Poems For Kids

Poetry for children: Our large assortment of poems for children include evergreen classics as well as new poems on a variety of themes. You will find original juvenile poetry about trees, animals, parties, school, friendship and many more subjects. We have short poems, long poems, funny poems, inspirational poems, poems about environment, poems you can recite

हम भी वापस जायेंगे – अभिनव शुक्ला

आबादी से दूर, घने सन्नाटे में, निर्जन वन के पीछे वाली, ऊँची एक पहाड़ी पर, एक सुनहरी सी गौरैया, अपने पंखों को फैलाकर, गुमसुम बैठी सोंच रही थी, कल फिर मैं उड़ जाऊँगी, पार करुँगी इस जंगल को, वहां दूर जो महके जल की, शीतल एक तलैया है, उसका थोड़ा पानी पीकर, पश्चिम को मुड़ जाऊँगी, फिर वापस ना आऊँगी, …

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कनुप्रिया (इतिहास: शब्द – अर्थहीन) – धर्मवीर भारती

पर इस सार्थकता को तुम मुझे कैसे समझाओगे कनु ? शब्द, शब्द, शब्द…… मेरे लिए सब अर्थहीन हैं यदि वे मेरे पास बैठकर मेरे रूखे कुन्तलों में उँगलियाँ उलझाए हुए तुम्हारे काँपते अधरों से नहीं निकलते शब्द, शब्द, शब्द…… कर्म, स्वधर्म, निर्णय, दायित्व…… मैंने भी गली-गली सुने हैं ये शब्द अर्जुन ने चाहे इनमें कुछ भी पाया हो मैं इन्हें …

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बच्चों की रेल

बच्चों की यह रेल है, बड़ा अनोखा खेल है। यह कोयला नहीं खाती है , इसे मिठाई भाती है। यह नहीं छोड़ती धुआं, मुड़ जाती देख कर कुआँ। चलते-चलते जाती रुक, छुक-छुक, छुक-छुक, छुक-छुक, छुक-छुक।

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जन्म दिन मुबारक हो – मूलचंद गुप्ता

जन्म दिन मुबारक हो, मुबारक हो जन्मदिन। आपके जीवन में, बार – बार आये यह दिन॥ दुनिया का मालिक, आपको बख्शे अच्छी सेहत। खुशियाँ ही खुशियाँ, बरसाती रहे उसकी नेमत॥ माना आइना नहीं जाता मेघ मल्हार, बुजुर्गों के किये। फिर भी बहुत कुछ हो सकता है बुजुर्गों के लिए॥ शारीरिक शक्ति, अगर कुछ कम हो भी गयी तो क्या है? …

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जीवन दीप – विनोद तिवारी

मेरा एक दीप जलता है। अंधियारों में प्रखर प्रज्ज्वलित, तूफानों में अचल, अविचलित, यह दीपक अविजित, अपराजित। मेरे मन का ज्योतिपुंज जो जग को ज्योतिर्मय करता है। मेरा एक दीप जलता है। सूर्य किरण जल की बून्दों से छन कर इन्द्रधनुष बन जाती, वही किरण धरती पर कितने रंग बिरंगे फूल खिलाती। ये कितनी विभिन्न घटनायें, पर दोनों में निहित …

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जय हिन्द – महजबीं

देखो बच्चों यह झंडा प्यारा, तीन रंगों का मेल सारा। रहे सदा ये झंडा ऊँचा आकाश को रहे यह छूता। सदा करो तुम इसका मान, कभी न करना इसका अपमान। झंडा है यह देश की शान, बना रहे यह सदा महान। जय हिन्द ! ∼ महजबीं

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जीवन – सारिका अग्रवाल

संभलकर रखना इस जीवन में कदम, कौन करेगा तुम्हारी कदर, सागर से विशाल आसमान यहाँ, अनगिनत सितारे यहाँ, इंसानों के रंग हज़ार यहाँ कौन समझेगा तुमको यहाँ, कौन खरीदेगा तुम्हारे आंसू यहाँ, संभलकर रखना इस जीवन में कदम। ∼ सारिका अग्रवाल

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जेब में कुछ नहीं है – अभिनव शुक्ला

एक बार एक प्रेमी अपनी रूप से लथपथ मेकअप से सनी हुयी और नाजुक फूलों के डंठलों से बानी हुई प्रेमिका से बोला पुराने शहर की पुरानी गली में पुराना सा एक दरवाजा लगा है जहाँ छत टपकती है बरसात भर मेरा घर वहीँ है। प्रेमिका दूर हटते हुए बोली पहले क्यों नहीं बताया कि रेशम की कमीज जेब में …

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जो हवा में है – उमाशंकर तिवारी

जो हवा में है, लहर में है क्यों नहीं वह बात, मुझमें है? शाम कन्धों पर लिए अपने ज़िन्दगी के रू-ब-रू चलना रोशनी का हमसफ़र होना उम्र की कैंडिल का जलना आग जो जलते सफ़र में है क्यों नहीं वह बात, मुझमें है? रोज़ सूरज की तरह उगना शिखर पर चढ़ना, उतर जाना घाटियों में रंग भर जाना फिर सुरंगों से गुज़र जाना …

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