Yearly Archives: 2015

कांच का खिलौना – आत्म प्रकाश शुक्ल

माटी का पलंग मिला राख का बिछौना। जिंदगी मिली कि जैसे कांच का खिलौना। एक ही दुकान में सजे हैं सब खिलौने। खोटे–खरे, भले–बुरे, सांवरे सलोने। कुछ दिन तक दिखे सभी सुंदर चमकीले। उड़े रंग, तिरे अंग, हो गये घिनौने। जैसे–जैसे बड़ा हुआ होता गया बौना। जिंदगी मिली कि जैसे कांच का खिलौना। मौन को अधर मिले अधरों को वाणी। …

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अभी न सीखो प्यार – धर्मवीर भारती

अभी न सीखो प्यार - धर्मवीर भारती

यह पान फूल सा मृदुल बदन बच्चों की जिद सा अल्हड़ मन तुम अभी सुकोमल‚ बहुत सुकोमल‚ अभी न सीखो प्यार! कुंजों की छाया में झिलमिल झरते हैं चांदी के निर्झर निर्झर से उठते बुदबुद पर नाचा करतीं परियां हिलमिल उन परियों से भी कहीं अधिक हलका–फुलका लहराता तन! तुम अभी सुकोमल‚ बहुत सुकोमल‚ अभी न सीखो प्यार! तुम जा …

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अन्कोरवाट हिन्दू मंदिर, सिमरिप, कम्बोडिया

अन्कोरवाट हिन्दू मंदिर, सिमरिप, कम्बोडिया

पौराणिक काल का कम्बोज देश कल का कम्पूचिया और आज का कम्बोडिया है जहां सदियों के कालखण्ड में 27 राजाओं ने राज किया। कोई हिन्दू रहा, कोई बौद्ध। यही वजह है कि पूरे देश में दोनों धर्मों के देवी-देवताओं की मूर्तियां बिखरी पड़ी हैं। भगवान बुद्ध तो हर जगह हैं ही, लेकिन शायद ही कोई ऐसी खास जगह हो, जहां …

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एकादशी का व्रत

एकादशी का व्रत

ये बात बिल्कुल सही है कि एकादशी का व्रत करने से भगवान श्री हरि बड़े प्रसन्न होते हैं तथा वे मनुष्य का दुर्भाग्य, गरीबी व क्लेश समाप्त कर देते हैं परंतु समझने वाली बात यह है कि जो भगवान श्री हरि अपनी भक्ति से प्रसन्न होकर या हरि भक्ति के एक अंग एकादशी से प्रसन्न होकर हमारा दुर्भाग्य हमेशा-हमेशा के …

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अब तो पथ यही है – दुष्यन्त कुमार

अब तो पथ यही है - दुष्यन्त कुमार

जिंदगी ने कर लिया स्वीकार‚ अब तो पथ यही है। अब उभरते ज्वार का आवेग मद्धिम हो चला है‚ एक हलका सा धुंधलका था कहीं‚ कम हो चला है‚ यह शिला पिघले न पिघले‚ रास्ता नम हो चला है‚ क्यों करूं आकाश की मनुहार‚ अब तो पथ यही है। क्या भरोसा‚ कांच का घट है‚ किसी दिन फूट जाए‚ एक …

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देवी सत्यभामा मंदिर, पुट्टपर्थी, आंध्र प्रदेश

देवी सत्यभामा मंदिर, पुट्टपर्थी, आंध्र प्रदेश

संपूर्ण विश्व में भगवान श्रीकृष्ण के बहुत सारे मंदिर हैं, लेकिन उनकी पटरानियों और रानियों के बहुत कम मंदिर हैं। भगवान कृष्ण की आठ पटरानियां थी सत्यभामा उन्हीं में से एक थीं। उनका एकमात्र मंदिर आंध्र प्रदेश में पुट्टपर्थी में अवस्थित है जहां बहुत से विख्यात मंदिर हैं। माना जाता है कि संसार में यह देवी सत्यभामा का एकमात्र मंदिर …

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गोवत्स द्वादशी (बछवारस) व्रत

गोवत्स द्वादशी (बछवारस) व्रत

भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली द्वादशी को गोवत्स द्वादशी के नाम से जाना जाता हैं। इसे बछवारस भी कहते हैं। 9 सितंबर, बुधवार को यह त्यौहार मनाया जाएगा। इस रोज पुत्रवती महिलाएं गाय व बछड़ों की पूजा करती हैं। कैसे करें पूजन

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Walking Alone? Get virtual company with this App

Walking Alone? Get virtual company with this App

If the thought of walking home alone worries you anytime, here comes a public safety mobile phone app that offers you a virtual company by allowing your friends or family members to a keep watch over you. The application named “Companion”, originally developed by students of University of Michigan in the US with the aim of providing lone travellers in …

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आदत – सहने की – ओम प्रकाश बजाज

आदत - सहने की - ओम प्रकाश बजाज

जरा – जरा सी बात पर, न शोर मचाओ। थोड़ा बहुत सहने की, आदत भी बनाओ। चोट – चपेट तो सब को, लगती रहती है। कठिनाइया परेशानियां तो, आती-जाती रहती है। धीरज रखना ही पड़ता है, सहना – सुनना भी पड़ता है। सहनशीलता जीवन में, बहुत काम आती है। निराश होने से हमें, सदा बचाती है। ~ ओम प्रकाश बजाज

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आठवाँ आने को है – अल्हड़ बीकानेरी

आठवाँ आने को है - अल्हड़ बीकानेरी

मंत्र पढ़वाए जो पंडित ने, वे हम पढ़ने लगे, यानी ‘मैरिज’ की क़ुतुबमीनार पर चढ़ने लगे। आए दिन चिंता के फिर दौरे हमें, पड़ने लगे, ‘इनकम’ उतनी ही रही, बच्चे मगर बढ़ने लगे। क्या करें हम, सर से अब पानी गुज़र जाने को है, सात दुमछल्ले हैं घर में, आठवाँ आने को है। घर के अंदर मचती रहती है सदा …

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