रविन्द्रनाथ टैगोर की लोकप्रिय कविताओं का हिंदी अनुवाद

रवीन्द्रनाथ टैगोर की लोकप्रिय कविताओं का हिंदी अनुवाद

करता जो प्रीत: रवीन्द्रनाथ ठाकुर – रवीन्द्रनाथ टैगोर लोकप्रिय कविता

दिन पर दिन चले गए,पथ के किनारे
गीतों पर गीत,अरे, रहता पसारे।।
बीतती नहीं बेला, सुर मैं उठाता।
जोड़-जोड़ सपनों से उनको मैं गाता।।
दिन पर दिन जाते मैं बैठा एकाकी।
जोह रहा बाट, अभी मिलना तो बाकी।।
चाहो क्या,रुकूँ नहीं, रहूँ सदा गाता।
करता जो प्रीत, अरे, व्यथा वही पाता।।

मूल बांगला से अनुवाद: प्रयाग शुक्ल

आए फिर,लौट गए, आए – रवीन्द्रनाथ ठाकुर

उड़ती है धूल, कहती: “थे आए,
चैतरात,लौट गए, बिना कुछ बताए।”
आए फिर, लगा यही, बैठा एकाकी।
वन-वन में तैर रही तेरी ही झाँकी।।
नए-नए किसलय ये, लिए लय पुरानी,
इसमें तेरी सुगंध, पैठी, समानी।।
उभरे तेरे आखर, पड़े तुम दिखाई।
हाँ,हाँ, वह उभरी थी तेरी परछाईं।।
डोला माधवी-कुंज,तड़पन के साथ।
लगा यही छू लेगा, तुम्हें बढ़ा हाथ।।

मूल बांगला से अनुवाद: प्रयाग शुक्ल

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