Poems For Kids

Poetry for children: Our large assortment of poems for children include evergreen classics as well as new poems on a variety of themes. You will find original juvenile poetry about trees, animals, parties, school, friendship and many more subjects. We have short poems, long poems, funny poems, inspirational poems, poems about environment, poems you can recite

इतने ऊँचे उठो: द्वारिका प्रसाद महेश्वरी

इतने ऊँचे उठो - द्वारिका प्रसाद महेश्वरी

इतने ऊँचे उठो कि जितना उठा गगन है। देखो इस सारी दुनिया को एक दृष्टि से सिंचित करो धरा, समता की भाव वृष्टि से जाति भेद की, धर्म-वेश की काले गोरे रंग-द्वेष की ज्वालाओं से जलते जग में इतने शीतल बहो कि जितना मलय पवन है॥ नये हाथ से, वर्तमान का रूप सँवारो नयी तूलिका से चित्रों के रंग उभारो …

Read More »

वीर तुम बढ़े चलो, धीर तुम बढ़े चलो: द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी

वीर तुम बढ़े चलो, धीर तुम बढ़े चलो - द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी

वीर तुम बढ़े चलो, धीर तुम बढ़े चलो। हाथ में ध्वजा रहे बाल दल सजा रहे ध्वज कभी झुके नहीं दल कभी रुके नहीं वीर तुम बढ़े चलो, धीर तुम बढ़े चलो। सामने पहाड़ हो सिंह की दहाड़ हो तुम निडर डरो नहीं तुम निडर डटो वहीं वीर तुम बढ़े चलो, धीर तुम बढ़े चलो। प्रात हो कि रात हो संग हो न …

Read More »

उठो धरा के अमर सपूतो: द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी

उठो धरा के अमर सपूतो - द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी

उठो धरा के अमर सपूतो पुनः नया निर्माण करो। जन जन के जीवन में फिर से नई स्फूर्ति, नव प्राण भरो। नया प्रात है, नई बात है, नई किरण है, ज्योति नई। नई उमंगें, नई तरंगे, नई आस है, साँस नई। युग युग के मुरझे सुमनों में, नई नई मुसकान भरो। डाल डाल पर बैठ विहग कुछ नए स्वरों में …

Read More »

बम बम बोले मस्ती में डोले: प्रसून जोशी

Prasoon Joshi's Student Teacher Classroom Fun Song बम बम बोले मस्ती में डोले

चका राका ची चाय चो चका लो रूम गंदो वंदो लाका राका तुम अक्को तकको इड्डी गिद्दी गिद्दी गो इड्डी पी विदि पी चिकि चका चो गीली गीली मॉल सुलू सुलू मॉल मका नका हुकू बुकू रे तुकु बुकू रे चका लाका बिक्को चिक्को सिली सिली सिली गो बगड़ दम चगद दम चिकि चका चो देखो देखो क्या वो पेड़ …

Read More »

सारे के सारे गामा को लेकर गाते चले: गुलज़ार

Gulzar's Bollywood Evergreen Family Song in Hindi सारे के सारे गामा को लेकर गाते चले

सारे के सारे गामा को लेकर गाते चले – २ पापा नहीं है धानी सी दीदी, दीदी के साथ हैं सारे सारे के सारे — पापा नहीं है — सा से निकले रोज़ सवेरा दूर करे अँधियारा रे से रेशमी किरणों ने दूर  किया उजियारा सूरज की रोशन किरणों पे सारे गाते चले पापा नहीं है धानी सी दीदी, दीदी …

Read More »

मास्टरजी की आ गयी चिट्ठी: गुलज़ार

मास्टरजी की आ गयी चिट्ठी - गुलज़ार

दिन ताका ताका दिन अ आ इ ई, अ आ इ ई मास्टरजी की आ गई चिट्ठी चिट्ठी में से निकली बिल्ली चिट्ठी में से निकली बिल्ली बिल्ली खाय ज़र्दा पान काला चश्मा पीली कान आहा अ आ इ ई, अ आ इ ई मास्टरजी की आ गई चिट्ठी चिट्ठी में से निकली बिल्ली चिट्ठी में से निकली बिल्ली दिन …

Read More »

मैं कभी बतलाता नहीं, पर अँधेरे से डरता हूँ मैं माँ: प्रसून जोशी

मैं कभी बतलाता नहीं, पर अँधेरे से डरता हूँ मैं माँ: प्रसून जोशी

मैं कभी बतलाता नहीं, पर अँधेरे से डरता हूँ मैं माँ यूँ तो मैं दिखलाता नहीं, तेरी परवाह करता हूँ मैं माँ तुझे सब हैं पता, हैं ना माँ तुझे सब हैं पता, मेरी माँ भीड़ में यूँ ना छोड़ो मुझे, घर लौट के भी आ ना पाऊँ माँ भेजना इतना दूर मुझको तू, याद भी तुझको आ ना पाऊँ …

Read More »

इचक दाना बीचक दाना दाने ऊपर दाना: शैलेन्द्र

इचक दाना बीचक दाना दाने ऊपर दाना - शैलेन्द्र

इचक दाना बीचक दाना दाने ऊपर दाना, इचक दाना… छज्जे ऊपर लड़की नाचे लड़का है दीवाना, इचक दाना… बोलो क्या? प्रनाम, इचक दाना बीचक दाना दाने ऊपर दाना इचक दाना छोटी सी छोकरी लालबाई नाम है… पहने वोह घाघरा एक पैसा दाम है… मुह मे सबके आग लगाए आता है रुलाना, इचक दाना… बोलो क्या? मिच्री!!, इचक दाना बीचक दाना …

Read More »

तारे ज़मीन पर: प्रसून जोशी

तारे ज़मीन पर - प्रसून जोशी Contemplation Poem in Hindi

देखो इन्हे यह है ओस की बूंदे, पत्तों की गोद मे आसमान से कूदे अंगड़ाई ले के फिर करवट बदल कर, नाज़ुक से मोती हंस दे फिसल कर खो न जाए ये… तारे ज़मीन पर यह तो है सर्दी मे धुप की किरणे उतरे जो आंगन को सुन्हेरा सा करने मन के अंधेरो को रोशन सा कर दे ठिठुरती हथेली …

Read More »

नन्हे मुन्ने बच्चे तेरी मुट्ठी में क्या है: शैलेन्द्र

नन्हे मुन्ने बच्चे तेरी मुट्ठी में क्या है – शैलेन्द्र

र: (नन्हे मुन्ने बच्चे तेरी मुट्ठी में क्या है) –२ आ: मुट्ठी में है तक़दीर हमारी को: मुट्ठी में है तक़दीर हमारी आ: हम ने क़िस्मत को बस में किया है को: हम ने क़िस्मत को बस में किया है र: (भोली भली मतवाली आँखों में क्या है) –२ आ: आँखोन में झूमे उम्मीदों की दिवाली को: आँखोन में झूमें उम्मीदों की …

Read More »