नफ़रत की लाठी तोड़ो, लालच का खंजर फेंको, ज़िद के पीछे मत दौड़ो, तुम प्रेम के पंछी हो, देश प्रेमियों, आपस में प्रेम करो देश प्रेमियों… देखो, ये धरती, हम सब की माता है, सोचो, आपस में, क्या अपना नाता है, हम आपस में लड़ बैठे, हम आपस में लड़ बैठे तो देश को कौन सम्भालेगा, कोई बाहर वाला अपने …
Read More »आराम करो: गोपाल प्रसाद व्यास
एक मित्र मिले‚ बोले‚ “लाला तुम किस चक्की का खाते हो? इस डेढ़ छटांक के राशन में भी तोंद बढ़ाए जाते हो। क्या रक्खा है मांस बढ़ाने में‚ मनहूस‚ अकल से काम करो। संक्रान्ति–काल की बेला है‚ मर मिटो‚ जगत में नाम करो।” हम बोले‚ “रहने दो लैक्चर‚ पुरुषों को मत बदनाम करो इस दौड़–धूप में क्या रक्खा‚ आराम करो‚ …
Read More »खूनी हस्ताक्षर: गोपाल प्रसाद व्यास
Neta Ji Subhas Chandra Bose organized the Indian National Army in early 1940s to fight the foreign occupation of the country. He promised freedom for the country but demanded full dedication of the people to this end. I am thankful to an unnamed reader who sent me a scanned copy of this lovely poem. This is a remarkable poem that …
Read More »नेताजी का तुलादान: गोपाल प्रसाद व्यास
देखा पूरब में आज सुबह, एक नई रोशनी फूटी थी। एक नई किरन, ले नया संदेशा, अग्निबान-सी छूटी थी॥ एक नई हवा ले नया राग, कुछ गुन-गुन करती आती थी। आज़ाद परिन्दों की टोली, एक नई दिशा में जाती थी॥ एक नई कली चटकी इस दिन, रौनक उपवन में आई थी। एक नया जोश, एक नई ताज़गी, हर चेहरे पर …
Read More »राष्ट्रगान मुझको भी आता है: मनोहर लाल ‘रत्नम’
जन गण मन बीमार पड़ा है, अधिनायक है कहाँ सो गया, भारत भाग्य विधाता भी तो, इन गलियों में कहीं खो गया। मेरे भारत के मस्तक पर, है आतंक की काली छाया – कर्णधार जितने भारत के, इन सबको है संसद भाता। मुझसे यदि पूछ कर देखो, राष्ट्रगान मुझको है आता॥ आग लगी है पंजाब मेरे में, सिंधु और गुजरात …
Read More »ऐ मेरे प्यारे वतन, ऐ मेरे बिछड़े चमन: सलिल चौधरी
ऐ मेरे प्यारे वतन, ऐ मेरे बिछड़े चमन, तुझ पे दिल कुर्बान तू ही मेरी आरजू, तू ही मेरी आबरू, तू ही मेरी जान तेरे दामन से जो आये उन हवाओं को सलाम चूम लूँ मैं उस ज़ुबां को जिसपे आये तेरा नाम सब से प्यारी सुबह तेरी, सब से रंगीं तेरी शाम माँ का दिल बनके कभी सीने से …
Read More »इस मोड़ से जाते हैं: गुलज़ार
इस मोड़ से जाते हैं कुछ सुस्त कदम रस्ते कुछ तेज कदम राहें। पत्थर की हवेली को शीशे के घरौंदों में तिनकों के नशेमन तक इस मोड़ से जाते हैं। आंधी की तरह उड़ कर इक राह गुजरती है शरमाती हुई कोई कदमों से उतरती है। इन रेशमी राहों में इक राह तो वह होगी तुम तक जो पहुंचती है …
Read More »हम को मन की शक्ति देना: गुलज़ार
हम को मन की शक्ति देना मन विजय करें, दूसरों की जय से पहले खुद की जय करें। भेदभाव अपने दिल से साफ कर सकें, दोस्तों से भूल हो तो माफ कर सकें, झूठ से बचे रहें सच का दम भरें, दूसरों की जय से पहले खुद की जय करें। मुश्किलें पड़ें तो हम पे इतना कर्म कर, साथ दें …
Read More »पगली लड़की: कुमार विश्वास
मावस कि काली रातों में, दिल का दरवाज़ा खुलता है जब दर्द कि प्याली रातों में, ग़म आँसू के संग घुलता है जब पिछवाड़े के कमरे में, हम निपट अकेले होते हैं जब घड़ियाँ टिक-टिक चलती हैं, सब सोते हैं, हम रोते हैं जब बार-बार दोहराने से, सारी यादें चुक जाती हैं जब ऊँच-नीच समझाने में, माथे की नस दुख …
Read More »जिसकी धुन पर दुनिया नाचे: कुमार विश्वास
जिसकी धुन पर दुनिया नाचे, दिल ऐसा इकतारा है, जो हमको भी प्यारा है और, जो तुमको भी प्यारा है, झूम रही है सारी दुनिया, जबकि हमारे गीतों पर, तब कहती हो प्यार हुआ है, क्या अहसान तुम्हारा है। जो धरती से अम्बर जोड़े, उसका नाम मोहब्बत है, जो शीशे से पत्थर तोड़े, उसका नाम मोहब्बत है, कतरा कतरा सागर …
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