व्यवहार और शिष्टाचार पर हिंदी बाल-कविताएं: Etiquettes & Good Manners Hindi Poems

व्यवहार और शिष्टाचार पर हिंदी बाल-कविताएं: Etiquettes & Good Manners Hindi Poems

व्यवहार और शिष्टाचार पर हिंदी बाल-कविताएं:

शिष्टाचार एक ऐसी व्यवस्था प्रदान करता है जिसके माध्यम से समाज का प्रत्येक सदस्य सम्मानजनक व्यवहार प्रदर्शित कर सकता है और उससे सम्मानजनक व्यवहार की अपेक्षा कर सकता है। यह दूसरों के अधिकारों और सीमाओं के प्रति सहानुभूति और सम्मान व्यक्त करने में भी सहायक होता है।

अच्छे शिष्टाचार का अर्थ है किसी व्यक्ति का दूसरों के प्रति व्यवहार। अच्छे शिष्टाचार से दूसरों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है और व्यक्ति में आत्मविश्वास बढ़ता है। हम सभी को बचपन से ही अपने माता-पिता और अभिभावकों के मार्गदर्शन में अच्छे शिष्टाचार सीखने चाहिए। हमें स्कूल, घर, दफ्तर या दोस्तों के घर पर हमेशा अच्छा व्यवहार करना चाहिए।

अच्छे शिष्टाचार का मतलब सिर्फ धन्यवाद पत्र लिखना और दूसरों के लिए दरवाजे खोलना ही नहीं है। जब हम दूसरों का सम्मान करते हैं, तो हम उनका ध्यान और मन आकर्षित करते हैं। हम अपने अच्छे व्यवहार से उन्हें भी अच्छा व्यवहार करने और शिष्टाचार दिखाने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। हमारा वास्तविक व्यवहार, सोच और मानसिकता इस बात से मापी जा सकती है कि हम दूसरों के प्रति कितने विनम्र हैं। सभी के लिए अच्छे शिष्टाचार का पालन करना आसान नहीं है; लेकिन अच्छे अभ्यास के बाद इसे जल्दी से सीखा जा सकता है।

Etiquettes & Good Manners Short Hindi Poems

  1. विनय: रामप्रसाद शर्मा प्रसाद

विनय: व्यवहार / शिष्टाचार पर कविता [01]

अरे, गुणों में एक गुण महान,
‘विनय’ को मेरे बंधु जान।

इसमें है आकर्षण प्रभाव,
डूबे नहीं कभी इसकी नाव।

इससे मिलता हमें ज्ञान,
रे, इससे मिलते झट भगवान।

पत्थर दिल को विनय पिघलाए,
क्रोधी को भी शांत कर जाए।

विनयी की महिमा लाए रंग,
अरे, वह तो सच नहाए गंग।

जिसके अंतरंग में विनय भाव,
उससे बढ़कर न कोई जनाब।

भाव कोई न इससे बढ़कर,
इसमें बसे शिष्टता-आदर।

इससे विद्याशोभा पाती,
कितना है यह विवेक जगाती।

सच्चे हृदय से विनय करो,
विनय करते नहीं कभी टरो।

पद विनय के मीरा ने गाए,
गिरिधर नागर खूब रिझाए।

तुलसीदास की विनय पत्रिका,
रे, पढ़ जाओ तुम यदा-कदा।

मोक्षमार्ग में विनय प्रधान,
कहे प्रसाद तू ऐसा मान।

~ रामप्रसाद शर्मा प्रसाद

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