Yearly Archives: 2015

Girls spend 10 hours daily on cellphone

Girls spend 10 hours daily on cellphone

Women college students spend an average of 10 hours a day on their cellphones and male college students spend nearly eight, reveals new research from a US university. “That is astounding,” said lead study author James Roberts, professor at Baylor University in Texas, US. The findings suggest that excessive cellphone use poses potential risks for academic performance. “As cellphone functions …

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यदि – ओम प्रकाश बजाज

यदि - ओम प्रकाश बजाज

सोचो ज़रा यदि सूरज दादा किसी दिन ड्यूटी पर न आते। बहाना बना कर तुम्हारी तरह वह भी छुट्टी मनाते। दिन में भी अन्धेरा छा जाता हाथ को हाथ सुझाई न देता। संसार के सारे काम रुक जाते समय का भी तो भान न होता। अपनी ड्यूटी के पक्के सारे सूरज चाँद और तारे। इनसे सीखो तुम भी निभाना नियमपूर्वक …

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उफ़ यह प्यास – ओम प्रकाश बजाज

उफ़ यह प्यास - ओम प्रकाश बजाज

भीषड़ गर्मी के इस मौसम में बार – बार लगती है प्यास, चाहे कितना पी लें पानी नहीं बुझती है प्यास, गला सूख-सूख जाता है जितना भी तर करते हैं, लस्सी – शर्बत – आम का पन्ना चाहे जितना पीते हैं, जलजीरा और सत्तू का भी बहुत लोग सेवन करते हैं, कुल्फी – आइसक्रीम – बर्फ का गोला बच्चे अधिक …

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तकिया (पिलो) – ओम प्रकाश बजाज

तकिया (पिलो) - ओम प्रकाश बजाज

बिस्तर का हिस्सा है तकिया, सिरहाना भी कहलाता तकिया। अपना-अपना तकिया लेना, उस पर गिलाफ अवश्य चढ़ाना। मैले तकिये पर न सोना, नियम से उसका खोल धुलवाना। बहुत ऊंचा तकिया न लेना, पिल्लो-फाइट भी न करना। पीठ टिकाने के काम आता, गाव तकिया वह कहलाता। अच्छे-अच्छे शेर और स्वीट ड्रीम्स, गिलाफों पर काढ़े जाते थे। मेहमानों के बिस्तर में पहले, …

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रोबोट्स की अनूठी प्रदर्शनी

ROBOTS Exhibition

हमारे जीवन में रोबोट्स का अस्तित्व अब कोई दूर का ख्वाब नहीं है। इन दिनों उत्तरी आयरलैंड के बेलफ़ास्ट शहर में टाइटैनिक बेलफ़ास्ट में लगी वार्षिक ग्रीष्म प्रदर्शनी में 50 रोबोट्स प्रदर्शित किए गए है। 15 सितम्बर तक चलने वाली इस प्रदर्शनी में दिखाए जा रहे ये रोबोट स्कॉटलैंड के म्यूजियम ऑफ मूवी मैजिक के है।  इस संग्रह में पर्सनल …

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अपनापन – बुद्धिसेन शर्मा

अपनापन – बुद्धिसेन शर्मा

चिलचिलाती धूप में सावन कहाँ से आ गया आप की आँखों में अपनापन कहाँ से आ गया। जब वो रोया फूट कर मोती बरसने लग गये पास एक निर्धन के इतना धन कहाँ से आ गया। दूसरों के ऐब गिनवाने का जिसको शौक था आज उसके हाथ में दरपन कहाँ से आ गया। मैं कभी गुज़रा नहीं दुनियाँ तेरे बाज़ार …

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अँधेरी रात में दीपक जलाये कौन बैठा है – हरिवंश राय बच्चन

अँधेरी रात में दीपक जलाये कौन बैठा है – हरिवंश राय बच्चन

अँधेरी रात में दीपक जलाये कौन बैठा है? उठी ऐसी घटा नभ में छिपे सब चाँद और तारे, उठा तूफ़ान वह नभ में गए बुझ दीप भी सारे, मगर इस रात में भी लौ लगाये कौन बैठा है? अँधेरी रात में दीपक जलाये कौन बैठा है? … गगन में गर्व से उठ उठ गगन में गर्व से घिर घिर, गरज …

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अंतहीन यात्री – धर्मवीर भारती

अंतहीन यात्री - धर्मवीर भारती

विदा देती एक दुबली बाँह-सी यह मेड़ अंधेरे में छूटते चुपचाप बूढ़े पेड़ ख़त्म होने को ना आएगी कभी क्या एक उजड़ी माँग-सी यह धूल धूसर राह? एक दिन क्या मुझी को पी जाएगी यह सफ़र की प्यास, अबुझ, अथाह? क्या यही सब साथ मेरे जाएँगे ऊँघते कस्बे, पुराने पुल? पाँव में लिपटी हुई यह धनुष-सी दुहरी नदी बींध देगी …

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