अधूरी याद - राकेश खण्डेलवाल

अधूरी याद – राकेश खण्डेलवाल

चरखे का तकुआ और पूनी
बरगद के नीचे की धूनी
पत्तल, कुल्हड़ और सकोरा
तेली का बजमारा छोरा

पनघट, पायल और पनिहारी
तुलसी का चौरा, फुलवारी
पिछवाड़े का चाक, कुम्हारी
छोटे लल्लू की महतारी

ढोल नगाड़े, बजता तासा
महका महका इक जनवासा
धिन तिन करघा और जुलाहा
जंगल को जाता चरवाहा

रहट, खेत, चूल्हा और अंगा
फसल कटे का वह हुड़दंगा
हुक्का, पंचायत, चौपालें
झूले पड़ी नीम की डालें

बावन गजी घेर का लंहगा
मुंह बिचका दिखलाना ठेंगा
एक पोटली, लड़िया, छप्पर
माखन, दही टंगा छींके पर

नहर, कुआं, नदिया की धारा
कुटी नांद, बैलों का चारा
चाचा, ताऊ, मौसा, मामा
जय श्री कृष्णा, जय श्री रामा

मालिन, ग्वालिन, धोबिन, महरी
छत पर अलसाती दोपहरी

एक एक कर सहसा सब ही
संध्या के आंगन में आए
किया अजनबी जिन्हें समय ने
आज पुनः परिचित हो आए

वर्तमान ढल गया शून्य में
खुली सुनहरी पलक याद की
फिर से लगी महकने खुशबू
पूरनमासी कथा पाठ की

शीशे पर छिटकी किरणों की
चकाचौंध ने जिन्हें भुलाया
आज अचानक एकाकीपन में
वह याद बहुत हो आया

∼ राकेश खण्डेलवाल

Check Also

Dussehra Facebook Covers

Dussehra Facebook Covers: Vijayadashami Social Media Banners & Posters

Dussehra Facebook Covers: Dussehra, also known as Vijayadashami, is a major Indian festival celebrated on …