आज कलम का कागज से मैं दंगा करने वाला हूँ, मीडिया की सच्चाई को मै नंगा करने वाला हूँ। मीडिया जिसको लोकतंत्र का चौंथा खंभा होना था, खबरों की पावनता में जिसको गंगा होना था। आज वही दिखता है हमको वैश्या के किरदारों में, बिकने को तैयार खड़ा है गली चौक बाजारों में। दाल में काला होता है तुम काली …
Read More »स्कूल मैगज़ीन से ली गयी बाल-कविताएँ
अलगाव में लगाव: सुजाता भट्टाचार्या एक थे बापू, एक थे नेताजी ‘सुभाष’ विचारों ने जिनके हलचल मचा दी। एक ने कहा ‘अहिंसा’ परमोधर्म, दूजा बोला स्वराज पाकर लेंगे दम।। एक करता आंदोलन सारी, दूजा बनता फौज भारी। दोनों ने देखा एक ही सपना, पर ढंग था, दोनों का अपना-अपना।। मंजिल एक, रास्ते अलग, ना रुके पहुँचे फलक। बापू बोले तुम …
Read More »बाल-कविताओं का संग्रह: ओमप्रकाश बजाज (भाग 2)
खिचड़ी: ओमप्रकाश बजाज चावल-दाल मिला कर बनती, खिचड़ी घर में सब को भाती। रोगी को डॉक्टर खाने को कहते, हल्की गिजा वे इसे मानते। घी और मसालों का छौंक लगा कर, छोटे-बड़े सब शौक से खाते। बीरबल की खिचड़ी पकाना कहलाती, जब किसी काम में अधिक देर हो जाती। घी खिचड़ी में ही तो रहा, तब कहा जाता, जब घर …
Read More »आरक्षण की तलवार: आरक्षण के मुद्दे पर हिंदी कविता
आरक्षण एक ऐसा शब्द है, जिसका नाम हर दूसरे व्यक्ति के मुह पर है, अर्थात् आरक्षण भारत मे, बहुत चर्चा मे है। वैसे तो हम, इक्कीसवी सदी मे जी रहे है और अब तक आरक्षण कि ही, लड़ाई लड़ रहे है। युवाओ और देश के नेताओ के लिये, आज की तारीख मे सबसे अहम सवाल यह है कि, आरक्षण किस …
Read More »बोलो राम जय जय राम: जगजीत सिंह (भगवान राम भजन Video)
बोलो राम जय जय राम, जन्म सफल होगा बन्दे, मन में राम बसा ले, हे राम नाम के मोती को, सांसो की माला बना ले, राम पतित पवन करुनाकर, और सदा सुख दाता, सरस सुहावन अति मनभावन, राम से प्रीत लगा ले, मन में राम बसा ले, मोह माया है झूटा बन्धन, त्याग उसे तू प्राणी, राम नाम की ज्योत …
Read More »भई भाषण दो: गोपाल प्रसाद व्यास – भारतीय राजनीति पर व्यंग्य पूर्ण हिंदी कविता
यदि दर्द पेट में होता हो या नन्हा–मुन्ना रोता हो या आंखों की बीमारी हो अथवा चढ़ रही तिजारी हो तो नहीं डाक्टरों पर जाओ वैद्यों से अरे न टकराओ है सब रोगों की एक दवा भई, भाषण दो, भई, भाषण दो हर गली, सड़क, चौराहे पर भाषण की गंगा बहती है, हर समझदार नर–नारी के कानों में कहती रहती …
Read More »हो हल्ला है होली है: प्रभुदयाल श्रीवास्तव – होली विशेष हिंदी बाल-कविता
उड़े रंगों के गुब्बारे हैं, घर आ धमके हुरयारे हैं। मस्तानों की टोली है, हो हल्ला है, होली है। मुंह बन्दर सा लाल किसी का, रंगा गुलाबी भाल किसी का। कोयल जैसे काले रंग का, पड़ा दिखाई गाल किसी का। काना फूसी कुछ लोगों में, खाई भांग की गोली है। ढोल ढमाका ढम ढम ढम ढम, नाचे कूदे फूल गया …
Read More »होली आई रे होली आई रे: होली के त्यौहार पर बाल-कवितायेँ
होली आई रे बसंत में हर कली मुस्कुराई, फागुन की मस्ती चंहुओर है छाई, मदभरा रंगीं नजारा हर कहीं नजर आता है, सुनहरा रंग फिजाओं में पसर जाता है, चंग की ढाप चौक-चौराहों में गूंज रही है, फागणियों को फाग गाने की सूझ रही है, लोग-लुगाई होली की मस्ती में सराबोर हैं, हर तरफ होली आई रे होली आई रे …
Read More »बाल-कविताओं का संग्रह: ओमप्रकाश बजाज
सात बहनें: ओमप्रकाश बजाज भारत के पर्वोत्तर में 7 राज्य हैं जो ‘सात बहनें’ कहे जाते हैं। इनके नाम अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, त्रिपुरा, मिजोरम कहलाते हैं। अरुणाचल कहलाता है उगते सूर्य का पर्वत और ईटागर है इसकी राजधानी। दिसपुर है असम की राजधानी, मेघालय की राजधानी शिलांग है, कोहिमा नागालैंड की और इंफाल मणिपुर की राजधानी है। …
Read More »बच्चों तुम तकदीर हो कल के हिंदुस्तान की: साहिर लुधियानवी
बच्चों तुम तकदीर हो कल के हिंदुस्तान की बापू के वरदान की, नेहरु के अरमान की। आज के टूटे खँडहरों पर तुम कल का देश बसाओगे जो हम लोगों से न हुआ वो तुम कर के दिखलाओगे तुम नन्हीं बुनियादें हो दुनिया के नए विधान की। दीन-धरम के नाम पे कोई बीज फूट का बोए ना जो सदियों के बाद …
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