हैंबोकलेंग नोंगसेज

हैंबोकलेंग नोंगसेज

[ads]एक समय की बात है मेघालय की पश्चिमी खासी की पहाड़ियों में एक 13 साल का लड़का हैनबोकलिंग नोंगसेज रहता था। वह पोनकंग गाँव के एक राजकीय प्राइमरी स्कूल में पड़ता था। वह सात साल का ही हुआ था, जब उसके माता पिता का देहांत हो गया। वह अपने नाना-नानी के घर रहता था।

एक दिन की बात है। दोपहर का समय था, अचानक उसके मामा के घर में आग लग गई। उसके मामा घर पर नहीं थे और मामी पास ही खेतों में कम कर रही थी। उनका नौ महीने का लड़का के अन्दर था। जब उसकी मामी ने घर में आग लगी देखी, वह मदद के लिए चिल्लाने लगी। लगा बहुत फ़ैल चुकी थी, ऊंची ऊंची लपटें उठ रही थी। गाँव के सभी लोग इकट्ठा हो गए, लेकिन अन्दर जाने का साहस कोई नहीं कर पा रहा था।

नोंगसिज अपने भाई को बहुत प्यार करता था। वह उसे बचाने के लिए आग की लपटों की परवाह किए बिना अंदर घुस गया। आग से उसके बाल थोड़े-से जल गए और आग की तपिश से शरीर झुलसने लगा था। लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी और अपने रोते हुए भाई को उठा कर बाहर की ओर भागा। सभी ने उसे प्यार से गले से लगा लिया और उसकी बहुत तारीफ़ की। इस बहादुरी के लिए नोंगसिज को गयाधनी अवार्ड दिया गया।

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