संकल्प: नेहा की आयु 5 वर्ष थी। एक दिन जब स्कूल में Parent-Teacher meeting हुई तो किसी कारण उसकी मम्मी स्कूल न आ पाईं। नेहा को मन ही मन मम्मी पर गुस्सा आ रहा था। आखिर स्कूल में छुट्टी हुई तो नेहा सीधी घर आई। जब वह कमरे में आई तो देखा कि उसकौ मम्मी बिस्तर पर पड़ी हैं और …
Read More »छोटों को दो प्यार: आइये जाने चीते ने कैसे अपना जन्मदिन मनाया
छोटों को दो प्यार: आज चीते का जन्मदिन था, जो आजकल कुछ उदास-सा रहता था क्योंकि उसके सब बच्चे दूसरे जंगलों में रहने चले गए थे। उसकी पत्नी ने सलाह दी, “आज जंगल के जानवरों के साथ हिल-मिल कर, बातें करके अपना दिन बिताइए। आपने अपना जन्मदिन बहुत अच्छी तरह से मनाया, आपको इस बात की खुशी होगी।” छोटों को …
Read More »नए साल का जश्न: अगले पल का मालूम नहीं तो कल की चिंता क्यूँ करना
नए साल का जश्न: खीखी गाँव में आज सुबह से ही फ़िर किसी बात पर लोगों ने हँसना शुरू कर दिया था। बात इतनी सी थी कि बूढ़ी काकी ने बिना चश्में के अपनी बकरी को कुत्ता समझ लिया था और वह उसे हड़काते हुए घास चराने के लिए मैदान की ओर ले जा रही थी। पर मुखिया खिल्लड़ प्रसाद …
Read More »शिबू का नया साल: गरीब विद्यार्थी की प्रेरक कहानी
शिबू का नया साल: नया साल आने वाला था और क्लास के सभी बच्चों में खुसुर पुसुर शुरू हो गई थी। सबको पता था कि इस साल भी प्रिंसिपल सर बच्चों के साथ नए साल पर कोई बढ़िया सा आइडिया लेकर आएँगे। क्लास का मॉनीटर दीपेश डस्टर से दस बार ब्लैक बोर्ड पोंछ चुका था पर प्रिंसिपल सर ने अभी …
Read More »अनोखी दोस्त: देवांश गाँव आया और उसकी दोस्ती हो गयी नन्ही से
अनोखी दोस्त: देवांश के दादा जी और दादी जी गांव में जमीदार थे। एक दिन वह नदी के किनारे-किनारे टहल रहा था, अचानक उसकी दृष्टि एक गिलहरी पर पड़ी । वह अपने दोनों हाथों से कुछ खा रही थी। देवांश दबे पांव उसके पास गया। उसने सोचा कि वह डर कर भाग जाएगी, मगर वह नहीं भागी। “अरे, तुम्हें मुझसे …
Read More »क्रिसमस गिफ्ट: दादाजी की दिल छू लेने वाली कहानी
क्रिसमस गिफ्ट: हर साल की तरह इस बार भी सब तरफ क्रिसमस के नज़दीक आते ही चारो ओर ही जोरो शोरो से तैयारियां शुरू हो चुकी थी। नन्हा जेम्स भी अपनी खिड़की से बाहर बाज़ार की ओर झाँककर खुश हो रहा था। आज सन्डे था और उसके पापा ने चर्च ले जाने का वादा किया था और उसके बाद उसे …
Read More »मैं डॉक्टर बनूँगा: नाम से कुछ नहीं होता सोच सकारात्मक होनी चाहिए
मैं डॉक्टर बनूँगा: सात साल का शिखर अपनी मम्मी के साथ अस्पताल गया। दरअसल ठंड लगने के कारण उसकी तबीयत कुछ नासाज थी। अस्पताल के पर्ची काऊंटर पर लंबी लाइन लगी हुई थी, इसलिए मम्मी ने उसे एक बैंच पर बैठा दिया और वह खुद लाइन में लग गई। शिखर बैंच पर बैठा-बैठा बोर हो गया था तो वह इधर-उधर …
Read More »भोला की बांसुरी: जानिए कैसे बांसुरी की धुन ने गाँव को अकाल से बचाया
भोला अपने गांव का बहुत सीधा-सादा व्यक्ति था। लोग उसे इसलिए पसंद नहीं करते थे, क्योंकि वह कुछ कामकाज नहीं करता था। भोला अपने परिवार की आंखों में तिनके की रह चुभता था। उसे बांसुरी बजाने का बहुत शौक था। वह गांव के बाहर एक तालाब के किनारे अक्सर बांसुरी बजाया करता था। उसकी बांसुरी की मधुर धुन सुनकर वहां …
Read More »अद्भुत मेंढक: जंतु विज्ञान का स्कूल प्रोजेक्ट जिसने सब को चौका दिया
मोंटी और उसकी बहन सोनी एक ही कक्षा में पढ़ते थे। उनकी जंतु विज्ञान में बहुत गहरी रुचि थी। कक्षा 10 की विज्ञान कौ अध्यापिका ने सभी बच्चों को जंतु विज्ञान पर एक प्रोजैक्ट बनाने के लिए कहा। “मोंटी हम दोनों मिलकर एक ही प्रोजैक्ट बना लेते हैं… मैडम से मैंने पूछ लिया है” सोनी ने कहा। “वह तो ठीक …
Read More »शिबू ने लालटेन जलाई – सबने दिवाली मनाई: एक बहादुर चरवाहे की कहानी
शिबू ने लालटेन जलाई – सबने दिवाली मनाई: बहुत समय पहले की बात है… एक गाँव था शिवपुर। उसी गाँव में एक चरवाहा रहता था, बहुत ही सीधा और भोला-भाला बिना किसी लालच और बिना किसी स्वार्थ के सबके दुःख सुख में एक पैर से खड़ा रहता था। गाँव वाले भी उसकी निश्चलता के कारण उसे बहुत प्यार करते थे। …
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