सूर्य के विषय पर हिंदी कविताएँ: Collection of Short Hindi Poems on Sun god

सूर्य के विषय पर हिंदी कविताएँ: Collection of Short Hindi Poems on Sun god

सूर्य के विषय पर हिंदी कविताएँ: सूर्य को वेदों में जगत की आत्मा कहा गया है। समस्त चराचर जगत की आत्मा सूर्य ही है। सूर्य से ही इस पृथ्वी पर जीवन है, यह आज एक सर्वमान्य सत्य है। वैदिक काल में आर्य सूर्य को ही सारे जगत का कर्ता-धर्ता मानते थे।

  1. सूर्य
  2. सूरज बनके ‘उजाला’ करना है

सूर्य देव पर हिंदी कविताओं का संग्रह: Collection of Hindi poems on Sun

सूर्य: Hindi Poem on Sun god [1]

उदय-अस्त है तेरा खेल।
ऐसी चलती है तेरी रेल॥
तुम सृष्टि के प्रत्यक्ष देव।
रे, तुझ में नहीं राग-द्वेष॥

लेकर समदृष्टि व समभाव।
बांटते तुम दिव्य प्रकाश॥
पर्यावरण का संवर्धन।
कर जाते तुम संरक्षक बन॥

अमृत तुल्य हो देते धूप।
तेजोमय है तुम्हारा रूप॥
विश्व को हो निरोग बनाते।
रोगाणु-जीवाणु दूर भगाते॥

कीटाणुओं का करने नाश।
सजता तुझसे धरा-आकाश॥
सम्पूर्ण जगत की आत्मा।
बसा गए तुझ में परमात्मा॥

जीवन शक्ति तुम्हारे पास।
जीव-जंतु भी रखते आस॥
विविध रोग निवारण क्षमता।
कर नहीं सके कोई समता॥

सर्वविध सुखों के आधार।
प्रातः करें सब नमस्कार॥
‘प्रसाद’ भी सुबह नमन करे।
सूर्य किरणों से झोली भरे॥

~ राम प्रसाद शर्मा ‘प्रसाद’

सूरज बनके ‘उजाला’ करना है: Hindi Poem on Sun [2]

क्या हुआ अकेले हैं हम …
खुद को खुद का सहारा बनाना है।
मुझे दीपक की पंक्तियों में नहीं रहना,
सूरज बनके उजाला करना है।

भीड़ में रहना मुझे पसंद नहीं,
खोजी गई राहों पर नहीं चलना,
खुद नई राहों का गवाह बनना है।

मुझे दीपक की पंक्तियों में नहीं रहना …
सूरज बनके उजाला करना है।

नहीं चलना इशारों पर लोगों के,
जब दिल किया तब बुझा दिया,
इनका घमंड ही तो चूर-चूर करना है।

मुझे दीपक की पंक्तियों में नहीं रहना,
सूरज बनके उजाला करना है।

~ रमनदीप कौर

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