प्रभुदयाल श्रीवास्तव की प्रसिद्ध बाल-कविताएँ

प्रभुदयाल श्रीवास्तव की प्रसिद्ध बाल-कविताएँ

पानी बनकर आऊँ: प्रभुदयाल श्रीवास्तव की बाल-कविता [7]

गरमी के मारे मुझको तो,
रात नींद ना आई।
बादल से धरती ने पूछा,
कब बरसोगे भाई।

बादल बोला पास नहीं है,
बदली पानी वाली।
ईंधन की गरमी से मैं हूँ,
बिलकुल खाली खाली।

पर्यावरण प्रदूषण इतना,
रात घुटन में बीती।
पता नहीं कब दे पाऊँ जल,
प्यारी धरती दीदी।

अगर प्रदूषण कम करवा दो,
शायद कुछ कर पाऊँ।
हरे घाव में मलहम सा मैं,
पानी बनकर आऊ।

~ प्रभुदयाल श्रीवास्तव

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