प्रभुदयाल श्रीवास्तव की प्रसिद्ध बाल-कविताएँ

प्रभुदयाल श्रीवास्तव की प्रसिद्ध बाल-कविताएँ

जीत के परचम: प्रभुदयाल श्रीवास्तव की बाल-कविता [10]

मन को लुभा रहे हैं,
ये फूल गुलमोहर के।

ये लाल-लाल लुच-लुच
डालों पे डोलते हैं।

कुछ ध्यान से सुनों तो,
शायद ये बोलते हैं।

अब लोग देखते हैं,
इनको ठहर-ठहर के।

चुन्ना ने एक अंगुली,
उस और है उठाई।

देखा जो गुलमोहर तो,
चिन्नी भी खिलखिलाई।

मस्ती में फूल झूमे,
नीचे बिखर बिखर के।

हँसते हैं मुस्कुराते,
ये सूर्य को चिढ़ाते।

आनंद का अंगूठा,
ये धूप को दिखाते।

हैं जीत के ये परचम,
उड़ते फहर फहर के।

~ प्रभुदयाल श्रीवास्तव

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