Tag Archives: Desire Hindi Poems

कबीर के दोहे: Couplets of Kabir Das

Famous Kabir Das Ke Dohe कबीर के दोहे

Name Kabir Das / कबीर दास Born लगभग (1398 या 1440) लहरतारा, निकट वाराणसी Died लगभग (1448 या 1518) मगहर Occupation कवि, भक्त, सूत कातकर कपड़ा बनाना Nationality भारतीय कबीरदास भारत के महानतम कवी थे, इन्होने जीवन और उसके भीतर भावनाओ को अहम् बताया और मनुष्य को मार्गदर्शन दिया। इनके काव्य में कहीं भी धर्म का विषय नहीं था, ये …

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वीर शिवाजी: छत्रपति शिवाजी पर वीर रस कविता

वीर शिवाजी: छत्रपति शिवाजी पर वीर रस कविता

वीर शिवाजी भोसले का जन्म 19 फरवरी 1630 को महाराष्ट्र के शिवनेरी दुर्ग में हुआ था। उनके पिता शाहजी भोसले सेनापति थे और उनकी माता जीजाबाई एक धार्मिक महिला थीं। मां से ही शिवाजी को धर्म और आध्यात्म की शिक्षा मिली थी। वीर शिवाजी बचपन से ही सामंती प्रथा के खिलाफ थे और मुगल शासकों द्वारा प्रजा के प्रति क्रूर …

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शिवा-बावनी: कवि भूषण द्वारा शिवाजी की शौर्यगाथा

शिवा-बावनी: कवि भूषण द्वारा शिवाजी की शौर्यगाथा

शिवा-बावनी: कवि भूषण द्वारा शिवाजी की शौर्यगाथा – कवि भूषण वैसे तो रीति काल के कवि थे लेकिन उस दौर में उनकी कलम वीर रस से सराबोर थी। माना जाता है कि भूषण कई राजाओं के यहां रहे और वहां सम्मान प्राप्त किया। पन्ना के महाराज छत्रसाल के यहाँ इनका बड़ा मान हुआ। भूषण ने प्रमुख रूप से शिवाजी और …

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चंद्रशेखर आजाद पर हिंदी कविता

चंद्रशेखर आजाद पर हिंदी कविता

चंद्रशेखर आजाद: सुशील कुमार शर्मा की हिंदी कविता तुम आजाद थे, आजाद हो, आजाद रहोगे, भारत की जवानियों के तुम खून में बहोगे। मौत से आंखें मिलाकर वह बात करता था, अंगदी व्यक्तित्व पर जमाना नाज करता था। असहयोग आंदोलन का वो प्रणेता था, भारत की स्वतंत्रता का वो चितेरा था। बापू से था प्रभावित, पर रास्ता अलग था, खौलता …

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खण्डकाव्य चंद्रशेखर आजाद कुछ चुनिंदा अंश: श्रीकृष्ण सरल

खण्डकाव्य चंद्रशेखर आजाद कुछ चुनिंदा अंश: श्रीकृष्ण सरल

श्रीकृष्ण सरल उन भारतीय कवियों और लेखकों में से एक हैं जिन्होंने भारतीय क्रांतिकारियों पर अनेक पुस्तकें लिखीं, जिनमें पन्द्रह महाकाव्य हैं। सरल जी ने अपना सम्पूर्ण लेखन भारतीय क्रांतिकारियों पर ही किया है। उन्होंने लेखन में कई विश्व कीर्तिमान स्थापित किए हैं। सर्वाधिक क्रांति-लेखन और सर्वाधिक महाकाव्य (पन्द्रह) लिखने का श्रेय सरलजी को ही जाता है। 1 जनवरी 1919 …

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राह कौन सी जाऊं मैं: अटल जी की चिंतन पर कविता

राह कौन सी जाऊं मैं: अटल जी की चिंतन पर कविता

There are dilemmas in life at every step. What to do? Which alternative to choose? And there are no authentic and correct answers. We must nonetheless make a choice. राह कौन सी जाऊं मैं: अटल बिहारी वाजपेयी चौराहे पर लुटता चीर‚ प्यादे से पिट गया वजीर‚ चलूं आखिरी चाल कि बाजी छोड़ विरक्ति रचाऊं मैं‚ राह कौन सी जाऊं मैं? …

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एक बरस बीत गया: अटल जी की नए साल पर कविता

एक बरस बीत गया - अटल बिहारी वाजपेयी

Another lovely poem by Atal Ji. One more year has passed by and one can just observe and feel inside the emptiness of this uninterrupted yet repetitive stream of passage of time… एक बरस बीत गया: अटल बिहारी वाजपेयी झुलसाता जेठ मास शरद चांदनी उदास सिसकी भरते सावन का अन्तर्घट रीत गया एक बरस बीत गया। सींकचों में सिमटा जग …

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श्वेत कबूतर: अचानक मिलने वाली खुशी पर कविता

श्वेत कबूतर: वीरबाला भावसार

श्वेत कबूतर कविता: It happens some times. We get suddenly and without expecting, some thing that we had longed for a long long time. Heart is thrilled, and it sings, and dances! Coming of a white pigeon is a metaphor of such a rare thrill. श्वेत कबूतर कविता: डॉ. वीरबाला मेरे आंगन श्वेत कबूतर! उड़ आया ऊंची मुंडेर से, मेरे …

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मजबूर भारतीय प्रवासी पर हिंदी कविता: विवशता

Nostalgia Hindi Poem on Helplessness विवशता

जो लोग भारत छोड़कर विश्व के दूसरे देशों में जा बसे हैं उन्हे प्रवासी भारतीय कहते हैं । ये विश्व के अनेक देशों में फैले हुए हैं। 48 देशों में रह रहे प्रवासियों की जनसंख्या करीब 2 करोड़ है। इनमें से 11 देशों में 5 लाख से ज्यादा प्रवासी भारतीय वहां की औसत जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करते हैं और वहां …

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लक्ष्य: योगी सारस्वत – हौसला बढ़ाने वाली प्रेरक कविता

लक्ष्य: योगी सारस्वत - हौसला बढ़ाने वाली प्रेरक कविता

डॉ. कलाम कहते थे – जिंदगी बदलनी है तो बड़े लक्ष्य रखो, छोटे लक्ष्य तो अपराध हैं लक्ष्य: योगी सारस्वत लक्ष्य हमेशा बड़े रखो, लक्ष्य पर हमेशा चले-चलो। संभव है इसमें बाधाएं भी आएं, पर बाधाओं से लड़ते चलो॥ लक्ष्य हमेशा बड़े रखो॥ कोई गरीब है तो कोई अमीर, पर सबकी अपनी-अपनी तकदीर। हर मंजिल तुमको अपनी मिल जायेगी, गर …

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