हमारा तुम्हारा वतन एक है: वर्षा दीक्षित

हमारा तुम्हारा वतन एक है: वर्षा दीक्षित

भारत के प्राचीन और हिन्दू ग्रंथों में सिंधु नामक देश के बारे में उल्लेख मिलता है। इस सिंधु देश के बारे में ग्रंथों में विस्तार से लिखा हुआ है। सिंधु घाटी की सभ्यता का केंद्र स्थान है पाकिस्तान। इसी सभ्यता के दो नगर चर्चित है – मोहनजोदड़ो और हड़प्पा। यह सभ्यता बलूचिस्तान के हिंगलाज मंदिर से भारत के राजस्थान और हरियाणा (भिर्राना और राखीगढ़ी) तक फैली थी। पहले की खुदाई और शोध के आधार पर माना जाता था कि 2600 ईसा पूर्व अर्थात आज से 4617 वर्ष पूर्व हड़प्पा और मोहनजोदेडो नगर सभ्यता की स्थापना हुई थी। कुछ इतिहासकारों के अनुसार इस सभ्यता का काल लगभग 2700 ई.पू. से 1900 ई. पू. तक का माना जाता है। IIT खड़गपुर और भारतीय पुरातत्व विभाग के वैज्ञानिकों ने सिंधु घाटी सभ्यता की प्राचीनता को लेकर नए तथ्‍य सामने रखे हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक यह सभ्यता 5500 साल नहीं बल्कि 8000 साल पुरानी थी। इस लिहाज से यह सभ्यता मिस्र और मेसोपोटामिया की सभ्यता से भी पहले की है। मिस्र की सभ्यता 7,000 ईसा पूर्व से 3,000 ईसा पूर्व तक रहने के प्रमाण मिलते हैं, जबकि मोसोपोटामिया की सभ्यता 6500 ईसा पूर्व से 3100 ईसा पूर्व तक अस्तित्व में थी। शोधकर्ता ने इसके अलावा हड़प्पा सभ्यता से 1,0000 वर्ष पूर्व की सभ्यता के प्रमाण भी खोज निकाले हैं।

भारत-पाकिस्तान विभाजन की सबसे ज्यादा त्रासदी सिन्धी, पंजाबी और बंगालियों ने झेली। सिन्धी और पंजाबी हिन्दुओं ने तो अपना प्रांत ही खो दिया। क्या इस पर कभी किसी ने सोचा? सिन्धी भाषा और संस्कृति लुप्त हो रही है और जो सिन्धी मुसलमान है अब वे ऊर्दू बोलते हैं, जो उनकी मात्र भाषा नहीं है।

हमारा तुम्हारा वतन एक है: वर्षा दीक्षित

हमारा तुम्हारा वतन एक ही है,
साजन एक ही है, भजन एक ही है।

धरा का है बिछौना, दिशाओं का है घेरा,
वही रात-दिन का उजाला अँधेरा।
गगन एक ही है, पवन एक ही है,
हमारा तुम्हारा वतन एक ही है।

ये नदियां, ये पर्वत, शिखर, ऊंचे नीचे,
ये रेती, ये खेती, ये जंगल-बगीचे।
चमन रक ही है, अमन एक ही है,
हमारा तुम्हारा वतन एक ही है।

वही नौ महीने और कुछ दिन कहे हैं,
सभी अपने माँ के गर्भ में रहे हैं।
जन्म एक ही है मरण एक ही है,
हमारा तुम्हारा वतन एक ही है।

बताओ यहाँ फर्क क्या तुमने देखा,
खींची है कहाँ पर विभाजन की रेखा।
बदन एक ही है, वजन एक ही है,
हमारा तुम्हारा वतन एक ही है।

वर्षा दीक्षित

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