Poems In Hindi

बच्चों की हिन्दी कविताएं — 4to40 का हिन्दी कविताओ का संग्रह | Hindi Poems for Kids — A collection of Hindi poems for children. पढ़िए कुछ मजेदार, चुलबुली, नन्ही और बड़ी हिंदी कविताएँ. इस संग्रह में आप को बच्चो और बड़ो के लिए ढेर सारी कविताएँ मिलेंगी.

सिरमौर (भारत-भारती से) – मैथिली शरण गुप्त

सिरमौर (भारत-भारती से) - मैथिली शरण गुप्त

हाँ, वृद्ध भारतवर्ष ही संसार का सिरमौर है ऐसा पुरातन देश कोई विश्व में क्या और है भगवान की भव–भूतियों का यह प्रथम भंडार है विधि ने किया नर–सृष्टि का पहले यहीं विस्तार है यह ठीक है पश्चिम बहुत ही कर रहा उत्कर्ष है पर पूर्व–गुरु उसका यही पुरु वृद्ध भारतवर्ष है जाकर विवेकानंद–सम कुछ साधु जन इस देश से …

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क्षुद्र की महिमा – श्यामनंदन किशोर

क्षुद्र की महिमा - श्यामनंदन किशोर

शुद्ध सोना क्यों बनाया, प्रभु मुझे तुमने, कुछ मिलावट चाहिये गलहार होने के लिये! जो मिला तुममें, भला क्या भिन्नता का स्वाद जाने, जो नियम में बँध गया, वह क्या भला अपवाद जाने, जो रहा समकक्ष, करुणा की मिली कब छाँह उसको, कुछ गितरावट चाहिये उद्धार होने के लिये। जो अजन्में हैं, उन्हें इस इंद्रधनुषी विश्व से संबंध ही क्या! …

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राही के शेर – बालस्वरूप राही

राही के शेर - बालस्वरूप राही

किस महूरत में दिन निकलता है, शाम तक सिर्फ हाथ मलता है। दोस्तों ने जिसे डुबोया हो, वो जरा देर में संभलता है। हमने बौनों की जेब में देखी, नाम जिस चीज़ का सफ़लता है। तन बदलती थी आत्मा पहले, आजकल तन उसे बदलता है। एक धागे का साथ देने को, मोम का रोम रोम जलता है। काम चाहे ज़ेहन …

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प्यार का नाता हमारा – विनोद तिवारी

प्यार का नाता हमारा - विनोद तिवारी

जिंदगी के मोड़ पर यह प्यार का नाता हमारा राह की वीरानियों को मिल गया आखिर सहारा ज्योत्सना सी स्निग्ध सुंदर, तुम गगन की तारिका सी पुष्पिकाओं से सजी, मधुमास की अभिसारिका सी रूप की साकार छवि, माधुर्य की स्वच्छन्द धारा प्यार का नाता हमारा, प्यार का नाता हमारा मैं तुम्हीं को खोजता हूँ, चाँद की परछाइयों में बाट तकता …

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पलायन संगीत – राजीव कृष्ण सक्सेना

पलायन संगीत - राजीव कृष्ण सक्सेना

अनगिनित लोग हैं कार्यशील इस जग में अनगिनित लोग चलते जीवन के मग में अनगिनित लोग नित जन्म नया पाते हैं अनगिनित लोग मर कर जग तर जाते हैं कुछ कर्मनिष्ठ जन कर्मलीन रहते हैं कुछ कर्महीन बस कर्महीन रहते हैं कुछ को जीवन में गहन मूल्य दिखता है कुछ तज कर्मों को मुक्त सहज बहते हैं इस महानाद में …

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बाकी रहा – राजगोपाल सिंह

बाकी रहा – राजगोपाल सिंह

कुछ न कुछ तो उसके – मेरे दरमियाँ बाकी रहा चोट तो भर ही गई लेकिन निशाँ बाकी रहा गाँव भर की धूप तो हँस कर उठा लेता था वो कट गया पीपल अगर तो क्या वहाँ बाकी रहा आग ने बस्ती जला डाली मगर हैरत है ये किस तरह बस्ती में मुखिया का मकाँ बाकी रहा खुश न हो …

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क्या तुम न आओगे – टी एन राज

क्या तुम न आओगे – टी एन राज

लो मेरी उम्र भी सठिया गई, क्या तुम न आओगे मेरे बालों में चांदी आ गई, क्या तुम न आओगे नज़र में मोतिया उतरा, हुआ हूं कान से बहरा तुम्हारी ही जवानी खा गई, क्या तुम न आओगे तुम्हारे मायके से आने वाली राह तक–तक कर मेरी तो आंख भी पथरा गई, क्या तुम न आओगे न बेलन ही बरसता …

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कभी नहीं – ओम व्यास ओम

कभी नहीं - ओम व्यास ओम

साले की बुराई शक्की को दवाई उधार–प्रेमी को अपने दोस्त से मिलाना पत्नी को अपनी असली इनकम बतलाना नवजात कुत्ते के बच्चे का सहलाना और पहलवान की बहन से इश्क लड़ाना कभी नहीं, कभी नहीं नाई से उधारी में दाढ़ी या फिर सैकिन्ड हैंड गाड़ी नानवेज होटल में वेजीटेरियन खाना नए – नए कवि को कविता सुनाना फँसे हुए आदमी …

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सोच के ये गगन झूमे – आनंद बक्शी

सोच के ये गगन झूमे - आनंद बक्शी

सोच के ये गगन झूमे अभी चाँद निकल आएगा झिलमिल चमकेंगे तारे चाँद जब निकल आएगा देखेगा न कोई गगन को चाँद को ही देखेंगे सारे चाँद जब निकल आएगा फूल जो खिले ना कैसे बागों में आए बहार दीप न जले तो साँवरिया कैसे मिटे अंधकार रात देखो कितनी है काली अभी चाँद निकल आएगा चाँदनी से भी तुम …

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चंदा से होगा वो प्यारा – राजेंद्र कृष्ण

चंदा से होगा वो प्यारा - राजेंद्र कृष्ण

चंदा से होगा वो प्यारा फूलों से होगा वो न्यारा नाचेगा आँगन में छम छम नन्हा सा मुन्ना हमारा! खिलती हो जैसे कली सी होगी जुबाँ तोतली सी पापा, ओ मामा, ओ बाबा “पकलेंगे हम चाँद ताला!” अब तक छुपा है वो ऐसे सीपी में मोती हो जैसे परियों की नगरी से चल कर आता ही होगा दुलारा! चंदा से …

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