The Dara Shikoh Festival, Srinagar, encourages vibrant dialogue, energetic workshops and experiments in theatre, music, photography, poetry and environment to celebrate the heritage of the Valley A villa set in the middle of 40 acres of almond, apple and pear orchards, the front facing the Dal Lake and the back, the vast Himalayas, becomes the focus of literary and creative …
Read More »Yearly Archives: 2015
माँ – मेरी माँ
पति के घर में प्रवेश करते ही पत्नी का गुस्सा फूट पड़ा: “पूरे दिन कहाँ रहे? आफिस में पता किया, वहाँ भी नहीं पहुँचे! मामला क्या है?” “वो-वो… मैं…” पति की हकलाहट पर झल्लाते हुए पत्नी फिर बरसी, “बोलते नही? कहां चले गये थे। ये गंन्दा बक्सा और कपड़ों की पोटली किसकी उठा लाये?” “वो मैं माँ को लाने गाँव चला गया …
Read More »अधूरी याद – राकेश खण्डेलवाल
चरखे का तकुआ और पूनी बरगद के नीचे की धूनी पत्तल, कुल्हड़ और सकोरा तेली का बजमारा छोरा पनघट, पायल और पनिहारी तुलसी का चौरा, फुलवारी पिछवाड़े का चाक, कुम्हारी छोटे लल्लू की महतारी ढोल नगाड़े, बजता तासा महका महका इक जनवासा धिन तिन करघा और जुलाहा जंगल को जाता चरवाहा रहट, खेत, चूल्हा और अंगा फसल कटे का वह …
Read More »अच्छा तो हम चलते हैं – आनंद बक्षी
अच्छा तो हम चलते हैं फिर कब मिलोगे? जब तुम कहोगे जुम्मे रात को हाँ हाँ आधी रात को कहाँ? वहीं जहाँ कोई आता-जाता नहीं अच्छा तो हम चलते हैं… किसी ने देखा तो नहीं तुम्हें आते नहीं मैं आयी हूँ छुपके छुपाके देर कर दी बड़ी, ज़रा देखो तो घड़ी उफ़्फ़ ओ, मेरी तो घड़ी बन्द है तेरी ये …
Read More »अच्छा नहीं लगता – संतोष यादव ‘अर्श’
ये उड़ती रेत का सूखा समाँ अच्छा नहीं लगता मुझे मेरे खुदा अब ये जहाँ अच्छा नहीं लगता। बहुत खुश था तेरे घर पे‚ बहुत दिन बाद आया था वहाँ से आ गया हूँ तो यहाँ अच्छा नहीं लगता। वो रो–रो के ये कहता है मुहल्ले भर के लोगों से यहाँ से तू गया है तो यहाँ अच्छा नहीं लगता। …
Read More »अच्छा लगा – रामदरश मिश्र
आज धरती पर झुका आकाश तो अच्छा लगा, सिर किये ऊँचा खड़ी है घास तो अच्छा लगा। आज फिर लौटा सलामत राम कोई अवध में, हो गया पूरा कड़ा बनवास तो अच्छा लगा। था पढ़ाया माँज कर बरतन घरों में रात दिन, हो गया बुधिया का बेटा पास तो अच्छा लगा। लोग यों तो रोज ही आते रहे, जाते रहे, …
Read More »अच्छा अनुभव – भवानी प्रसाद मिश्र
मेरे बहुत पास मृत्यु का सुवास देह पर उस का स्पर्श मधुर ही कहूँगा उस का स्वर कानों में भीतर मगर प्राणों में जीवन की लय तरंगित और उद्दाम किनारों में काम के बँधा प्रवाह नाम का एक दृश्य सुबह का एक दृश्य शाम का दोनों में क्षितिज पर सूरज की लाली दोनों में धरती पर छाया घनी और लम्बी …
Read More »चित्रकूट, सतना, मध्यप्रदेश
भगवान श्रीराम देवी सीता और अपने अनुज लक्ष्मण सहित जब वनवास के 14 वर्ष बिताने गए तो महर्षि वाल्मीकि ने भगवान राम को चित्रकूट में अपनी कुटिया बनाने की सलाह दी। चित्रकूट मध्यप्रदेश के सतना जिले में मंदाकिनी नदी के तट पर बसा है। चित्रकूट में बहने वाला झरना औसतन 95 फीट की ऊंचाई से गिरता है, तभी तो इसे …
Read More »1-on-1 tutoring can ease math anxiety in students
Parents, take note! One-on-one tutoring can relieve math anxiety in kids by fixing abnormal responses in the brain’s fear circuits, scientists, including those of Indian-origin, have found. The study is the first to document an effective treatment for math anxiety in children, researchers said. “The most exciting aspect of our findings is that cognitive tutoring not only improves performance, but …
Read More »कांच का खिलौना – आत्म प्रकाश शुक्ल
माटी का पलंग मिला राख का बिछौना। जिंदगी मिली कि जैसे कांच का खिलौना। एक ही दुकान में सजे हैं सब खिलौने। खोटे–खरे, भले–बुरे, सांवरे सलोने। कुछ दिन तक दिखे सभी सुंदर चमकीले। उड़े रंग, तिरे अंग, हो गये घिनौने। जैसे–जैसे बड़ा हुआ होता गया बौना। जिंदगी मिली कि जैसे कांच का खिलौना। मौन को अधर मिले अधरों को वाणी। …
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