तनखा दे दो बाबूजी - Labour Day Hindi Poem

तनखा दे दो बाबूजी: मजदूर दिवस पर हिंदी कविता

अबके तनखा दे दो सारी बाबूजी
अब के रख लो बात हमारी बाबूजी

इक तो मार गरीबी की लाचारी है
उस पर टी.बी. की बीमारी बाबूजी

भूखे बच्चों का मुरझाया चेहरा देख
दिल पर चलती रोज़ कटारी बाबूजी

नूण-मिरच मिल जाएँ तो बडभाग हैं
हमने देखी ना तरकारी बाबूजी

दूधमुंहे बच्चे को रोता छोड़ हुई
घरवाली भगवान को प्यारी बाबूजी

आधा पेट काट ले जाता है बनिया
खाके आधा पेट गुजारी बाबूजी

पीढ़ी-पीढ़ी खप गयी ब्याज चुकाने में
फिर भी कायम रही उधारी बाबूजी

दिन-भर मेनत करके खांसें रात-भर
बीत रहा है पल-पल भारी बाबूजी

ना जीने की ताकत ना आती है मौत
जिंदगानी तलवार दुधारी बाबूजी

मजबूरी में हक भी डर के मांगे हैं
बने शौक से कौन भिखारी बाबूजी

पूरे पैसे दे दो पूरा खा लें आज
बच्चे मांग रहे त्यौहारी बाबूजी

~ कविता “किरण”

आपको कविता “किरण” की यह हिंदी कविता “तनखा दे दो बाबूजी” कैसी लगी – आप से अनुरोध है की अपने विचार comments के जरिये प्रस्तुत करें। अगर आप को यह कविता अच्छी लगी है तो Share या Like अवश्य करें।

यदि आपके पास Hindi / English में कोई poem, article, story या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें। हमारी Id है: submission@4to40.com. पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ publish करेंगे। धन्यवाद!

Check Also

Mom - A Shining Star - Mother's Day Special Poem

Mom A Shining Star: Mothers Day Special Poem

Mom A Shining Star: Mothers Day Special Poem – Mother’s Day, holiday in honour of …