देशभक्ति पर कविताएँ: हिंदी साहित्य में देश प्रेम और राष्ट्रभक्ति की कविताओं ने स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर आज तक जन-मानस में राष्ट्रीय चेतना जगाने का अद्भुत कार्य किया है। यहाँ भारत के महान कवियों की सबसे प्रसिद्ध, ओजस्वी और प्रेरणादायक राष्ट्रभक्ति कविताओं का एक चुनिंदा संग्रह प्रस्तुत है:
देशभक्ति कविताओं की सूची:
- मेरा देश : राम प्रसाद शर्मा ‘प्रसाद’
- ‘भारत मां’ के बेटे : दीपक
देश के प्रति आस्था, अनुराग और कर्तव्यपरायणता ही नहीं, देश से अपेक्षाओं और समकालीन मोहभंग के इर्द-गिर्द देशभक्ति के विस्तृत अर्थों की पड़ताल करती कविताओं से एक चयन।
मेरा देश – देश प्रेम हिंदी कविता [01]
अरे, समृद्ध और सशक्त,
बने यह मेरा देश भारत।
संस्कृति इसकी प्राचीन-महान,
विश्व गाता है ऐसा गान।
मेरा देश है स्वाभिमानी,
समझो इसकी यही निशानी।
विश्वगुरु कहलाने वाला,
मेरा देश बड़ा निराला।
विश्व बन्धुता-पाठ पढ़ाता,
मानवता से जोड़े नाता।
इसके कण-कण में गौरव,
गाता यह तो राग भैरव।
शत-शत करें इसे प्रणाम,
‘देवधरा’ है इसका नाम।
अपनी भाषा इसे प्यारी,
गंगा-जल से सींचे क्यारी।
नव संदेश यह देने वाला,
हास मनोहर देने वाला।
‘रामराज्य’ की झलक दिखाता,
मेरा देश है मुझको भाता।
धर्मक्षेत्र कहलाने वाला,
गीता-पाठ पढ़ाने वाला।
रे, बन्धुता-विधान विमल,
कहें ‘प्रसाद’ न कोई दलदल।
~ राम प्रसाद शर्मा ‘प्रसाद’
‘भारत मां’ के बेटे – राष्ट्रभक्ति हिंदी कविता [02]
जब आजादी मांगती है एक सिर,
हम सिरों की जयमाला चढ़ाते हैं।
हम भारत मां के बेटे,
भारतीय कहलाते हैं।
तपती हुई राहों पर,
या खड़े हों फांसी के तख्तों पर,
बिन डरे ‘इंकलाब’ चिल्लाते हैं।
हम भारत मां के बेटे,
भारतीय कहलाते हैं।
कभी बुद्ध, कभी विवेकानंद
बन जाते हैं,
सारी दुनिया में ज्ञान बांट आते हैं,
यूं ही नहीं हम विश्वगुरु कहलाते हैं।
माना बंटे हैं कई टुकड़ों में,
मगर आपदा में एकजुट हो
जाते हैं।
हम भारत मां के बेटे,
भारतीय कहलाते हैं।
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