जो ये तेजी से बढ़ रही
बहुत से समस्याए पैदा कर रही
हमें इन समस्यायों से निजात पाना होगा
जनसंख्या के बढ़ने पे अंकुश लगाना होगा
हमें कुछ तो कदम उठाना होगा
छोटा परिवार, सुखी परिवार का नारा लगाना होगा

~ हिंदी Poem by भूपेन्द्र जायसवाल

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