एक रात के निम्बू: हमारे साथ रहने के लिए गांव से दादी जी आई। सब उनसे अच्छी तरह से मिले। बल्लू ने भी उन्हें प्रणाम किया, उसके बाद अपने मोबाइल में डूब गया। दादी जी ने उलाहना दिया, “बल्लू जब तू छोटा था, मुझे एक मिनट के लिए भी नहीं छोड़ता था। अब तुझे मेरी कोई परवाह नहीं!” “नहीं-नहीं, दादी …
Read More »रुपए पर लिखना पड़ा महंगा: भारतीय मुद्रा का अपमान कानूनी अपराध है
रुपए पर लिखना पड़ा महंगा: दीपक सातवी कक्षा में पढ़ने वाला एक होनहार छात्र था। उसी के पड़ोस में एक बंटी नाम का लड़का रहता था जो उसका दोस्त था। एक दिन बंटी के साथ वह हिंदी की पुस्तक खरीदने दुकान पर गया पर किताब उपलब्ध नहीं होने की वजह से दुकानदार ने बंटी को अपना मोबाईल नंबर दे दिया। …
Read More »नेक दिली: प्रवासी पक्षी और बड़ोपल झील किनारे बरगद के पेड़ की कहानी
नेक दिली: बगुलों का एक झुंड साइबेरिया से हजारों किलोमीटर की यात्रा करके भारत के बड़ोपल झील में सर्दियों की छुट्टी मनाने आता है। चूंकि साइबेरिया में सर्दियों में बहुत ज्यादा ठंड पड़ती है इसलिए साइबेरियन बगुले – ग्रेट फ्लेमिंगो, वाटर फ्लेमिंगो, राजहंस आदि अपने परिवारों सहित हजारों की संख्या में बड़ोपल झौल में मस्ती व उछल-कूद करने आते हैं …
Read More »पुरस्कार का असली हकदार: गरीब माँ-बाप के होनहार बेटे की शिक्षाप्रद कहानी
पुरस्कार का असली हकदार: हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी सोनू के स्कूल में वार्षिक पुरस्कार वितरण समारोह होने वाला था, मगर इस बार इसे लेकर सोनू अति उत्साहित था क्योंकि उसने 10वीं कक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त किया था, जिसके लिए उसे भी सम्मानित किया जाना था। उसके अध्यापकों ने उसे हिदायत दी कि पुरस्कार ग्रहण करने के लिए …
Read More »गोलू की मुस्कान: साइकिल की टक्कर का पश्चाताप पर प्रेरणादायक हिंदी कहानी
गोलू की मुस्कान हिंदी कहानी: गोलू के जन्मदिन पर उसके पापा ने उसे एक सुंदर साइकिल उपहार में दी। अपना मनपसंद गिफ्ट पाकर गोलू बहुत खुश था। खुशी के साथ उसे मलाल भी था। मलाल यह था कि उसे साइकिल चलाना नहीं आती थी इसलिए उसने अपने दोस्त वैभव से कहा, “मुझे साइकिल चलाना सीखा दोगे?” “हां क्यों नहीं। कल …
Read More »लौट आओ पापा: पितृ दिवस पर हिंदी बाल-कहानी
लौट आओ पापा: कहते है जाने वाला कभी लौट कर नहीं आता है, पर इन सभी बातों को झुठलाते हुए, आप लौट आओ पापा। घर पर आपकी बहुत ज़रूरत है। ज़रूरत तो हम सबको है पर माँ को सबसे ज़्यादा। कल भैया का फ़ोन आया था। बता रहे थे कि माँ अभी भी देहरी पर बैठी रहती है किसी ना …
Read More »बाबूजी: पितृ दिवस पर कहानी
पितृ दिवस पर कहानी: बाबूजी – जब ईश्वर जरुरत से ज्यादा झोली में गिर देता हैं तो वह भी मनुष्य के लिए अहंकार और पतन का कारण बन जाता हैं। ऐसा ही कुछ हुआ चाँदनी के साथ… सभ्य, सुशील और बेहद महत्वकांशी चाँदनी को जब महात्मा गाँधी के आदर्शों पर जीवन पर्यन्त चलने वाले ईमानदार और अकेले बाबूजी ने उसे …
Read More »चाचा जी की होली: होली पर नटखट बाल-कहानी
चाचा जी की होली: होली के त्योहार पर नटखट बाल-कहानी शांतनु की शैतानी के किस्से पूरे मोहल्ले में मशहूर थे। अगर किसी के घर की खिड़की का काँच टूटा हो तो देखने वाले को तुरंत समझ में आ जाता था कि बॉल ज़रूर शांतनु की होगी। अगर किसी के घर की कोई डोरबेल बजा कर भाग जाता था तो भी …
Read More »दीपक की होली: होली पर शिक्षाप्रद बाल कहानी
“इस बार होली खेलने के लिए मैं तुम्हारे घर ही आ जाउंगी” सिमी ने राहुल से कहा। “हाँ, तुम्हारी छत बहुत बड़ी है। यहाँ से हमें आधा शहर तो यूँ ही दिख जाता है” मंजुल ने मुस्कुराते हुए कहा। “मैं तो गुलाबी रंग का गुलाल लगाउंगी। मुझे गुलाबी रंग बहुत पसंद है” सलोनी ने खुश होते हुए कहा। “कभी शीशे …
Read More »बिल्लू की पतंग: कहानी एक चंचल बच्चे की
बिल्लू हमेशा की तरह अपनी किताब पकड़े हुए बगीचे में बैठा हुआ था पर उसकी नज़रें आसमान में उड़ती हुई लाल पतंग पर टिकी हुई थी। मम्मी जो कि पास ही बैठी गुलाब के पौधों की कटाई-छंटाई कर रही थी उसे बीच बीच में देख लेती थी। वह मन ही मन बहुत खुश हो रही थी कि करीब एक घंटा …
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