Stories in Hindi

अंकुर का कमाल – चैतन्य

अंकुर का कमाल - चैतन्य

अपने गावं में भोलाशंकर एक अच्छा खासा दुकानदार था। आसपास के गांवो में भी राशन की कोई अच्छी दुकान नहीं थी। इसलिए भोलाशंकर की दुकान खूब चलती थी। गांव से 15 किलोमीटर दूर एक छोटा सा शहर पड़ता था, उसी शहर से भोलाशंकर बिक्री के लिए सौदा ले कर आता। 15 दिन में बिक्री के मुताबिक़ माल की तीन-चार खेप …

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तीन ज्ञानवर्धक प्रेरक प्रसंग

तीन ज्ञानवर्धक प्रेरक प्रसंग

छोटी-छोटी घटनाएं कई बार बहुत बड़ी सीख दे जाती हैं। आज हम आपके साथ ऐसे ही तीन प्रेरक प्रसंग share कर रहे हैं जो हमें बहुत अच्छी सीख देते हैं। प्रेरक प्रसंग १ –  स्वर्ग- नरक शास्त्रों में निपुण, प्रसिद्ध ज्ञानी एवं प्रख्यात संत श्री देवाचार्य के शिष्य का नाम महेन्द्रनाथ था। एक शाम महेन्द्रनाथ अपने साथियों के साथ उद्यान …

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माँ तो आखिर माँ होती है

माँ तो आखिर माँ होती है

एक छोटे से कसबे में समीर नाम का एक लड़का रहता था। बचपन में ही पिता की मृत्यु हो जाने के कारण परिवार की आर्थिक स्थिति बड़ी दयनीय थी, समीर की माँ कुछ पढ़ी-लिखी ज़रुर थीं लेकिन उतनी पढाई से नौकरी कहाँ मिलने वाली थी सो घर-घर बर्तन मांज कर और सिलाई-बुनाई का काम करके किसी तरह अपने बच्चे को …

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माँ – मेरी माँ

माँ - मेरी माँ

पति के घर में प्रवेश करते ही पत्नी का गुस्सा फूट पड़ा: “पूरे दिन कहाँ रहे? आफिस में पता किया, वहाँ भी नहीं पहुँचे! मामला क्या है?” “वो-वो… मैं…” पति की हकलाहट पर झल्लाते हुए पत्नी फिर बरसी, “बोलते नही? कहां चले गये थे। ये गंन्दा बक्सा और कपड़ों की पोटली किसकी उठा लाये?” “वो मैं माँ को लाने गाँव चला गया …

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भिखारी का आत्मसम्मान – किरण साहू

एक भिखारी किसी स्टेशन पर पेँसिलोँ से भरा कटोरा लेकर बैठा हुआ था। एक युवा व्यवसायी उधर से गुजरा और उसनेँ कटोरे मेँ 50 रूपये डाल दिया, लेकिन उसनेँ कोई पेँसिल नहीँ ली। उसके बाद वह ट्रेन मेँ बैठ गया। डिब्बे का दरवाजा बंद होने ही वाला था कि अधिकारी एकाएक ट्रेन से उतर कर भिखारी के पास लौटा और …

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बन्दर और मगरमच्छ – विष्णु शर्मा

बंदर का कलेजा (बन्दर और मगरमच्छ) पंचतंत्र की प्रसिद्ध कहानियों में से एक है जिसके रचयिता आचार्य विष्णु शर्मा हैं। एक नदी किनारे हरा-भरा विशाल पेड़ था। उस पर खूब स्वादिष्ट फल उगे रहते। उसी पेड़ पर एक बंदर रहता था। बडा मस्त कलंदर। जी भरकर फल खाता, डालियों पर झूलता और कूदता-फांदता रहता। उस बंदर के जीवन में एक …

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भूख – आनन्द प्रिय शर्मा

बाक़ी दिनों की तरह आज भी मै अपना काम ख़त्म करके फेक्टरी से घर के लिए लौट रहा था। पिछले कुछ दोनों से नए प्रोजेक्ट की जद्दोजहद जो मेनेजमेंट के साथ चल रही थी आखिरकार ख़त्म हुई, उस पर खुशी ये की जीत मेरी हुई। अपना पसंदीदा गीत गुनगुनाते, बाजार से गुजरते हुए नजरें मिठाई की दूकान पर टिक गई …

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मज़बूती – सुरेन्द्र कुमार अरोड़ा

मज़बूती – सुरेन्द्र कुमार अरोड़ा

आतंकवाद, अपराध और फिरौती की घटनाओं से शहर और प्रदेश की हवा भय और असुरक्षा की आंधी में बदल चुकी थी। हर दिन किसी न किसी वारदात से लोग सहमें हुऐ थे। वे भूल गये थे कि प्रदेश में सरकार या पुलिस भी है। वे चाहने लगे थे कि शीघ्र चुनाव हो और सत्ता उर्जावान, ईमानदार नई पौध को सौंप …

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