वर्षा ऋतु पर 10 कविताएँ: सावन / बरसा‍त / बारिश पर छोटी बड़ी बाल-कविताएं

वर्षा ऋतु पर 10 कविताएँ: सावन / बरसा‍त / बारिश पर छोटी बड़ी बाल-कविताएं

Poems on Rain in Hindi (वर्षा ऋतु पर 10 कवितायेँ): दोस्तों आज हम आपके साथ वर्षा ऋतु पर लिखी गई सर्वश्रेष्ठ कविताएं शेयर करने जा रहे है। Poems on Rain in Hindi बहुत ही अच्छे लेखकों द्वारा लिखी गई है। वर्षा ऋतु (Varsha Ritu) पर लिखी गई यह कविताएं सभी कक्षा और कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए वर्षा ऋतु पर कविता लिखने में सहायक होंगी।

List of top 10 rain poems for children

  1. बारिश – भारती संगोत्रा
  2. वर्षा का पहला गीत – डॉ. मुल्ला आदम अली

बारिश: बरसा‍त / बारिश पर हिंदी बाल-कविता [1]

बारिश पर हिंदी बाल-कविता
बारिश पर हिंदी बाल-कविता

आसमान से पानी गिरता है बूंदें बनकर,
इन बूंदों को ढूंढे किसान प्यासा बनकर,
कईयों के लिए ये बूंदें मजा होती हैं,
और कईयों के लिए ये बूंदें सजा होती हैं।

इन बूंदों का मजा मुझे बहुत आता है,
गर्मी में ये बारिश का पानी
हर एक दिल बहलाता है।

पर जब ये पानी घरों की छतों से,
टपककर घर के अंदर भर जाता है,
तब इन बूंदों से हर एक गरीब
का मन भर जाता है।

ये बारिश की बूंदें हर बार एक कहानी लाती हैं,
कोई कहानी जानी-पहचानी
और कोई अनजानी लाती हैं,
पर हर बार ये कहानी आसमान की जुबानी लाती हैं।

~ भारती संगोत्रा, जालंधर

वर्षा का पहला गीत भारतीय लोक संस्कृति और आदिवासी परंपराओं में प्रकृति के आगमन और उल्लास का प्रतीक है।
वर्षा का पहला गीत भारतीय लोक संस्कृति और आदिवासी परंपराओं में प्रकृति के आगमन और उल्लास का प्रतीक है।

वर्षा का पहला गीत: बरसा‍त / बारिश पर हिंदी बाल-कविता [2]

काले बादल जब घिर आए,
सूखे मन में सपने छाए।
धरती ने बाहें फैलाकर,
मेघों को मुस्काकर बुलाया।

पहली बूँद जो धरती चूमी,
मिट्टी ने सौंधी खुशबू घोली।
मन के सूने आँगन में भी,
आशा की कोंपल फिर से बोली।

नदियाँ गाने लगीं तराने,
झरने छेड़ें मधुर फ़साने।
मोर पंख फैलाकर नाचा,
वन ने नव जीवन को सांचा।

खेतों में हरियाली उतरी,
किसानों की आँखें भी निखरीं।
बीजों ने अंगड़ाई लेकर,
जीवन की नई राह सँवारी।

बच्चे दौड़े बारिश में हँसते,
कागज़ की नावें लेकर बहते।
हवा भी गुनगुन गीत सुनाए,
पेड़ खुशी से झूमते जाएँ।

वर्षा केवल पानी नहीं है,
धरती की मुस्कान यही है।
सूखे मन का नया भरोसा,
जीवन का सबसे मधुर झरोखा।

आओ जल का मान करें हम,
हर बूँद का सम्मान करें हम।
वर्षा का यह अमृत पाकर,
हरियाली का गान करें हम।

जब-जब मेघ गगन पर आएँ,
प्रेम और आशा बरसाएँ।
धरती फिर उत्सव बन जाएगी,
जीवन फिर से खिल जाएगा।

~ डॉ. मुल्ला आदम अली – तिरुपति, आंध्र प्रदेश

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