Tag Archives: Hindi Poems on Hinduism

दिवाली आई, दिवाली आई: हिंदी बाल-कविता

Diwali Festival Hindi Rhyme दिवाली आई, दिवाली आई

दिवाली आई, दिवाली आई: हिंदी बाल-कविता दिवाली आई, दिवाली आई, खुशियो की बहार लायी। धूम धमक धूम-धूम, चकरी, बम, हवाई इनसे बचना भाई। दिवाली आई, दिवाली आई, खुशियो की बहार लायी। पटाखे बाजे धूम-धूम, धूम-धूम। आओ मिलकर नाचे गए हम और तुम…। घर घर दीप जलेंगे, आएगी मिठाई। दिवाली आई, दिवाली आई, खुशियो की बहार लायी। धूम धमक धूम-धूम, चकरी, …

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दीप जलाओ दीप जलाओ आज दिवाली रे: कविता

Diwali Festival Hindi Bal Kavita दीप जलाओ दीप जलाओ आज दिवाली रे

दीप जलाओ दीप जलाओ आज दिवाली रे: दिवाली भारतीयों के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण त्योहार है और हमारे लिए लगभग कोई भी त्योहार आतिशबाजी के बिना पूरा नही माना जाता है। लोग पटाखों और आतिशबाजी को लेकर इतने उत्सुक होते हैं कि वह दिवाली के एक दिन पहले से ही पटाखे फोड़ना शुरु कर देते हैं और कई बार …

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दिवाली रोज़ मनाएं: दीपावली पर छोटी कविता

दिवाली रोज़ मनाएं - संदीप फाफरिया ‘सृजन’

दिवाली रोज़ मनाएं: भारत में यह त्योहार पांच दिनों तक मनाया जाता है। धनतेरस से भाई दूज तक यह त्योहार चलता है। धनतेरस के दिन व्यापार अपने बहीखाते नए बनाते हैं। अगले दिन नरक चौदस के दिन सूर्योदय से पूर्व स्नान करना अच्‍छा माना जाता है। अमावस्या के दिन लक्ष्मीजी की पूजा की जाती है। खील-बताशे का प्रसाद चढ़ाया जाता …

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करवा चौथ का चाँद: Karva Chauth Poem

Karva Chauth Festival Hindi Poem करवा चौथ का चाँद

करवा चौथ का चाँद: Karva Chauth Poem – ‘करवा चौथ‘ शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है, ‘करवा’ यानी ‘मिट्टी का बरतन’ और ‘चौथ’ यानि ‘चतुर्थी’। इस त्योहार पर मिट्टी के बरतन यानी करवे का विशेष महत्व माना गया है। सभी विवाहित स्त्रियां साल भर इस त्योहार का इंतजार करती हैं और इसकी सभी विधियों को बड़े श्रद्धा-भाव से पूरा …

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Navratri Aarti: Navratri Devotional Bhajans

Mahendra Kapoor Navratri Special Bhajan: Maa Jaya Aadhya Shakti

Navratri Aarti: Navratri Devotional Bhajans And Songs: India is a land of colorful and vibrant festivals. Out of the clutter of festivals, Navratri stands as a prominent occasion, celebrated by people across the length and breadth of the country. It is celebrated in different ways, though the reason is the same – to commemorate the victory of good over the …

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15 अगस्त 1947: सुमित्रानंदन पंत की कविता

15 अगस्त 1947 - सुमित्रानंदन पंत

15 अगस्त 1947 कविता: सुमित्रानंदन पंत (मई 20, 1900 – दिसंबर 28, 1977) हिंदी में छायावाद युग के चार प्रमुख स्तंभों में से एक हैं। उनका जन्म अल्मोड़ा ज़िले के कौसानी नामक ग्राम में मई 20, 1900 को हुआ। जन्म के छह घंटे बाद ही माँ को क्रूर मृत्यु ने छीन लिया। शिशु को उसकी दादी ने पाला पोसा। शिशु …

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हनुमान चालीसा: पवनपुत्र श्री हनुमान जी की सुन्दर स्तुति

हनुमान चालीसा: पवनपुत्र श्री हनुमान जी की सुन्दर स्तुति

हनुमान चालीसा गोस्वामी तुलसीदास की एक काव्यात्मक कृति है जिसमें प्रभु राम के महान भक्त हनुमान के गुणों एवं कार्यों का चालीस चौपाइयों में वर्णन है। यह अत्यन्त लघु रचना है जिसमें पवनपुत्र श्री हनुमान जी की सुन्दर स्तुति की गई है। इसमें बजरंग बली‍ की भावपूर्ण वंदना तो है ही, श्रीराम का व्यक्तित्व भी सरल शब्दों में उकेरा गया …

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Hanuman Chalisa: Forty chaupais on Hanuman

Hanuman Chalisa - Tulsidas

The Hanuman Chalisa (हनुमान चालीसा; literally Forty chaupais on Hanuman) is a Hindu devotional hymn (stotra) addressed to Hanuman. It is traditionally believed to have been authored by 16th-century poet Tulsidas in the Awadhi language, and is his best known text apart from the Ramcharitmanas. The word “chalisa” is derived from “chālīs”, which means the number forty in Hindi, as …

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शिवा-बावनी: कवि भूषण द्वारा शिवाजी की शौर्यगाथा

शिवा-बावनी: कवि भूषण द्वारा शिवाजी की शौर्यगाथा

शिवा बावनी भूषण द्वारा रचित बावन (52) छन्दों का काव्य है जिसमें छत्रपति शिवाजी महाराज के शौर्य, पराक्रम आदि का ओजपूर्ण वर्णन है। इसमें इस बात का वर्णन है कि किस प्रकार उन्होंने हिन्दू धर्म और राष्ट्र की रक्षा की। शिवा बावनी: महाकवि भूषण द्वारा छत्रपति शिवाजी महाराज के शौर्य, पराक्रम आदि का ओजपूर्ण वर्णन भूषण वैसे तो रीति काल …

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अहिल्याबाई होल्कर: महेश्वर की राजमाता

अहिल्याबाई होल्कर: महेश्वर की राजमाता

अहिल्याबाई होलकर (31 मई 1725 – 13 अगस्त 1795), मराठा साम्राज्य की प्रसिद्ध महारानी तथा इतिहास-प्रसिद्ध सूबेदार मल्हारराव होलकर के पुत्र खण्डेराव की धर्मपत्नी थीं। उन्होने माहेश्वर को राजधानी बनाकर शासन किया। अहिल्याबाई ने अपने राज्य की सीमाओं के बाहर भारत-भर के प्रसिद्ध तीर्थों और स्थानों में मन्दिर बनवाए, घाट बँधवाए, कुओं और बावड़ियों का निर्माण किया, मार्ग बनवाए-काशी विश्वनाथ …

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