Poems In Hindi

बच्चों की हिन्दी कविताएं — 4to40 का हिन्दी कविताओ का संग्रह | Hindi Poems for Kids — A collection of Hindi poems for children. पढ़िए कुछ मजेदार, चुलबुली, नन्ही और बड़ी हिंदी कविताएँ. इस संग्रह में आप को बच्चो और बड़ो के लिए ढेर सारी कविताएँ मिलेंगी.

मेरी कविता – तमन्ना भसीन – Poetry about writing a poem for school magazine

मेरी कविता - तमन्ना भसीन - Poetry about writing a poem for school magazine

आज कक्षा में यह नोटिस आया, मैडम ने यह फरमाया। झट-पट से एक कविता लिखा ला, विद्यालय पत्रिका में उसको छपवा। मुझको कविता लिखना नहीं है आता, सोच-सोच कर मन पछताया। घर जाकर पापा को पकड़ा, शोर मचाया कर लिया झगड़ा। पास बैठाकर उनसे बोली, मुझे लिखवा दो एक कविता। उसको लेकर दौड़ी आई मैडम को जल्दी दिखलाई। उसे देखकर …

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पढ़ लो, भाई! – रिद्धी शर्मा – Children’s Poetry in Hindi

पढ़ लो, भाई! - रिद्धी शर्मा - Children's Poetry in Hindi

स्कूल खुल गए, पढ़ लो भाई, मस्ती छोड़ अब करों पढ़ाई पढ़ते-लिखते हैं जो बच्चे, वे लगते हैं, सब को अच्छे। अनपढ़ का जीवन बेकार, मिले न उसको बंगला, कार। बिन पढ़ाई न कोई चारा, बच्चा बन जाता नकारा। लोग तरस भी उस पर खाते, पर न मदद को आगे आते। इसलिए कहते है भाई, मस्ती छोड़ अब करो पढ़ाई। …

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जुगनू – हरिवंश राय बच्चन

जुगनू - हरिवंश राय बच्चन

अँधेरी रात में दीपक जलाए कौन बैठा है? उठी ऐसी घटा नभ में छिपे सब चांद औ’ तारे, उठा तूफान वह नभ में गए बुझ दीप भी सारे, मगर इस रात में भी लौ लगाए कौन बैठा है? अँधेरी रात में दीपक जलाए कौन बैठा है? गगन में गर्व से उठउठ, गगन में गर्व से घिरघिर, गरज कहती घटाएँ हैं, …

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आई होली – जितेश कुमार

आई होली - जितेश कुमार

सराबोर रंगों में होकर, खुशियों के बीजों को बोकर आओ खेलें मिलकर होली होली-होली आई होली रंग-गुलाल गलियों में उड़ता आपस में सब खुशियां करता। खाता गुझिया पूरन-पोली होली-होली आई होली ढोल-मज़ीरे थप-थप बजते रंग-बिरंगे बच्चे लगते सूरत दिखती कितनी भोली होली-होली आई होली मौसम भी बन गया सुहाना बुनकर मस्ती का ताना-बाना सहज प्यार से निकली बोली होली-होली आई …

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जब तुम्हीं अनजान बन कर रह गए – शांति सिंहल

जब तुम्हीं अनजान बन कर रह गए - शांति सिंहल

जब तुम्हीं अनजान बन कर रह गए‚ विश्व की पहचान लेकर क्या करूं? जब न तुम से स्नेह के दो कण मिले‚ व्यथा कहने के लिये दो क्षण मिले। जब तुम्हीं ने की सतत अवहेलना‚ विश्व का सम्मान लेकर क्या करूं? जब तुम्हीं अनजान बन कर रह गए‚ विश्व की पहचान लेकर क्या करूं? एक आशा एक ही अरमान था‚ …

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निष्क्रियता – राजीव कृष्ण सक्सेना

निष्क्रियता - राजीव कृष्ण सक्सेना

कहां तो सत्य की जय का ध्वजारोहण किया था‚ कहां अन्याय से नित जूझने का प्रण लिया था‚ बुराई को मिटाने के अदम उत्साह को ले‚ तिमिर को दूर करने का तुमुल घोषण किया था। बंधी इन मुठ्ठियों में क्यों शिथिलता आ रही है? ये क्यों अब हाथ से तलवार फिसली जा रही है? निकल तरकश से रिपुदल पर बरसने …

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मदारी का वादा – राजीव कृष्ण सक्सेना

मदारी का वादा - राजीव कृष्ण सक्सेना

बहुत तेज गर्मी है आजा सुस्ता लें कुछ पीपल की छैयां में पसीना सुख लें कुछ थका हुआ लगता है मुझे आज बेटा तू बोल नहीं सकता पर नहीं छुपा मुझसे कुछ कितनी ही गलियों में कितने चुबारों में दिखलाया खेल आज कितने बाज़ारों में कितनी ही जगह आज डमरू डम डम बोला बंसी की धुन के संग घुमा तू …

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जीवन की ही जय है – मैथिली शरण गुप्त

जीवन की ही जय है - मैथिली शरण गुप्त

मृषा मृत्यु का भय है जीवन की ही जय है जीव की जड़ जमा रहा है नित नव वैभव कमा रहा है पिता पुत्र में समा रहा है यह आत्मा अक्षय है जीवन की ही जय है नया जन्म ही जग पाता है मरण मूढ़-सा रह जाता है एक बीज सौ उपजाता है सृष्टा बड़ा सदय है जीवन की ही …

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दुनिया एक खिलौना – निदा फ़ाज़ली

दुनिया एक खिलौना - निदा फ़ाज़ली

दुनिया जिसे कहते हैं‚ जादू का खिलौना है मिल जाए तो मिट्टी है‚ खो जाए तो सोना है। अच्छा सा कोई मौसम‚ तन्हा सा कोई आलम हर वक्त का रोना तो‚ बेकार का रोना है। बरसात का बादल तो दीवाना है क्या जाने किस रााह से बचना है, किस छत को भिगोना है। ग़मा हो या खुशी दोनो कुछ देर …

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दिवंगत मां के नाम पत्र – अशोक वाजपेयी

दिवंगत मां के नाम पत्र – अशोक वाजपेयी

व्यर्थ के कामकाज में उलझे होने से देर हो गई थी और मैं अंतिम क्षण तुम्हारे पास नहीं पहुँच पाया था! तुम्हें पता नहीं उस क्षण सब कुछ से विदा लेते मुझ अनुपस्थित से भी विदा लेना याद रहा कि नहीं जीवन ने बहुत अपमान दिया था पर कैंसर से मृत्यु ने भी पता नहीं क्यों तुम्हारी लाज नहीं रखी …

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