सिपाही: वीर जवानों की शहादत पर भावुक कर देने वाली कविता

सिपाही: वीर जवानों की शहादत पर भावुक कर देने वाली कविता

अजय देवगन ने ‘मनोज मुंतशिर’ की नई कविता में बयां किया वीर जवानों की शहादत की भावुक कर देने वाली कहानी

बॉलीवुड में अपने दमदार अभिनय का लोहा मनवाने वाले एक्टर अजय देवगन इंडस्ट्री के जाने माने एक्टर हैं। अजय ने अपने करियर में अबतक कई तरह के रोल को पर्दे पर जिया है। अजय न सिर्फ एक अच्छे एक्टर हैं बल्कि एक सच्चे देश भक्त भी हैं। इस बात का सबूत उन्होंने अपनी हाल ही में दिया। अजय ने अपनी कविता  ‘सिपाही’ के जरिए भारतीय जवानों को श्रद्धांजलि दी है। उनकी ये कविता काफी भावुक कर देने वाली है। इस कविता के जरिए उन्होंने देश के वीर जवानों की शहादत की कहानी को बयां किया है।

सिपाही: मनोज मुंतशिर

सरहद पे गोली खाके जब टूट जाए मेरी सांस
मुझे भेज देना यारों मेरी बूढ़ी मां के पास

बड़ा शौक था उसे मैं घोड़ी चढूं
धमाधम ढोल बजे
तो ऐसा ही करना
मुझे घोड़ी पे लेके जाना
ढोलकें बजाना
पूरे गांव में घुमाना
और मां से कहना
बेटा दूल्हा बनकर आया है
बहू नहीं ला पाया तो क्या
बारात तो लाया है

मेरे बाबूजी, पुराने फ़ौजी, बड़े मनमौजी
कहते थे – बच्चे, तिरंगा लहरा के आना
या तिरंगे में लिपट के आना
कह देना उनसे, उनकी बात रख ली
दुश्मन को पीठ नहीं दिखाई
आख़िरी गोली भी सीने पे खाई

मेरा छोटा भाई, उससे कहना
क्या मेरा वादा निभाएगा
मैं सरहदों से बोल कर आया था
कि एक बेटा जाएगा तो दूसरा आएगा

मेरी छोटी बहना, उससे कहना
मुझे याद था उसका तोहफ़ा
लेकिन अजीब इत्तेफ़ाक़ हो गया
भाई राखी से पहले ही राख हो गया

वो कुएं के सामने वाला घर
दो घड़ी के लिए वहां ज़रूर ठहरना
वहीं तो रहती है वो
जिसके साथ जीने मरने का वादा किया था
उससे कहना
भारत मां का साथ निभाने में उसका साथ छूट गया
एक वादे के लिए दूसरा वादा टूट गया

बस एक आख़िरी गुज़ारिश
आख़िरी ख़्वाहिश
मेरी मौत का मातम न करना
मैने ख़ुद ये शहादत चाही है
मैं जीता हूं मरने के लिए
मेरा नाम सिपाही है

~ मनोज मुंतशिर

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